भरतपुर:राजस्थान का इतिहास हमेशा से गौरवान्वित रहा है. इसे वीरों की धरती कहा जाता है, साथ ही राजस्थान सांस्कृतिक विरासत के रूप में काफी समृद्ध रहा है. लेकिन भरतपुर का मलाह क्षेत्र आज बदनाम गलियों की वजह से पहचाना जाता है. हालांकि, इसका इतिहास ऐसा नहीं रहा है. प्रचीन काल में इस क्षेत्र को सभ्यता, मूर्तिकला और हिंदू धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचाना जाता था. विश्व विरासत दिवस के अवसर पर ईटीवी भारत आज आपको इसी बदनाम क्षेत्र के समृद्ध इतिहास से रू-ब-रू कराएगा.
हिन्दू धर्म का प्रमुख केंद्र था मलाह : इतिहास के प्रोफेसर सतीश त्रिगुणायत ने बताया कि मलाह क्षेत्र में मिली प्राचीन (Great History of Bharatpur) प्रतिमाओं से इस बात का पता चलता है कि यह क्षेत्र (Malah Area Was Major Center of Hinduism) गुप्त काल एवं मध्य पूर्व काल में हिंदू धर्म का प्रमुख केंद्र रहा होगा. बताया जाता है कि यहां पर उस समय करीब 3 मंदिर स्थित थे, जो कि इसके गौरवशाली इतिहास और हिंदू धर्म के प्रमुख केंद्र के सबसे बड़े गवाह रहे.
8वीं और 10वीं शताब्दी की प्रतिमाएं : प्रो. त्रिगुणायत ने बताया कि भारत विभाजन के समय हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यताएं पाकिस्तान में चली गईं. ऐसी स्थिति में आर्कियोलॉजीकल सर्वे ऑफ इंडिया ने भारत में फिर से खुदाई करना शुरू किया. इस दौरान राजस्थान के पुरातत्व विभाग ने राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में खुदाई कर कई सभ्यताओं की खोज की. इसी के तहत भरतपुर जिले के मलाह क्षेत्र में खुदाई के दौरान आठवीं और दसवीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हुईं. साथ ही कई ताम्र निर्मित अवशेष भी मिले. ये प्राचीन प्रतिमाएं आज भी भरतपुर के राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं.