शिमला:सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू शनिवार को दिल्ली से वापस हिमाचल लौट चुके हैं. अब सीएम सुक्खू के समक्ष दो बड़ी चुनौतियां हैं और उन्हें 24 घंटे के भीतर दो अहम मामलों में फैसला करना है. सीएम के गृह जिला हमीरपुर के भोटा में राधा स्वामी सत्संग ब्यास का भोटा चैरिटेबल अस्पताल चल रहा है. डेरा ब्यास प्रबंधन इस अस्पताल को अपनी ही सिस्टर कंसर्न महाराज जगत सिंह मेडिकल रिलीफ सोसायटी को ट्रांसफर करना चाहता है. ऐसा ना होने की सूरत में पहली दिसंबर को अस्पताल बंद करने का नोटिस गेट पर लगाया गया है.
अब सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले को लेकर रविवार को हाई लेवल मीटिंग बुलाई है. मीटिंग बुलाने का भोटा के स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही ये भी कहा है कि यदि बैठक में कोई ठोस फैसला नहीं होता है और अस्पताल के बंद होने की नौबत आती है तो प्रदर्शन को उग्र किया जाएगा. ऐसे में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष इस मामले का हल निकालना बड़ी चुनौती है. ये मसला सुलझाना कोई आसान काम नहीं है. कारण ये है कि यदि भोटा चैरिटेबल अस्पताल को महाराज जगत सिंह मेडिकल रिलीफ सोसायटी को ट्रांसफर किया जाना है तो उसके लिए लैंड सीलिंग एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा.
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लैंड सीलिंग एक्ट में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक लाना होगा. विधानसभा में विधेयक पास होने के बाद ये राष्ट्रपति भवन की मंजूरी के लिए जाएगा. कारण ये है कि लैंड सीलिंग एक्ट संविधान के द्वारा प्रोटेक्टिड है और इसमें संशोधन के लिए राष्ट्रपति भवन की मंजूरी चाहिए. यही कारण है कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार के दिन भी अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग बुलाई है. इसी मीटिंग के कारण स्थानीय जनता ने भोटा में अस्पताल के बाहर प्रदर्शन को रोका है. अब रविवार की मीटिंग में जो फैसला होगा, उससे राधास्वामी सत्संग ब्यास प्रबंधन को अवगत करवाया जाएगा. ऐसे में संभावना है कि ब्यास प्रबंधन भी पहली दिसंबर से अस्पताल को बंद ना करे और सरकार के फैसले के अनुसार अस्पताल को सुचारू रूप से चलाकर आगे भी सुविधाएं जारी रहें, जब तक विधानसभा में विधेयक नहीं आता. हिमाचल विधानसभा का विंटर सेशन 18 दिसंबर से शुरू होगा. उससे पहले विधेयक का प्रारूप तैयार करना होगा.