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सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लाटों में किसानों का जमावड़ा, बनाए 650 से ज्यादा मोबाइल टॉयलेट

किसानों ने खाली पड़े प्लाट्स पर करीब 675 मोबाइल टॉयलेट बनाए हैं और उनका कहना है कि आसपास के इलाके के लोग भी उनकी पूरी मदद कर रहें हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं हो रही.

Singhu border mobile toilets
सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लाटों में किसानों ने बनाए मोबाइल टॉयलेट
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Published : Feb 13, 2021, 3:25 PM IST

सोनीपत: सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों को करीब 3 महीने पूरे होने को हैं. हालांकि 26 जनवरी को दिल्ली में जो हुआ उसके बाद यहां किसानों की संख्या में थोड़ी कमी देखने को जरूर मिली थी लेकिन राकेश टिकैत की भावनात्मक अपील के बाद इस पूरे आंदोलन में एक बार फिर जान डाल दी है.

ये भी पढ़ें: आंदोलन का 79वां दिन : टिकैत बोले, समझौते पर पहुंचने तक प्रदर्शनकारी किसान घर नहीं लौटेंगे

अब सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लाटों में किसानों ने अपने रहने और खाने पीने की सुविधा के लिए पूरे इंतजाम कर लिए है. किसानों के ये इंतजाम देख कर लग रहा है कि अब आंदोलन कर रहे किसान जल्द ही पीछे हटने वाले नहीं है.

सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लाटों में किसानों ने बनाए मोबाइल टॉयलेट

ये भी पढ़ें: आंदोलन हो रहा है दो फाड़! चढूनी ने साधा राकेश टिकैत पर निशाना

सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लॉटों पर किसानों ने अपने ट्रैक्टर और रहने की व्यवस्था बनानी शुरू कर दी है. ईटीवी से बातचीत में किसानों ने बताया कि आंदोलन में हमें सबसे ज्यादा दिक्कत शौचालयों की हो रही थी, क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए महिलाएं भी बढ़-चढ़कर इस आंदोलन में हिस्सा ले रही है.

ये भी पढ़ें: ...तो इसलिए हरियाणा में बढ़ रही है राकेश टिकैत की दिलचस्पी !

किसानों ने बताया कि इन प्लाट्स पर करीब 675 मोबाइल टॉयलेट बनाए गए हैं जिनका इस्तेमाल किसानों द्वारा किया जा रहा है. किसानों ने बताया कि यहां पर आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे आ रहें हैं और हर कोई अपनी श्रद्धा से इस आंदोलन में सेवा कर रहा है.

सोनीपत: सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों को करीब 3 महीने पूरे होने को हैं. हालांकि 26 जनवरी को दिल्ली में जो हुआ उसके बाद यहां किसानों की संख्या में थोड़ी कमी देखने को जरूर मिली थी लेकिन राकेश टिकैत की भावनात्मक अपील के बाद इस पूरे आंदोलन में एक बार फिर जान डाल दी है.

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अब सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लाटों में किसानों ने अपने रहने और खाने पीने की सुविधा के लिए पूरे इंतजाम कर लिए है. किसानों के ये इंतजाम देख कर लग रहा है कि अब आंदोलन कर रहे किसान जल्द ही पीछे हटने वाले नहीं है.

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सिंघु बॉर्डर पर खाली पड़े प्लॉटों पर किसानों ने अपने ट्रैक्टर और रहने की व्यवस्था बनानी शुरू कर दी है. ईटीवी से बातचीत में किसानों ने बताया कि आंदोलन में हमें सबसे ज्यादा दिक्कत शौचालयों की हो रही थी, क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए महिलाएं भी बढ़-चढ़कर इस आंदोलन में हिस्सा ले रही है.

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किसानों ने बताया कि इन प्लाट्स पर करीब 675 मोबाइल टॉयलेट बनाए गए हैं जिनका इस्तेमाल किसानों द्वारा किया जा रहा है. किसानों ने बताया कि यहां पर आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे आ रहें हैं और हर कोई अपनी श्रद्धा से इस आंदोलन में सेवा कर रहा है.

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