नई दिल्ली : भारत के प्रमुख क्रिप्टो करेंसी दिग्गजों ने बुधवार को आईएएमएआई (इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत सरकार से अपील की कि वे क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध न लगाएं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र को विनियमित करने के लिए एक मजबूत तंत्र की जरूरत है.
आईएएमएआई ने कहा कि भारत के क्रिप्टो करेंसी इकोसिस्टम के सुशासन और नियमन से सरकार के डिजिटल इंडिया विजन को गति मिलेगी.
भारत भी डिजिटल संपत्ति में काफी वृद्धि देख रहा है.
आईएएमएआई ने कहा, 'क्रिप्टो समुदाय में एक करोड़ से अधिक क्रिप्टो धारक हैं, जिनकी एक अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टो संपत्ति है, 300 से अधिक स्टार्टअप हजारों नौकरियां पैदा करने के साथ ही करोड़ों डॉलर के राजस्व और करों का उत्पादन करते हैं. इसमें रोजाना 35 करोड़ से 50 करोड़ डॉलर की ट्रेडिंग होती है.'
बयान में कहा गया, प्रतिबंध के प्रस्तावित कदम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और एक करोड़ भारतीय क्रिप्टो ग्राहकों को नुकसान होगा.
अपने तर्क पेश करते हुए आईएएमएआई ने कहा कि यही वजह है कि हम भारत में क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध लगाने का विरोध करते हैं.
दरअसल, सरकार का मानना है कि देश में क्रिप्टो करेंसी के लिए पर्याप्त कानून नहीं है. ऐसे में सरकार क्रिप्टो करेंसी पर कुछ और कानून बनाने पर विचार कर रही है.
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सरकार ने संसद के वर्तमान सत्र में इसके लिए एक विधेयक लाने की योजना बनाई है. बता दें कि द क्रिप्टो करेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 का मकसद आरबीआई द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक डिजिटल करेंसी के लिए कानूनी रुपरेखा बनाना है.
इस बिल में क्रिप्टो करेंसी को प्रतिबंधित करने का भी प्रावधान होगा. हालांकि इसमें कुछ अपवादों के साथ क्रिप्टो करेंसी की टेक्नोलॉजी और इसके उपयोग को मंजूरी दिए जाने का प्रावधान है.
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था कि सरकार भारत में क्रिप्टो करेंसी को विनियमित करने के तरीके पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ बातचीत और चर्चा कर रही है.