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कैंसर से है पीड़ित, फिर भी दे रही मुफ्त सेवा! मिलिए दिल्ली की पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर से - कैंसर पीड़ित महिला कोरोना मरीजों की सेवा

दिल्ली के प्रताप नगर में रहने वाली पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर ट्विंकल कालिया कैंसर से पीड़ित हैं, इसके बावजूद वे कोरोना मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई हैं. ट्विंकल कालिया और उनके पति मौजूदा समय में ऐसी 12 एम्बुलेंस फ्री में चला रहे हैं, जो कोरोना संक्रमित मरीजों और उनके परिवारों को एंबुलेंस की मुफ्त सेवा दे रही हैं.

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कैंसर पीड़ित होने के बाद भी कोरोना मरीजों की सेवा
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Published : May 11, 2021, 10:59 PM IST

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के इस दौर में जहां कुछ लोग लोगों को लूटने में लगे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे हैं, जो परेशानियों के बाद भी लोगों की मदद कर रहे हैं. इन्हीं में शामिल है दिल्ली की पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर ट्विंकल कालिया. जो खुद कैंसर जैसी बड़ी बीमारी से जूझ रही हैं इसके बावजूद दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों और उनके परिवारों को एंबुलेंस की मुफ्त सेवा दे रही हैं.

कैंसर पीड़ित होने के बाद भी कोरोना मरीजों की सेवा
कैंसर के बाद भी लोगों की मदद

प्रताप नगर इलाके में रहने वाली ट्विंकल कालिया और उनके पति मौजूदा समय में ऐसी 12 एम्बुलेंस सेवा चला रहे हैं, जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों की मदद करती हैं. एक महिला होने के नाते पहले ही एम्बुलेंस चलाना और लोगों को सेवा देना बहुत आसान नहीं है लेकिन ट्विंकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बाद भी लोगों की मदद में जुटी हुई हैं. ट्विंकल एक बीमा कंपनी से जुड़ी हैं और उसी से अपना गुजारा करती हैं. इन्हें राष्ट्रपति से सम्मान भी मिल चुका है.

'बोनस की ज़िन्दगी है, दूसरों की मदद में काटना चाहती हूं'
जब ट्विंकल से पूछा गया कि कैंसर से जूझने के बाद भी इस काम की प्रेरणा कहां से मिलती है, तो उन्होंने कहा कि प्रभु ही उन्हें कैंसर से लड़ने की शक्ति देते हैं और प्रभु ही उन्हें लोगों की मदद करने की ताकत देते हैं. वह कहती हैं कि यह जो जिंदगी है यह बोनस की जिंदगी है और इसे वह दूसरों की मदद में ही काटना चाहती हैं. ट्विंकल की चाहत ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करने की है.

इसे भी पढ़ें- कोरोना काल में NSUI की सराहनीय पहल, कोरोना मरीजों के लिए चला रही मुफ्त एम्बुलेंस सेवा

रोज़ोना 200 से ज़्यादा कॉल
ट्विंकल बताती हैं कि उन्हें रोज़ाना 200 तक कॉल आ रही हैं. चूंकि सेवा निशुल्क है और दूसरी एम्बुलेंस मिलने में भी दिक्कत आ रही है, लोग ट्विंकल कालिया की सेवा को प्राथमिकता दे रही हैं. वो कहती हैं कि रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा कॉल अटेंड करना पसंद करती हैं. उनका फ़ोन नंबर थानों में भी है, जहां से ये कॉल आती हैं.

'सेवा कर सुकून की नींद आती है'
ट्विंकल कहती हैं कि उन्हें सेवा कर सुकून की नींद आती है. फिर चाहे वो 3 या 4 घंटे की ही क्यों न हो. वो कहती हैं कि दिन में एक नेक काम ज़रूर करना चाहिए. बस यही ख्याल उनके दिमाग में हर वक्त रहता है. वो कहती हैं कि उनसे जब तक हो पाएगा तब तक अपना ये काम जारी रखेंगी.


सरकार को सबक
कम संसाधनों के बावजूद, ट्विंकल कालिया और उनके पति यहां मदद करने में जुटे हैं. यह मदद उन सरकारों के लिए भी एक सबक है, जो पूरा सिस्टम हाथ में होने के बावजूद लोगों के काम नहीं आ पा रही है.

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के इस दौर में जहां कुछ लोग लोगों को लूटने में लगे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे हैं, जो परेशानियों के बाद भी लोगों की मदद कर रहे हैं. इन्हीं में शामिल है दिल्ली की पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर ट्विंकल कालिया. जो खुद कैंसर जैसी बड़ी बीमारी से जूझ रही हैं इसके बावजूद दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों और उनके परिवारों को एंबुलेंस की मुफ्त सेवा दे रही हैं.

कैंसर पीड़ित होने के बाद भी कोरोना मरीजों की सेवा
कैंसर के बाद भी लोगों की मदद

प्रताप नगर इलाके में रहने वाली ट्विंकल कालिया और उनके पति मौजूदा समय में ऐसी 12 एम्बुलेंस सेवा चला रहे हैं, जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों की मदद करती हैं. एक महिला होने के नाते पहले ही एम्बुलेंस चलाना और लोगों को सेवा देना बहुत आसान नहीं है लेकिन ट्विंकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बाद भी लोगों की मदद में जुटी हुई हैं. ट्विंकल एक बीमा कंपनी से जुड़ी हैं और उसी से अपना गुजारा करती हैं. इन्हें राष्ट्रपति से सम्मान भी मिल चुका है.

'बोनस की ज़िन्दगी है, दूसरों की मदद में काटना चाहती हूं'
जब ट्विंकल से पूछा गया कि कैंसर से जूझने के बाद भी इस काम की प्रेरणा कहां से मिलती है, तो उन्होंने कहा कि प्रभु ही उन्हें कैंसर से लड़ने की शक्ति देते हैं और प्रभु ही उन्हें लोगों की मदद करने की ताकत देते हैं. वह कहती हैं कि यह जो जिंदगी है यह बोनस की जिंदगी है और इसे वह दूसरों की मदद में ही काटना चाहती हैं. ट्विंकल की चाहत ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करने की है.

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रोज़ोना 200 से ज़्यादा कॉल
ट्विंकल बताती हैं कि उन्हें रोज़ाना 200 तक कॉल आ रही हैं. चूंकि सेवा निशुल्क है और दूसरी एम्बुलेंस मिलने में भी दिक्कत आ रही है, लोग ट्विंकल कालिया की सेवा को प्राथमिकता दे रही हैं. वो कहती हैं कि रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा कॉल अटेंड करना पसंद करती हैं. उनका फ़ोन नंबर थानों में भी है, जहां से ये कॉल आती हैं.

'सेवा कर सुकून की नींद आती है'
ट्विंकल कहती हैं कि उन्हें सेवा कर सुकून की नींद आती है. फिर चाहे वो 3 या 4 घंटे की ही क्यों न हो. वो कहती हैं कि दिन में एक नेक काम ज़रूर करना चाहिए. बस यही ख्याल उनके दिमाग में हर वक्त रहता है. वो कहती हैं कि उनसे जब तक हो पाएगा तब तक अपना ये काम जारी रखेंगी.


सरकार को सबक
कम संसाधनों के बावजूद, ट्विंकल कालिया और उनके पति यहां मदद करने में जुटे हैं. यह मदद उन सरकारों के लिए भी एक सबक है, जो पूरा सिस्टम हाथ में होने के बावजूद लोगों के काम नहीं आ पा रही है.

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