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महिलाओं को बस किराए में 50% छूट पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित किया फैसला, निजी ऑपरेटर ने दाखिल की है याचिका - एचआरटीस बस किराये में महिलाओं को छूट

हिमाचल हाईकोर्ट ने महिलाओं को एचआरटीसी की बसों में 50 फीसदी बस किराये में छूट देने के मामले (Fifty percent Discount in HRTC buses for women) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने निजी बस ऑपरेटर संघ का विवरण और उसका क्षेत्राधिकार जानने के लिए मामले पर दोबारा सुनवाई की. पढ़ें पूरी खबर...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
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Published : Nov 17, 2022, 8:21 PM IST

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी बसों में महिलाओं को किराए में पचास फीसदी छूट की सुविधा दी गई है. राज्य सरकार की तरफ से दी गई इस सुविधा के खिलाफ निजी बस ऑपरेटर्स हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High court) पहुंचे थे. अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस संदर्भ में निजी बस ऑपरेटर की तरफ से याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि उक्त याचिका निजी बस ऑपरेटर यूनियन द्वारा नहीं बल्कि एक निजी ट्रांसपोर्टर रमेश कमल ने दाखिल की है.

याचिकाकर्ता के इस बयान के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने इस याचिका को निजी तौर पर दायर याचिका मान लिया था. उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रधान सचिव व निदेशक परिवहन ने कोर्ट को शपथ पत्र के माध्यम से बताया था कि सरकार से इस फैसले से परिवहन निगम को लगभग 60 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ेगा.(Fifty percent Discount in HRTC buses for women).

हाईकोर्ट को यह भी जानकारी दी गई थी कि परिवहन निगम ने 31 मार्च 2022 तक 221 करोड रुपए का रोड टैक्स अदा नहीं किया है. न्यायालय को बताया गया था कि महिलाओं को किराए में छूट देने का निर्णय कैबिनेट का है, जिसे 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है. महिलाओं को बस किराए में छूट देने बारे प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था, जिसे राज्य सरकार ने कैबिनेट के समक्ष रखा और उसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी.(Private bus operators petition in HP high court).

आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा 7 जून 2022 को जारी की गई यह अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है. दलील दी गईं कि महिलाओं व पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए. पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जारी करने को भी प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है. इस विषय में यह दलील दी गई है कि पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं देने की वजह से निजी बस ऑपरेटर्स को नुकसान उठाना पड़ता है. सारी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

ये भी पढ़ें: सरकारी गाड़ियों के VVIP नंबर पर हाइकोर्ट की फटकार, कहा: कौन सा पुण्य कर्म है जो इनके बिना पूरा नहीं होता

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी बसों में महिलाओं को किराए में पचास फीसदी छूट की सुविधा दी गई है. राज्य सरकार की तरफ से दी गई इस सुविधा के खिलाफ निजी बस ऑपरेटर्स हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High court) पहुंचे थे. अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस संदर्भ में निजी बस ऑपरेटर की तरफ से याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि उक्त याचिका निजी बस ऑपरेटर यूनियन द्वारा नहीं बल्कि एक निजी ट्रांसपोर्टर रमेश कमल ने दाखिल की है.

याचिकाकर्ता के इस बयान के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने इस याचिका को निजी तौर पर दायर याचिका मान लिया था. उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रधान सचिव व निदेशक परिवहन ने कोर्ट को शपथ पत्र के माध्यम से बताया था कि सरकार से इस फैसले से परिवहन निगम को लगभग 60 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ेगा.(Fifty percent Discount in HRTC buses for women).

हाईकोर्ट को यह भी जानकारी दी गई थी कि परिवहन निगम ने 31 मार्च 2022 तक 221 करोड रुपए का रोड टैक्स अदा नहीं किया है. न्यायालय को बताया गया था कि महिलाओं को किराए में छूट देने का निर्णय कैबिनेट का है, जिसे 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है. महिलाओं को बस किराए में छूट देने बारे प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था, जिसे राज्य सरकार ने कैबिनेट के समक्ष रखा और उसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी.(Private bus operators petition in HP high court).

आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा 7 जून 2022 को जारी की गई यह अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है. दलील दी गईं कि महिलाओं व पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए. पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जारी करने को भी प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है. इस विषय में यह दलील दी गई है कि पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं देने की वजह से निजी बस ऑपरेटर्स को नुकसान उठाना पड़ता है. सारी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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