रांची:आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंड की तर्ज पर नक्सल अभियान में झारखंड जगुआर की भूमिका बेहद कारगर है. निर्माण के पंद्रह सालों में जगुआर की वजह से माओवादी समेत तमाम उग्रवादी संगठनों पर नकेला कसा है. नक्सलियों के खिलाफ झारखंड की स्पेशल फोर्स ने अपना 15 वां स्थापना दिवस मनाया. डीजीपी अजय कुमार सिंह जगुआर के पंद्रहवें स्थापना दिवस के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए.
Jharkhand Jaguar Foundation Day: 15 साल का हुआ झारखंड जगुआर, नक्सल मुक्त राज्य के सपने को साकार रहा स्पेशल फोर्स - 15 साल का हुआ झारखंड जगुआर
झारखंड जगुआर 15 साल का हो गया है. स्थापना दिवस के मौके पर रांची में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्र में डीजीपी अजय कुमार ने जवानों का उत्साह बढ़ाया.
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2008 में हुआ था स्थापना:2008 में स्थापना से अब तक झारखंड जगुआर की झोली में अनगिनित उपलब्धियां हैं. जगुआर जवानों को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि नक्सल पर आपके खून पसीने से काबू पाया गया. अब नक्सली चंद इलाकों में सीमित हैं. 15 साल में जगुआर ने नक्सल आउटफिट्स के खिलाफ बेहतर काम किया है. डीजीपी ने कहा कि कदम से कदम मिलाकर जगुआर के कर्मियों ने जिला पुलिस के साथ काम किया है. नए लड़के बेहतर काम कर रहे. वर्तमान सरकार ने पुलिस को चुनौतियों को ठीक करने की दिशा में काम किया है. ऐसे में पुलिस का मनोबल बढ़ा है. जगुआर नक्सल की दिशा में बेहतर काम कर रहा है. पंद्रह सालों में 300 से अधिक नक्सल की गिरफ्तारी हुई और कइयों को मार गिराए गया. डीजीपी ने कहा कि राष्ट्रविरोधी ताकतों का जब तक उन्मूलन नहीं होता तब तक जगुआर अपनी भूमिका में अग्रसर रहेगा.
जगुआर जवानों ने दिखाया नक्सल एनकाउंटर का लाइव एक्शन:कार्यक्रम के दौरान जगुआर के जवानों ने डेमो कर नक्सल अभियान के दौरान एनकाउंटर जैसा माहौल दिखाया. जवानों ने इस डेमो में बताया कि कैसे माओवादी जंगल, पहाड़ों में ग्रामीणों को उकसाते हैं, इसके बाद पुलिस बलों की घेराबंदी के लिए जगह जगह पर आईईडी लगायी जाती है. जवानों के लिए आईईडी की चुनौती से निपटना और माओवादियों का मुकाबला बिहड़ों में कितना मुश्किल होता है. जगुआर के जवानों ने यह दिखाया. एनकाउंटर के दौरान कोई कर्मी जख्मी होता है तो बीच मुठभेड़ में उसके बॉडी के तौर पर तैनात जवान की भूमिका भी डेमो के जरिए दिखाया गया.