हैदराबाद : ईस्टर के दिन श्रीलंका में आतंकी हमलों के एक बाद एक साल बीत गए. हालांकि, एक साल के बाद भी इस द्वीप राष्ट्र पर हुए भीषण हमलों से जुड़े कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं. हमलों की बरसी से ठीक एक दिन पहले जब श्रीलंका पुलिस प्रवक्ता एसपी जालिया सेनारत्ने ने जानकारी दी कि अपराधी देश में दूसरे हमले की योजना भी बना रहे थे.
अधिकारी के हवाले से अखबार ने बताया, 'हाल में गिरफ्तार संदिग्धों ने खुलासा किया कि वे कट्टरपंथ की तालीम देने, युवाओं को इस्लाम की गलत व्याख्या कर भड़काने वाले कुछ संगठनो के लिए काम करते हैं.'
पिछले साल आज ही के दिन हुए हमले में 259 से अधिक निर्दोष मारे गए जिनमें 45 विदेशी नागरिक (11 भारतीय) और तीन पुलिस अधिकारी शामिल थे, और कम से कम 500 लोग घायल हुए थे. इसके अलावा करोड़ो संपत्ति का नुकसान हुआ था.
इस हमले में कोलोंबो , नेगोमबो और बैटिकलोआ में ईसाईयों को ईस्टर संडे के दौरान लक्षित कर विस्फोट किया गया था.
एक साल बाद कहां पहुंची जांच?
इस मामले में जांच कर रही पुलिस ने दो हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां की. इस हमले के बाद श्रीलंकन पुलिस ने एक प्रमुख वकील और एक मुस्लिम राजनीतिक दल के नेता के भाई को गिरफ्तार किया, जो कथित रूप से आत्मघाती हमलावरों में शामिल थे.
नेशनल थोहेद जमात ने करवाया था हमला
स्थानीय इस्लामिक चरमपंथी समूह नेशनल थोहेद जमात (NTJ) से जुड़े नौ आत्मघाती हमलावरों ने 21 अप्रैल, 2019 को तीन चर्च और तीन लग्जरी होटल में विस्फोट किया. NTJ एक जिहादी समूह है, जो इस्लामिक स्टेट से संबद्ध है. हमले के बादश्रीलंकन सरकार ने इस समूह पर प्रतिबंध लगा दिया.
कोरोना वायरस के कारण लोगों ने घर में मनाया ईस्टर
श्रीलंका में ईसाईयों ने रविवार को अपने घरों में ईस्टर मनाया, टेलीविजन के माध्यम से धार्मिक सेवाओं में भाग लिया क्योंकि कोरोन वायरस महामारी के कारण चर्च बंद रहे.
टीवी स्टेशनों ने हिंद महासागर द्वीप राष्ट्र में उपयोग की जाने वाली तीन मुख्य भाषाओं में ईस्टर विजिल और होली मास को प्रसारित किया. लेकिन 259 से अधिक लोगों को याद करने के लिए कोई संगठित कार्यक्रम नहीं थे.
मरने वालों में अधिकतर कैथोलिक समुदाय से संबंधित