नई दिल्ली : देश भर के कई जवाहर नवोदय विद्यालयों और अन्य सरकारी स्कूलों के लगभग 70 छात्र एक महीने के आवासीय कार्यक्रम के लिए आईआईटी गांधीनगर आए हैं. यहां इन छात्रों को भारत और विदेश के कुछ सर्वश्रेष्ठ मेंटोर्स द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा. दरअसल कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि आने वाले ऐसे छात्र जो से आईआईटी और इंजीनियरिंग में पढ़ाई के इच्छुक हैं, उन्हें आईआईटी की इस विशेष कार्यशाला में शामिल किया गया है. यहां छात्रों को संचार, नेतृत्व और क्रिटिकल थिंकिंग के आवश्यक कौशल से लैस किया जाएगा. इस उद्देश्य से आईआईटी ने 16 भारतीय राज्यों के जवाहर नवोदय विद्यालयों और अन्य सरकारी स्कूलों के लगभग 70 छात्रों के लिए IITGN-दक्षिणा लीडरशिप प्रोग्राम के दूसरे संस्करण की शुरूआत की है.
दक्षणा फाउंडेशन के पुणे, बूंदी, कोट्टायम और लखनऊ केंद्रों से इन छात्र-छात्राओं का चयन दक्षणा में आईआईटी-जेईई की तैयारी में उनके असाधारण प्रदर्शन के आधार पर किया गया है. इन छात्रों के अभिभावकों की वार्षिक आय आम तौर पर 2 लाख रुपये से कम है. इस वर्ष के समूह में दस छात्र ऐसे भी शामिल हैं जो पहले से ही फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस (एफएफई) की छात्रवृत्ति के साथ राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न संस्थानों में पढ़ रहे हैं.
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आईआईटी के मुताबिक कम्युनिकेशन स्किल्स मॉड्यूल उनकी अंग्रेजी भाषा और कम्युनिकेशन स्किल्स को तराशेगा ताकि बोलते समय उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके. विशिष्ट रूप से डिजाइन किए गए 'फाइंडिंग ए लीडर इन यू' कार्यक्रम के साथ एकीकृत लीडरशिप मॉड्यूल का उद्देश्य छात्रों को उनकी ताकत से अवगत कराना और आत्मविश्वास से भरपूर लीडर बनने के लिए उनकी कमजोरियों पर काम करना है.
मुख्य मॉड्यूल के अलावा, महीने भर चलने वाला आवासीय कार्यक्रम छात्रों को कला, नृत्य, खेल, तैराकी, योग, विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को सेन्टर फॉर क्रिएटिव लनिर्ंग के खिलौनों के माध्यम से सीखने के, और साबरमती आश्रम की मुलाकात जैसे विभिन्न पाठ्येतर गतिविधियों में भी सम्मिलित किया गया है. आईआईटी में इस सत्र को संयुक्त राज्य अमेरिका के उद्यमी, रुयिन्तन मेहता ने मेकर भवन फाउंडेशन के साथ कार्यक्रम के लिए अपना उदार समर्थन दिया है.
प्रो जैसन ए मांजली, आईआईटी में मानविकी और सामाजिक विज्ञान के प्रमुख है और वह इस कार्यक्रम का नेतृत्व भी कर रहे हैं. प्रो जैसन ने कहा, हम छात्रों को संचार, नेतृत्व और क्रिटिकल थिंकिंग कौशल से रूबरू कराते हैं. हमारा मानना है कि इन कौशलों का उनके शैक्षणिक अनुभव पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा और यह स्वायत्तता और स्वतंत्रता की भावना प्रदान करेगा.
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--आईएएनएस