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बजट स्पेशल: HGTU ने जयराम सरकार से की शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की मांग - teacher union suggestions for budget

शिमला में हिमाचल राज्य अध्यापक संघ की आयोजित प्रेस वार्ता में संघ ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के बजट में पिछले वर्षों में कुल बजट का मात्र 17 फीसदी ही बजट दिया जा रहा है. ऐसे में शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट में कोई भी वृद्धि पिछले सालों में नहीं की गई है.

teacher union suggestions for education budget
शिक्षा बजट के लिए शिक्षक संघ के सुझाव
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Published : Mar 1, 2020, 9:20 PM IST

शिमला: इस वित्त वर्ष का बजट पेश होने से पहले ही शिक्षा के लिए बजट में किस तरह के प्रावधान किए जाएं इसे लेकर राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं. संघ का मानना है कि शिक्षा के लिए इस बार बजट में कुछ अलग तरह के प्रावधान किए जाने चाहिए, जिससे कि हिमाचल में दिल्ली की तरह ही स्कूलों का स्तर बेहतर हो सके और शिक्षा में गुणवत्ता आए.

शिमला में हिमाचल राज्य अध्यापक संघ की आयोजित प्रेस वार्ता में संघ ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के बजट में पिछले वर्षों में कुल बजट का मात्र 17 फीसदी ही बजट दिया जा रहा है. ऐसे में शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट में कोई भी वृद्धि पिछले सालों में नहीं की गई है.

संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली मॉडल को अपनाते हुए कम से कम 25 फीसदी का बजट शिक्षा में लगाना चाहिए. वहीं, आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो 2018- 19 में कुल बजट का 41,440 करोड़ था जिसमें से शिक्षा पर 7,044 करोड़ ही खर्च किया गया.

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इसी तरह 2019-20 में भी ये आंकड़ा बढ़कर 7,598 करोड़ पर ही पहुंचा जिससे यह साफ है कि पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 में भी शिक्षा पर कुल बजट 17 फीसदी खर्च किया गया. वीरेंद्र चौहान ने कहा कि आंकड़ों में भी यह सपष्ट हो रहा है कि बजट में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं हो रही है. इसलिए इस बार के बजट में शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान सरकार को करना चाहिए.

एचजीटीयू ने सरकार को सुझाव दिए हैं कि प्रदेश में पहली से 12वीं कक्षा तक स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था के लिए बजट का प्रावधान करने के साथ ही हर खंड स्तर पर कम से कम 5 आदर्श स्कूल, पांचवी से बारहवीं तक के सभी स्कूलों में एक्वागार्ड व आदर्श शौचालय, शिक्षा के क्षेत्र में नवीनीकरण शोध की सुविधा, खेल मैदान, उपकरणों की सुविधा, नई तकनीक जानने के लिए शिक्षकों के लिए अंतर राज्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए.

साथ ही शिक्षकों की मांगें जिसमें पुरानी पेंशन बहाली, अनुबंध काल की अवधि को घटाकर 2 वर्ष करने और प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता एवं अन्य सभी लाभ देने का प्रावधान, पीटीए, पैट और पैरा शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के बराबर लाभ देने और डीए बढ़ाने, एसएमसी और कंप्यूटर शिक्षकों के लिए विधानसभा में स्थाई नीति लाने, एलटी व शास्त्री को टीजीटी पदनाम देने और स्कूल में डाटा एंट्री के लिए पद सृजित करने का प्रावधान भी बजट में रखा जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: दिन में सात बार रंग बदलता है किन्नर कैलाश, भगवान शिव का है शीतकालीन निवास

शिमला: इस वित्त वर्ष का बजट पेश होने से पहले ही शिक्षा के लिए बजट में किस तरह के प्रावधान किए जाएं इसे लेकर राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं. संघ का मानना है कि शिक्षा के लिए इस बार बजट में कुछ अलग तरह के प्रावधान किए जाने चाहिए, जिससे कि हिमाचल में दिल्ली की तरह ही स्कूलों का स्तर बेहतर हो सके और शिक्षा में गुणवत्ता आए.

शिमला में हिमाचल राज्य अध्यापक संघ की आयोजित प्रेस वार्ता में संघ ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के बजट में पिछले वर्षों में कुल बजट का मात्र 17 फीसदी ही बजट दिया जा रहा है. ऐसे में शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट में कोई भी वृद्धि पिछले सालों में नहीं की गई है.

संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली मॉडल को अपनाते हुए कम से कम 25 फीसदी का बजट शिक्षा में लगाना चाहिए. वहीं, आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो 2018- 19 में कुल बजट का 41,440 करोड़ था जिसमें से शिक्षा पर 7,044 करोड़ ही खर्च किया गया.

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इसी तरह 2019-20 में भी ये आंकड़ा बढ़कर 7,598 करोड़ पर ही पहुंचा जिससे यह साफ है कि पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 में भी शिक्षा पर कुल बजट 17 फीसदी खर्च किया गया. वीरेंद्र चौहान ने कहा कि आंकड़ों में भी यह सपष्ट हो रहा है कि बजट में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं हो रही है. इसलिए इस बार के बजट में शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान सरकार को करना चाहिए.

एचजीटीयू ने सरकार को सुझाव दिए हैं कि प्रदेश में पहली से 12वीं कक्षा तक स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था के लिए बजट का प्रावधान करने के साथ ही हर खंड स्तर पर कम से कम 5 आदर्श स्कूल, पांचवी से बारहवीं तक के सभी स्कूलों में एक्वागार्ड व आदर्श शौचालय, शिक्षा के क्षेत्र में नवीनीकरण शोध की सुविधा, खेल मैदान, उपकरणों की सुविधा, नई तकनीक जानने के लिए शिक्षकों के लिए अंतर राज्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए.

साथ ही शिक्षकों की मांगें जिसमें पुरानी पेंशन बहाली, अनुबंध काल की अवधि को घटाकर 2 वर्ष करने और प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता एवं अन्य सभी लाभ देने का प्रावधान, पीटीए, पैट और पैरा शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के बराबर लाभ देने और डीए बढ़ाने, एसएमसी और कंप्यूटर शिक्षकों के लिए विधानसभा में स्थाई नीति लाने, एलटी व शास्त्री को टीजीटी पदनाम देने और स्कूल में डाटा एंट्री के लिए पद सृजित करने का प्रावधान भी बजट में रखा जाना चाहिए.

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