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सोनभद्र में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 वर्ष कैद की सजा - राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र

सोनभद्र में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने 10 वर्ष कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है.

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जनपद एवम् सत्र न्यायालय सोनभद्र
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Published : Oct 21, 2022, 7:28 AM IST

सोनभद्र: जनपद में साढ़े नौ वर्ष पूर्व 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र निहारिका चौहान की अदालत ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी राजकुमार को 10 वर्ष की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी. वहीं, दो महिलाओं शीला और गीता को दोषसिद्ध पाकर 7-7 वर्ष की कैद और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड न अदा करने पर 5-5 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी. अर्थदंड की समूची धनराशि 50 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र (Robertsganj Kotwali Area) के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने 27 जून 2013 को कोतवाली में दी तहरीर में बताया था कि उसकी पत्नी की मौत हो गई है. घर पर उसकी 16 बर्षीय नाबालिग बेटी रहती है. अकेलेपन का फायदा उठाकर आरोपी राजकुमार अक्सर बेटी के साथ दुष्कर्म करता था और उसे किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी दिया करता था, जिसकी वजह से बेटी 6 माह की गर्भवती भी हो गई. इस कार्य में शीला और गीता ने बखूबी सहयोग किया है. इस तहरीर पर राबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया. विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में राजकुमार, पत्नी शीला और गीता के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था.

इसी कड़ी में मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी राजकुमार को 10 वर्ष की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. जबकि दो महिलाओं शीला और गीता को दोषसिद्ध पाकर 7-7 वर्ष की कैद के साथ ही 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड अदा न करने पर 5-5 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. उधर दोशियों के द्वारा जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी. बता दें कि, अर्थदंड की समूची धनराशि 50 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी. हालांकि न्यायालय द्वारा यह फैसला साढ़े नौ वर्ष बाद दिया गया है. लेकिन फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने अत्यधिक राहत महसूस की है.

सोनभद्र: जनपद में साढ़े नौ वर्ष पूर्व 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र निहारिका चौहान की अदालत ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी राजकुमार को 10 वर्ष की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी. वहीं, दो महिलाओं शीला और गीता को दोषसिद्ध पाकर 7-7 वर्ष की कैद और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड न अदा करने पर 5-5 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी. अर्थदंड की समूची धनराशि 50 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र (Robertsganj Kotwali Area) के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने 27 जून 2013 को कोतवाली में दी तहरीर में बताया था कि उसकी पत्नी की मौत हो गई है. घर पर उसकी 16 बर्षीय नाबालिग बेटी रहती है. अकेलेपन का फायदा उठाकर आरोपी राजकुमार अक्सर बेटी के साथ दुष्कर्म करता था और उसे किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी दिया करता था, जिसकी वजह से बेटी 6 माह की गर्भवती भी हो गई. इस कार्य में शीला और गीता ने बखूबी सहयोग किया है. इस तहरीर पर राबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया. विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में राजकुमार, पत्नी शीला और गीता के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था.

इसी कड़ी में मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी राजकुमार को 10 वर्ष की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. जबकि दो महिलाओं शीला और गीता को दोषसिद्ध पाकर 7-7 वर्ष की कैद के साथ ही 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड अदा न करने पर 5-5 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. उधर दोशियों के द्वारा जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी. बता दें कि, अर्थदंड की समूची धनराशि 50 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी. हालांकि न्यायालय द्वारा यह फैसला साढ़े नौ वर्ष बाद दिया गया है. लेकिन फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने अत्यधिक राहत महसूस की है.

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