प्रयागराजःइन दिनों सनातन बोर्ड के गठन की मांग सुर्खियों में हैं. देवकीनंदन ठाकुर समेत लगातार कई संत इसके गठन की मांग उठा रहे हैं. अब सवाल उठता है कि आखिर यह बोर्ड है क्या और किस तरह काम करेगा. आखिर इसका गठन क्यों जरूरी बताया जा रहा है. इस बोर्ड के गठन को लेकर महाकुंभ में 27 जनवरी को धर्म संसद में अहम चर्चा होने जा रही है. इसमें इस बोर्ड से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती है.
कब उठी थी मांगःबीते वर्ष कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड के गठन की मांग उठाई थी. वह अपनी कथाओं में लगातार देश के मठों और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और सनातन बोर्ड द्वारा मठों और मंदिरों के संचालन का जिम्मा उठाए जाने की मांग कर रहे हैं. वह मांग कर रहे हैं कि यह बोर्ड शंकाराचार्य और संतों के आधीन होना चाहिए ताकि मठों और मंदिरों का संचालन संतों के हाथ में ही रहे और मंदिरों की व्यवस्थाओं को अच्छे से संचालित किया जा सके. बीते वर्ष 16 नवंबर को दिल्ली में हुई धर्म संसद में वक्फ बोर्ड की तर्ज पर सनातन बोर्ड के गठन की मांग के साथ ही कृष्ण जन्मभूमि निर्माण और तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट करने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई थी. इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री सदानन्द सरस्वती समेत कई संत मौजूद थे.
तिरुपति प्रसादम मामले के बाद उठी थी मांगःदेवकीनंदन ठाकुर ने बीते वर्ष तिरुपति के प्रसाद में मिलावट सामने आने के बाद इस बोर्ड की मांग उठाई थी. इसमें उन्होंने ऐसे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किए जाने औऱ सनातन बोर्ड के आधीन किए जाने की मांग उठाई थी. इसी के बाद से सनातन बोर्ड के गठन का मामला काफी चर्चा में आ गया था.
कैसे होगा गठनः बीते दिनों अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने महाकुंभ में इस बोर्ड के गठन के स्वरूप को लेकर कहा था कि इस बोर्ड में देश के सभी मठों और छोटे-छोटे मंदिरों से जुड़े संतों और महंतों की राय शामिल की जाएगी. इसके बाद इस बोर्ड का गठन किया जाएगा. इसके बाद सर्वसम्मति से इसका अध्यक्ष चुना जाएगा. बोर्ड का मुख्य काम मठों और मंदिरों का बेहतर संचालन और सनातन धर्म का प्रसार होगा. इस बोर्ड से देश के सभी 13 अखाड़ों के संत जुड़ेंगे.