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गोरखपुर में ड्यूटी से गायब चल रहे 12 डॉक्टर, नहीं हो रही कार्रवाई - gorakhpur cmo

यूपी के गोरखपुर में काफी लंबे समय से ड्यूटी से गायब चल रहे डॉक्टरों का स्वास्थ्य विभाग पता लगाने में नाकामयाब साबित हुआ है. वहीं ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि डॉक्टरों के खिलाफ शासन को समय-समय पर सूचना भेजी जा चुकी है, लेकिन शासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी
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Published : Sep 6, 2019, 11:28 AM IST


गोरखपुर: सीएम के शहर गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवा को पटरी पर लाने के लिए विभाग खूब मशक्कत कर रहा है, लेकिन ड्यूटी से कई सालों से गायब चल रहे 12 डॉक्टरों का पता लगाने में वह अभी तक नाकाम है. वहीं ऐसे डॉक्टरों का वेतन तो नहीं निकल रहा, लेकिन सीएमओ कार्यालय स्तर से शासन को कई बार इस बारे में लिखित सूचना भेजी गई है. शासन की तरफ से न तो इन डॉक्टरों पर कोई वैधानिक कार्रवाई की गई है और न ही इन्हें सेवा से मुक्त किया गया है. इसी मामले को लेकर ईटीवी भारत ने सीएमओ से बातचीत की.

संवाददाता ने दी मामले की जानकारी.

पढ़ें: गणेश चतुर्थी पर हुआ गोरखपुर एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई का 'श्रीगणेश'

जानिए कौन-कौन से डॉक्टर चल रहे हैं ड्यूटी से गायब
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी की माने तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ शासन को समय-समय पर सूचना भेजी जाती है, जो डॉक्टर गायब चल रहे हैं, उनमें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास अग्रवाल 13 मई 2018 से, डॉ. पंकज मल्ल (आर्थो) 1 नवंबर 2009 से, डॉक्टर संजीव कुमार सिंह (आर्थो )1 फरवरी 2011 से, डॉ. विनय कुमार गौड़ (आर्थो) 28 जुलाई 2018 से, डॉ. रामजीत 1 अप्रैल 2018 से, डॉक्टर गोपाल (पीडियाट्रिक) 1 अप्रैल 2018 से, डॉ. अमरेंद्र कुमार फिजीशियन 4 जनवरी 2017 से, डॉक्टर समीर 9 अगस्त 2011 से, डॉक्टर संजय गुप्ता (सर्जन)21 जुलाई 2014 से, डॉ पंकज दीक्षित फिजीशियन 13 अगस्त 2017 से, डॉ. प्रदीप कुमार (रेडियोलॉजिस्ट)17 जून 2013 से और डॉक्टर सत्येंद्र पाल (आर्थो) 1 जुलाई 2018 से गायब चल रहे हैं. जिनकी जानकारी शासन को भी है बावजूद इसके इनके खिलाफ न तो एफआईआर हुआ और न ही बर्खास्तगी या दंडात्मक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

डॉ. खुद इस्तीफा न देकर शासन से कार्रवाई का कर रहे हैं इंतजार
सूत्रों की माने तो ऐसे डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस में संलिप्त हैं और वह खुद इस्तीफा न देकर शासन स्तर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. क्योंकि विभागीय नियमावली के अनुसार डॉक्टर एक समय सीमा से पहले अगर इस्तीफा देते हैं तो वह शासन द्वारा दंडित किए जा सकते हैं. ऐसे में वह फरार चल रहे हैं. जिससे सरकार उन्हें ख़ुद सेवा मुक्त कर दे.


गोरखपुर: सीएम के शहर गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवा को पटरी पर लाने के लिए विभाग खूब मशक्कत कर रहा है, लेकिन ड्यूटी से कई सालों से गायब चल रहे 12 डॉक्टरों का पता लगाने में वह अभी तक नाकाम है. वहीं ऐसे डॉक्टरों का वेतन तो नहीं निकल रहा, लेकिन सीएमओ कार्यालय स्तर से शासन को कई बार इस बारे में लिखित सूचना भेजी गई है. शासन की तरफ से न तो इन डॉक्टरों पर कोई वैधानिक कार्रवाई की गई है और न ही इन्हें सेवा से मुक्त किया गया है. इसी मामले को लेकर ईटीवी भारत ने सीएमओ से बातचीत की.

संवाददाता ने दी मामले की जानकारी.

पढ़ें: गणेश चतुर्थी पर हुआ गोरखपुर एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई का 'श्रीगणेश'

जानिए कौन-कौन से डॉक्टर चल रहे हैं ड्यूटी से गायब
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी की माने तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ शासन को समय-समय पर सूचना भेजी जाती है, जो डॉक्टर गायब चल रहे हैं, उनमें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास अग्रवाल 13 मई 2018 से, डॉ. पंकज मल्ल (आर्थो) 1 नवंबर 2009 से, डॉक्टर संजीव कुमार सिंह (आर्थो )1 फरवरी 2011 से, डॉ. विनय कुमार गौड़ (आर्थो) 28 जुलाई 2018 से, डॉ. रामजीत 1 अप्रैल 2018 से, डॉक्टर गोपाल (पीडियाट्रिक) 1 अप्रैल 2018 से, डॉ. अमरेंद्र कुमार फिजीशियन 4 जनवरी 2017 से, डॉक्टर समीर 9 अगस्त 2011 से, डॉक्टर संजय गुप्ता (सर्जन)21 जुलाई 2014 से, डॉ पंकज दीक्षित फिजीशियन 13 अगस्त 2017 से, डॉ. प्रदीप कुमार (रेडियोलॉजिस्ट)17 जून 2013 से और डॉक्टर सत्येंद्र पाल (आर्थो) 1 जुलाई 2018 से गायब चल रहे हैं. जिनकी जानकारी शासन को भी है बावजूद इसके इनके खिलाफ न तो एफआईआर हुआ और न ही बर्खास्तगी या दंडात्मक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

डॉ. खुद इस्तीफा न देकर शासन से कार्रवाई का कर रहे हैं इंतजार
सूत्रों की माने तो ऐसे डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस में संलिप्त हैं और वह खुद इस्तीफा न देकर शासन स्तर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. क्योंकि विभागीय नियमावली के अनुसार डॉक्टर एक समय सीमा से पहले अगर इस्तीफा देते हैं तो वह शासन द्वारा दंडित किए जा सकते हैं. ऐसे में वह फरार चल रहे हैं. जिससे सरकार उन्हें ख़ुद सेवा मुक्त कर दे.

Intro:ओपनिंग पीटीसी...

गोरखपुर। मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवा को पटरी पर लाने के लिए विभाग खूब कसरत कर रहा है। लेकिन ड्यूटी से कई सालों से गायब चल रहे 12 डॉक्टरों का पता लगाने में वह असमर्थ हो गया है। ऐसे डॉक्टरों का वेतन तो नहीं निकल रहा लेकिन सीएमओ कार्यालय स्तर से शासन को कई बार इस बारे में लिखित सूचना भेजने के बाद भी इनके खिलाफ अभी तक कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की गई है। ना ही इन्हें सेवा से मुक्त किया गया है और न ही यह स्वास्थ्य और पुलिस महकमे के रडार पर हैं कि गायब चल रहे डॉक्टर आखिर कर क्या रहे हैं। जबकि जिले में डॉक्टरों की संख्या तैनाती के हिसाब से मौजूदा समय में बेहद कम है।

नोट--कम्प्लीट पैकेज, वॉइस ओवर अटैच है। एक्सक्लूसिव


Body:गोरखपुर के सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी की माने तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ शासन को समय समय पर सूचना भेजी जाती है। जो डॉक्टर गायब चल रहे हैं उनमें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विकास अग्रवाल 13 मई 2018 से, डॉ पंकज मल्ल (आर्थो) 1 नवंबर 2009 से, डॉक्टर संजीव कुमार सिंह (आर्थो )1 फरवरी 2011 से, डॉ विनय कुमार गौड़ (आर्थो) 28 जुलाई 2018 से, डॉ रामजीत 1 अप्रैल 2018 से, डॉक्टर गोपाल (पीडियाट्रिक) 1 अप्रैल 2018 से, डॉ अमरेंद्र कुमार फिजीशियन 4 जनवरी 2017 से, डॉक्टर समीर 9 अगस्त 2011 से, डॉक्टर संजय गुप्ता (सर्जन)21 जुलाई 2014 से, डॉ पंकज दीक्षित फिजीशियन 13 अगस्त 2017 से, डॉ प्रदीप कुमार (रेडियोलॉजिस्ट)17 जून 2013 से और डॉक्टर सत्येंद्र पाल (आर्थो) 1 जुलाई 2018 से गायब चल रहे हैं। जिनकी जानकारी शासन को भी है बावजूद इसके इनके खिलाफ न तो एफआईआर हुआ और न ही बर्खास्तगी या दंडात्मक कोई कार्यवाही।

बाइट-डॉ एसके तिवारी, सीएमओ, गोरखपुर


Conclusion:सूत्रों की माने तो ऐसे डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस में संलिप्त हैं और वह खुद इस्तीफा न देकर शासन स्तर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि विभागीय नियमावली के अनुसार डॉक्टर एक समय सीमा से पहले अगर इस्तीफा देते हैं तो वह शासन द्वारा दंडित किए जा सकते हैं। ऐसे में वह फरार चल रहे हैं।जिससे सरकार उन्हें ख़ुद सेवा मुक्त कर दे। पिछले दिनों बस्ती मंडल में प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवेश चतुर्वेदी की कार्रवाई में पता चला कि करीब सैकड़ों डॉक्टर ड्यूटी से नदारद चल रहे हैं। जिनमें 36 की रिपोर्ट बेहद खराब थी तो उनकी बर्खास्तगी का निर्देश जारी हो गया। इस आदेश के बाद सीएम सिटी के डॉक्टरों को तलाशने और कार्रवाई की जद में लेने के लिए एक बार फिर इनके गायब होने की जानकारी शासन को भेजी गई है। अब देखना यह होगा कि शासन किस स्तर का निर्णय करता है।

क्लोजिंग पीटीसी
मुकेश पाण्डेय
Etv भारत, गोरखपुर
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