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इस अस्पताल में हनुमान चालीसा और रामायण से दिल के मरीजों का इलाज - कानपुर कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल डॉक्टर नीरज

कानपुर के हृदय रोग अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीजों के इलाज की एक अलग ही विधि विकसित की है. यहां मरीजों को भर्ती होने के साथ ही रामायण, हनुमान चालीसा जैसी धार्मिक किताबें पढ़ने को दी जाती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इससे इलाज में मदद मिलती है.

कानपुर के हृदय रोग अस्पताल ने मरीजों के इलाज का अनोखा तरीका निकाला है.
कानपुर के हृदय रोग अस्पताल ने मरीजों के इलाज का अनोखा तरीका निकाला है.
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : Dec 9, 2023, 5:19 PM IST

Updated : Dec 9, 2023, 6:40 PM IST

कानपुर के हृदय रोग अस्पताल ने मरीजों के इलाज का अनोखा तरीका निकाला है.

कानपुर: हृदय से संबंधित बीमारियों में तनाव हमेशा से बेहद घातक माना गया है. तनाव दूर करने के लिए डॉक्टर अक्सर दवाओं और थेरेपी का सहारा लेते हैं, लेकिन कानपुर के सरकारी कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल ने दिल के मरीजों को राहत देने के लिए एक अनोखा तरीका खोज निकाला है. वह है, इलाज में धार्मिक ग्रंथों का इस्तेमाल. यहां के डॉक्टरों का दावा है कि मरीजों को जब धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया तो उसके अच्छे नतीजे निकलकर सामने आए. यहां डॉक्टर मरीजों के इलाज में दवा के साथ धर्म और अध्यात्म का भी सहारा लेते हैं.

तनाव बढ़ा देता है मरीजों की समस्या

अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरज ने कहते हैं कि जब हृदय रोग से संबंधित मरीज आता है तो उसके मन में काफी चिंता होती है. जिस वजह से उसका बीपी और हार्टबीट काफी बढ़ जाती है. मरीज तनाव से ग्रसित हो जाता है. इसका असर दिल पर पड़ता है और उसकी समस्या काफी बढ़ जाती है. बताते हैं कि जब पहले मरीज आते थे तो हम उनकी साइकोलॉजी थेरेपी करने के साथ म्यूजिक सुनने के लिए कहते थे. हालांकि, ऐसा करने से परिणाम कुछ खास नही आ रहे थे।

मरीजों को दी जाती है हनुमाम चालीसा, रामायण

डॉक्टर नीरज बताते हैं कि एक दिन अचानक उनके मन में ख्याल आया कि लोगों की धर्म और अध्यात्म में काफी आस्था होती है. क्यों न मरीजों को इससे जुड़ी किताबें दी जाएं. जिसके बाद मरीजों को हमने गीता, हनुमान चालीसा, रामायण पढ़ने के लिए देनी शुरू की. डॉ. नीरज ने बताया कि, जब मरीज भर्ती होता है. इसके बाद मरीजों को करीब साल भर पहले धार्मिक किताबें देनी शुरू की गईं. इसका अच्छा परिणाम सामने आया. ऐसा करने से मरीज का ध्यान धर्म और आध्यत्म से जुड़ी बातों की ओर केंद्रित हो जाता है. जिस वजह से उसका तनाव दूर हो जाता है और उसके इलाज में काफी मदद मिलती है.

2022 से शुरू मुहिम के नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले

डॉ. नीरज ने बताया कि उन्होंने इस मुहिम को करीब एक साल पहले वर्ष 2022 में शुरू किया था. तब से अब तक वह करीब 500 मरीजों को धार्मिक किताबें बांट चुके हैं. उनका कहना है कि हॉस्पिटल में धर्म और आध्यात्म की किताबें पढ़ने से मरीजों को इस बात का एहसास नहीं होता है कि वह हॉस्पिटल में हैं. जिस वजह से इलाज में भी काफी हद तक मदद मिलती है. मरीजों के इलाज में धार्मिक किताबों का सहारा लेने के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं.

यह भी पढ़ें : वर्कप्लेस में फ्लेग्जिबिलिटी बढ़ने से हृदय रोग का खतरा हो सकता है कम, शोध में खुलासा

ह भी पढ़ें : Diabetes Risk : डायबिटीज से पीड़ित रोगियों को हृदय रोग से मृत्यु का खतरा दोगुना होता है!

कानपुर के हृदय रोग अस्पताल ने मरीजों के इलाज का अनोखा तरीका निकाला है.

कानपुर: हृदय से संबंधित बीमारियों में तनाव हमेशा से बेहद घातक माना गया है. तनाव दूर करने के लिए डॉक्टर अक्सर दवाओं और थेरेपी का सहारा लेते हैं, लेकिन कानपुर के सरकारी कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल ने दिल के मरीजों को राहत देने के लिए एक अनोखा तरीका खोज निकाला है. वह है, इलाज में धार्मिक ग्रंथों का इस्तेमाल. यहां के डॉक्टरों का दावा है कि मरीजों को जब धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया तो उसके अच्छे नतीजे निकलकर सामने आए. यहां डॉक्टर मरीजों के इलाज में दवा के साथ धर्म और अध्यात्म का भी सहारा लेते हैं.

तनाव बढ़ा देता है मरीजों की समस्या

अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरज ने कहते हैं कि जब हृदय रोग से संबंधित मरीज आता है तो उसके मन में काफी चिंता होती है. जिस वजह से उसका बीपी और हार्टबीट काफी बढ़ जाती है. मरीज तनाव से ग्रसित हो जाता है. इसका असर दिल पर पड़ता है और उसकी समस्या काफी बढ़ जाती है. बताते हैं कि जब पहले मरीज आते थे तो हम उनकी साइकोलॉजी थेरेपी करने के साथ म्यूजिक सुनने के लिए कहते थे. हालांकि, ऐसा करने से परिणाम कुछ खास नही आ रहे थे।

मरीजों को दी जाती है हनुमाम चालीसा, रामायण

डॉक्टर नीरज बताते हैं कि एक दिन अचानक उनके मन में ख्याल आया कि लोगों की धर्म और अध्यात्म में काफी आस्था होती है. क्यों न मरीजों को इससे जुड़ी किताबें दी जाएं. जिसके बाद मरीजों को हमने गीता, हनुमान चालीसा, रामायण पढ़ने के लिए देनी शुरू की. डॉ. नीरज ने बताया कि, जब मरीज भर्ती होता है. इसके बाद मरीजों को करीब साल भर पहले धार्मिक किताबें देनी शुरू की गईं. इसका अच्छा परिणाम सामने आया. ऐसा करने से मरीज का ध्यान धर्म और आध्यत्म से जुड़ी बातों की ओर केंद्रित हो जाता है. जिस वजह से उसका तनाव दूर हो जाता है और उसके इलाज में काफी मदद मिलती है.

2022 से शुरू मुहिम के नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले

डॉ. नीरज ने बताया कि उन्होंने इस मुहिम को करीब एक साल पहले वर्ष 2022 में शुरू किया था. तब से अब तक वह करीब 500 मरीजों को धार्मिक किताबें बांट चुके हैं. उनका कहना है कि हॉस्पिटल में धर्म और आध्यात्म की किताबें पढ़ने से मरीजों को इस बात का एहसास नहीं होता है कि वह हॉस्पिटल में हैं. जिस वजह से इलाज में भी काफी हद तक मदद मिलती है. मरीजों के इलाज में धार्मिक किताबों का सहारा लेने के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं.

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Last Updated : Dec 9, 2023, 6:40 PM IST
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