चंडीगढ़ : कृषि कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन की वजह से पिछले 135 दिनों से दिल्ली के कुंडली बॉर्डर पर जीटी रोड जाम होने से सोनीपत की इंडस्ट्री के अलावा दुकानदारों व लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वही दिल्ली आने वाले सोनीपत के लोगों को 10 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है. ईंधन ज्यादा लगने से उनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है.
इस मामले में चंडीगढ़ प्रेस क्लब में सोनीपत के पेट्रोल पम्प मालिकों, आरडब्ल्यूए, फैक्ट्री मालिकों व राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के अध्यक्ष हेमन्त नान्देल, सचिव विकास व लीगल एडवाइजर डॉ. तारा चंद ने संवाददाता सम्मेलन में अपनी समस्याओं के बारे में जानकारी दी.
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गौर हो कि कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर आम जनजीवन पर पड़ने लगा है. कुंडली बॉर्डर पर स्थायी जाम की वजह से दिल्ली आने वाले सोनीपत के लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. अनुमान के मुताबिक इस आंदोलन की वजह से रोजाना सोनीपत के लोगों का पांच लाख रुपये से अधिक का ईंधन बर्बाद हो रहा है. अब तक सोनीपत के लोग करीब साढ़े सात करोड़ रुपये का अतिरिक्त ईंधन फूंक चुके हैं. इस बारे में राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के सचिव विकास ने कहा कि हालात बदतर होने से उनका कामकाज ठप हो गया है. नौबत यहां तक आ चुकी है कि कोई भी व्यापारी कभी भी आत्महत्या कर सकता है.
रोजाना डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान : हेमंत
एक अनुमान के मुताबिक सोनीपत से रोजाना 50 से 60 हजार लोग दिल्ली आवागमन करते हैं. लॉकडाउन से पहले ट्रेनों से जाने वाले 30 से 35 हजार दैनिक यात्रियों के मासिक पास बनते थे. इसके अलावा बस, कैब व अन्य वाहनों से यात्रा करते हैं. इसके अलावा सोनीपत से प्रतिदिन कम से कम 10 हजार गाड़ियां दिल्ली जाती हैं. लेकिन कुंडली बॉर्डर बंद होने से वाहनों के नाहरा-नाहरी या खरखौदा होकर दिल्ली आना पड़ रहा है. इस वजह से दिल्ली जाने वाले 5000 स्टूडेंट्स के बजाय अब 400-500 ही बचे हैं. राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के अध्यक्ष हेमंत ने कहा कि रोजाना डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान होने से पूरी इंडस्ट्री और छोटे बड़े उद्योगों सहित तमाम दुकानदारों और रेहड़ी चालकों को भारी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि सरकार बॉर्डर के रास्ते को व्यापार के लिए खोले.
ईंधन की खपत दोगुना हुई
यात्रा की दूरी बढ़ने के कारण ईंधन का खर्चा बढ़ गया है. पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों में करीब 200 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त खर्च रोजाना हो रहा है, जबकि सीएनजी की गाड़ियों में भी 100 से 150 रुपये का अतिरक्त खर्च हो रहा है. वहीं बड़ी गाड़ियों के राई, कुंडली, बड़ी आदि औद्योगिक क्षेत्र में आने-जाने से खर्च में इजाफा हो गया है. इन गाड़ियों को केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) एक्सप्रेस-वे के रास्ते बागपत होकर दिल्ली आना पड़ता है, जिसके कारण 40 से 50 किलोमीटर का रास्ता करीब 100 किलोमीटर का हो गया है. इससे ईंधन की भी दोगुना खपत हो रही है.
क्या है लोगों की मांगें
- जीटी रोड की एक साइड अति शीघ्र खोलें
- पेट्रोल पम्प मालिकों को वित्तीय सहायता दी जाए
- सोनीपत में स्थित पीड़ित फैक्ट्री मालिकों को किसान आंदोलन के दिनों की टैक्स में छूट
- उद्योगों में कच्चा माल पहुंच पाए इसका पुख्ता प्रबंध हो
- मजदूरों का पलायन रोकने के प्रयास
- मरीजों को अस्पताल समय से पहुंचाने के लिए इंतजाम
अब तक के प्रयास
- खाप पंचायतों से समर्थन का आग्रह
- सोनीपत के डीसी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
- किसानों व सरकार के प्रतिनिधियों से गुजारिश