नागौर. राजस्थान में खारे पानी की सबसे बड़ी सांभर झील, अब तक पक्षियों के लिए स्वर्ग मानी जाती थी. लेकिन अब विश्व भर में इसकी पहचान देशी-विदेशी पक्षियों के कब्रगाह के रूप में हो रही है.
बावजूद इसके सरकारी तंत्र के हालात ऐसे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत के पीछे का कारण तक नहीं पचा तल पाया है. वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई ने मंगलवार को सांभर झील के गुड्डा साल्ट इलाके का जायजा लिया. साथ ही नावा में बने रेस्क्यू सेंटर में पहुंचकर बीमार पक्षियों के उपचार के बारे में भी जानकारी ली.
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री ने स्वीकार किया कि अब तक करीब 16,000 पक्षियों ने दम तोड़ चुके हैं. जबकि पर्यावरण वेदों का कहना है कि झील क्षेत्र में मरने वाले पक्षियों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है.
पक्षियों की मौत के पीछे की वजह के बारे में पूछने पर मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर 'एवियन बोटयूलिस्म' से पक्षियों की मौत की बात सामने आई है. लेकिन, असली कारण जानने के लिए अभी भोपाल और बरेली की प्रयोगशाला की रिपोर्ट का इंतजार है.
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बता दें कि सांभर झील में हजारों देशी- विदेशी पक्षियों की मौत के आंकड़े को लेकर अभी तक विरोधाभास बना हुआ है. अधिकारी और नेताओं के लगातार दौरे के बाद भी कोई सामाधान नहीं निकाला जा सका है. हालात ये हैं कि जिन पक्षियों को रेस्क्यू किया गया है, उन्हें भी नहीं बचाया जा सका है.