जयपुर. राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कृषि कानूनों के विरोध में गहलोत सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों को लेकर मीडिया से रूबरू हुए. राठौड़ ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस और सरकार ने विधानसभा का सत्र ऐसे विषय पर बुलाया है, जो संविधान के संघवाद की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार नहीं होते हुए भी प्रदेश की सरकार राजस्थान विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि और कृषि व्यापार से जुड़े तीन कानूनों में दखल देने की कोशिश कर रही है.
पत्रकार वार्ता के दौरान राठौड़ ने यह भी कहा कि संविधान का शत्रु तो बेशक बुलाया जाना चाहिए, लेकिन इस सत्र में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट को लेकर चर्चा होना चाहिए. साथ ही यह भी चर्चा होना चाहिए कि प्रदेश में लगातार तेजी से बढ़ रहे अपराधों की रोकथाम आखिर कैसे हो.
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राजेंद्र राठौड़ ने मौजूदा नगर निगम चुनाव को लेकर भी प्रदेश सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इन चुनावों में कांग्रेस तमाम तरह के हथकंड़े अपना रही है. बावजूद इसके मौजूदा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पिछड़ेगी. राठौड़ ने इस दौरान यह भी कहा कि प्रदेश की गहलोत सरकार पंचायत राज संस्थानों को पंगु बनाना चाहती है. उन्होंने वित्त आयोग द्वारा पंचायत राज संस्थानों के लिए जारी किए गए फंड का उपयोग अन्य मदों में किए जाने से जुड़ा मसला भी उठाया. साथ ही कहा कि सरकार की मंशा तो यह भी है कि पंचायत और जिला परिषद में बिना सिंबल के चुनाव करवाया जाएं.
गुर्जरों के सर्वमान्य नेता हैं पायलट...
राठौड़ ने एमबीसी आरक्षण को लेकर 1 नवंबर से शुरू होने वाले आंदोलन पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मौजूदा गहलोत सरकार गुर्जर सहित पांच समाजों के हितों के साथ कुठाराघात कर रही है. राठौड़ ने कहा कि इस मसले पर प्रदेश सरकार को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से वार्ता कर समाधान करना चाहिए. प्रदेश में सचिन पायलट गुर्जरों के सर्वमान्य नेता हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ने उन्हें इस मसले में अलग रखा हुआ है.
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हालांकि, इस दौरान जब राजेंद्र राठौड़ से एमबीसी समाज की संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार इस संबंध में केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव भेजेगी तो हम केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि उसे स्वीकार करे. हालांकि ये बात और है कि पूर्व में राजस्थान से इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है. लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस संबंध में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया.