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चांदपुर गांव में बने श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं का अभाव - चांदपुर गांव श्मशान घाट

दिल्ली के बवाना इलाके के चांदपुर गांव में बने श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं का अभाव के कारण लोगों को अंतिम संस्कार करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गांव के लोगों को बारिश के दौरान लकड़ियों के सहारे तिरपाल तान कर पेट्रोल और ज्वलनशील पदार्थ डालकर या अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है, जिससे यहां के ग्रामीणों में दिल्ली सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष है. पिछले कई सालों से अंतिम संस्कार की जगह पर शेड तक कि व्यवस्था नहीं की गई है.

cremation ground in Chandpur village
cremation ground in Chandpur village
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Published : Jul 22, 2022, 8:48 AM IST

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के बवाना विधानसभा का चांदपुर गांव में बने श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते लोग परेशान हैं. लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसी ही एक घटना हाल ही में सामने आया है. यहां श्मशान घाट में गांव वालों ने लकड़ियों के सहारे एक प्लास्टिक को तिरपाल बनाकर उसी के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा. यही नहीं बारिश के चलते लकड़ियों ने भीकने के चलते पेट्रोल और ज्वालनशील पदार्थ डाल कर चिता को जलाना पड़ा.

अंतिम संस्कार की ये तस्वीरें शर्मिंदा करने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं. श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव दिखाई दे रहा है जिस जगह पर अंतिम संस्कार होता है. वहां शेड तक की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसकी वजह से बारिश के दौरान लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. शायद कभी किसी ने यह सोचा भी नहीं होगा कि दिल्ली देहात और ग्रामीण इलाकों में भी अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इस तरीके के चलताऊ बंदोबस्त करने पड़ेंगे.

चांदपुर गांव श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

11 जुलाई (सोमवार) की शाम को चांदपुर गांव के ही रहने वाले 28 साल के मनोज का अंतिम संस्कार लोगों को कुछ इस तरीके से करना पड़ा. दरअसल मनोज की सड़क हादसे के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए मनोज के शव को श्मशान घाट से गया और वहां बारिश शुरू हो गई, जिसके बाद चिता की जगह पर टीन सेट नहीं होने की वजह से चलताऊ तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा.

इन तस्वीरों को देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इन लोगों की मजबूरी कितनी ज्यादा रही होगी कि अंतिम संस्कार करने के लिए इन्हें लकड़ियों की सहायता से तिरपाल लगानी पड़ गयी. इसके बाद से ही गांव वालों में दिल्ली सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष है. गांव वालों का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधि और अधिकारी सभी विकास कार्यों के दावे करते हैं बड़ी-बड़ी हवाई बातें करते हैं. लेकिन जब श्मशान घाट जैसी जगह पर ही मूलभूत सुविधाएं ना मिल पाए तो इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या हो सकता है.

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के बवाना विधानसभा का चांदपुर गांव में बने श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते लोग परेशान हैं. लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसी ही एक घटना हाल ही में सामने आया है. यहां श्मशान घाट में गांव वालों ने लकड़ियों के सहारे एक प्लास्टिक को तिरपाल बनाकर उसी के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा. यही नहीं बारिश के चलते लकड़ियों ने भीकने के चलते पेट्रोल और ज्वालनशील पदार्थ डाल कर चिता को जलाना पड़ा.

अंतिम संस्कार की ये तस्वीरें शर्मिंदा करने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं. श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव दिखाई दे रहा है जिस जगह पर अंतिम संस्कार होता है. वहां शेड तक की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसकी वजह से बारिश के दौरान लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. शायद कभी किसी ने यह सोचा भी नहीं होगा कि दिल्ली देहात और ग्रामीण इलाकों में भी अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इस तरीके के चलताऊ बंदोबस्त करने पड़ेंगे.

चांदपुर गांव श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

11 जुलाई (सोमवार) की शाम को चांदपुर गांव के ही रहने वाले 28 साल के मनोज का अंतिम संस्कार लोगों को कुछ इस तरीके से करना पड़ा. दरअसल मनोज की सड़क हादसे के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए मनोज के शव को श्मशान घाट से गया और वहां बारिश शुरू हो गई, जिसके बाद चिता की जगह पर टीन सेट नहीं होने की वजह से चलताऊ तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा.

इन तस्वीरों को देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इन लोगों की मजबूरी कितनी ज्यादा रही होगी कि अंतिम संस्कार करने के लिए इन्हें लकड़ियों की सहायता से तिरपाल लगानी पड़ गयी. इसके बाद से ही गांव वालों में दिल्ली सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष है. गांव वालों का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधि और अधिकारी सभी विकास कार्यों के दावे करते हैं बड़ी-बड़ी हवाई बातें करते हैं. लेकिन जब श्मशान घाट जैसी जगह पर ही मूलभूत सुविधाएं ना मिल पाए तो इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या हो सकता है.

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