नई दिल्ली : फिल्म के नाम, कभी सीन्स तो कभी डॉयलाग्स को लेकर विरोध व प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. बॉलीवुड की फिल्मों के विरोध का आलम यह है कि अब फिल्मों के ट्रेलर आते ही उनका बॉयकाट शुरू हो रहा है. इसी कड़ी में बॉलीवुड के सिंघम अजय देवगन की आने वाली फिल्म थैंक गॉड का बॉयकॉट (protest-against-film-thank-god) शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जहां पुतला फूंका गया तो वहीं जौनपुर में एफआईआर दर्ज करायी गयी है. फिल्म में अजय देवगन पर भगवान चित्रगुप्त का मजाक उड़ाने की शिकायत की गयी है. इसके पहले भी आमिर खान की लालसिंह चड्ढा, काली और ब्रह्मास्त्र के विरोध की खबरें सुर्खियां बन चुकी हैं.
यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि हमारे देश में कई फिल्मों के कंटेंट व सीन्स को लेकर विवाद होते रहे हैं. देश में अक्सर फिल्म के निर्माता, निर्देशकों व कलाकारों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज होते रहे हैं, जिसके कारण कई बार विवादास्पद सीन्स हटाए गए तो कई बार फिल्मों का नाम तक बदलना पड़ा है. इतना ही नहीं कई फिल्म कलाकारों को बेवजह कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ा है, तो कई के खिलाफ पुलिस थानों में मुकदमे लिखे गए हैं. तो आइए डालते हैं हाल के दशक में विवादास्पद फिल्मों पर एक नजर...
इस साल की विवादित फिल्में
- लालसिंह चड्ढा-आमिर खान की फिल्म लालसिंह चड्ढा को आमिर खान के एक पुराने बयान के कारण विवादों में आना पड़ा था. 2015 के साक्षात्कार में दिए गए बय़ान के कारण इस फिल्म का विरोध किया गया था.
- काली-फिलहाल आयी डॉक्यूमेंट्री फिल्म काली के पोस्टर ने नए विवाद को जन्म दिया था, जिसमें काली देवी को धूम्रपान करते हुए दिखाया गया था.
- ब्रह्मास्त्र-यह फिल्म भी रणबीर कपूर के पुराने के इंटरव्यू के चलते ट्रोल हुई थी. बजरंग दल ने अभिनेता की टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए हंगामा किया था. इस फिल्म में अभिनेता अपने जूते पहने हुए एक मंदिर की घंटी बजाते हुए दिखाई दे रहे है.
ये भी हैं विवाद में रहने वाली 21 फिल्में
- बैंडिट क्वीन-1994 में देश की चर्चित महिला डकैत फूलन देवी के जीवन पर आधारित यह फिल्म विवादों में आयी थी. शेखर कपूर के द्वारा बनायी गयी इस फिल्म में अभद्र भाषा, सेक्सुअल कंटेंट और जातिगत टिप्पणियों के कारण चर्चा में आयी थी. हालांकि बैंडिट क्वीन ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था.
- फायर-1996 में लेस्बियनिज्म थीम पर बनी इस फिल्म का शिव सैनिकों और बजरंग दल के सदस्यों ने जमकर विरोध किया था. हालांकि फिल्म बनाने वालों ने इसे अलग तरह के सिनेमा के रुप में पेश करने की बात कही थी. शबाना आजमी इस फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहीं थीं.
- सिन्स- 2005 में शाइनी आहूजा स्टारर फिल्म सिन्स सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म बतायी जाती है, जिसमें एक कैथोलिक पादरी का एक युवती के साथ प्रेम संबंध होता है. इसे संवेदनशील मुद्दे को छूने वाली फिल्म बताकर विरोध किया गया. इस फिल्म को कई टीवी चैनलों ने भी सपोर्ट नहीं किया.
- वाटर- 2005 में दीपा मेहता द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आश्रमों में रहने वाली विधवाओं के सादगी पूर्ण जीवन और उनकी चुनौतियों को दिखाने की कोशिश की गयी. इसका विरोध करने वाले लोगों ने इसे हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली फिल्म बताकर विरोध किया. इसके पोस्टरों को भी जलाया गया था. सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पाठक ने फिल्म निर्माण को रोकने के लिए आत्महत्या करने की भी धमकी दी थी.
- फना- 2006 में आयी इस फिल्म में आमिर खान ने भूमिका निभायी थी. नर्मदा बचाओ आंदोलन का समर्थन करने के कारण गुजरात में सत्तारूढ़ दलों और अन्य लोगों ने इसका जमकर विरोध किया था. इस फिल्म के न चलने के कारण यश चोपड़ा को आमिर खान फिल्म करने के लिए ली गयी धनराशि का एक बड़ा हिस्सा लौटा दिया गया था.
- पिंक मिरर-2006 में आयी पिंक मिरर को प्रायोगिक फिल्म कहा गया था. इस फिल्म में ट्रांस-सेक्सुअलिटी की अवधारणा को अलग तरीके से दिखाने की कोशिश की गयी है. इसमें दो ट्रांससेक्सुअल और एक समलैंगिक किशोरी और उससे जुड़ी छेड़खानियों की कहानी है. फिल्म समीक्षकों और फिल्म समारोहों में फिल्म की समीक्षा के बाद भी इसे प्रतिबंधित कर दिया था.
- ब्लैक फ्राइडे-2007 में आयी यह फिल्म 1993 के मुंबई के बम धमाकों पर आधारित थी. उस समय मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी. इस फिल्म का विरोध इसलिए किया गया कि यह कोर्ट के निर्णय को प्रभावित कर सकती है. यही वजह था कि इस फिल्म को 2 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था.
- परजानिया- 2007 में आयी इस फिल्म को भलेहि भारतीय सेंसर बोर्ड ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन कट्टरपंथी हिंदू समर्थकों ने इसकी कहानी व प्रजेंटेशन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कहा था कि यह फिल्म मुसलमानों का सपोर्ट करती है.
- जोधा अकबर-2008 में राजस्थानी पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म जोधा अकबर को राजपूतों की भावना को ठेस पहुंचाने वाली फिल्म बताकर विरोध किया गया. आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म का राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में जमकर विरोध किया गया था. हालांकि बाद में कई राज्यों ने फिल्म पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया था.
- माई नेम इज खान- 2010 में शाहरुख खान की यह फिल्म विवादों के बावजूद सुपरहिट रही. शिवसेना ने उस समय इसका विरोध किया था.
- द डर्टी पिक्चर-2011 में आई विद्या बालन की इस बोल्ड भूमिका वाली फिल्म का विरोध हुआ. अपनी बेबाक अदाओं से सुर्खियां बटोरने में सफल रही इस फिल्म को सिल्क स्मिता के जीवन पर आधारित बताया गया था. फिल्म के निर्माताओं को सिल्क स्मिता के भाइयों द्वारा इस तरह की सामग्री परोसने के लिए नोटिस भी भेजा गया था.
- आरक्षण-2011 में शिक्षा व्यवस्था में जाति आधारित कोटे के मामले को लेकर बनी यह फिल्म विवादों में आ गयी थी. प्रकाश झा की इस फिल्म को उत्तर प्रदेश, पंजाब के साथ ही आंध्र प्रदेश में भी बैन किया गया था.
- ओह माय गॉड-2012 में भारतीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को छेड़ने वाले सीन व कमेंट को लेकर बनी यह विवादों में आ गयी थी. फिल्म ओह माय गॉड ने फिल्म में दिखाए गए रीति-रिवाजों की वजह से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात कही गयी थी.
- राम लीला- 2013 में संजय लीला भंसाली ने दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह को साथ लेकर यह फिल्म बनायी थी. रामलीला नाम और फिल्म में सेक्स और हिंसा को देखकर इसके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला दायर किया था. बाद में फिल्म का नाम बदलना पड़ा.
- पीके -2014 में आयी आमिर खान की इस फिल्म के कुछ सीन व डॉयलाग्स को लेकर विवाद हुआ था. फिल्म के कुछ दृश्यों ने कई धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कहा गया था. फिल्म में कुछ रीति-रिवाजों को अंधविश्वास बताकर उसका मजाक उड़ाया गया था.
- इंडियाज डॉटर- 2015 में ब्रिटिश फिल्म निर्माता लेस्लीउडविन की डॉक्यूमेंट्री, यूके, भारत और सात अन्य देशों में 8 मार्च को प्रसारित होने वाली थी. लेकिन उसको लेकर विवाद हो गया था. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दिन सामूहिक बलात्कार और निर्भया की मौत के तथ्यों पर आधारित फिल्म पर विवाद था.
- बाजी राव मस्तानी- 2015 में 18वीं सदी की एक कहानी को रोमांस के अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश में बाजीराव मस्तानी विवादों में ला दिया था. इस फिल्म पर इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगा था.
- उड़ता पंजाब-2016 में पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की सामाजिक पृष्ठभूमि पर बनी इस मल्टी-स्टारर फिल्म न केवल पंजाबी लोगों ने विरोध किया बल्कि रीलीज करने के पहले कई सीन काटने पड़े. सीबीएफसी ने कथित तौर पर फिल्म में कुल 89 कट लगाने को कहा था.
- लिपस्टिक अंडर माय बुर्का-2017 में आयी इस फिल्म पर इंडियन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म प्रमाणन ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे एडल्ट कैटेगरी की फिल्म करार दिया था. इस फिल्म के कई सीन्स व संवादों को लेकर विवाद से घिर गयी थी.
- पद्मावत-2018 में निर्देशक संजय लीला भंसाली की इस फिल्म का राजस्थानी राजपूतों ने जमकर विरोध किया था और कहा कि इसमें उनका अपमान करते हुए गलत जानकारी परोसी गयी है. इसमें लोगों ने फिल्म के कलाकारों के सिर पर इनाम भी घोषित कर दिया था.
- क्वीन- 2019 में आयी इस फिल्म को तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन व विवादों से जोड़कर दिखाने की कोशिश थी. इसीलिए जयललिता की भतीजी और भतीजों ने फिल्म मेकर्स के खिलाफ केस दर्ज करा दिया था और बिना परिवार की अनुमति से फिल्म बनाने का आरोप लगाया था.