चूरू: सेवानिवृत्त सहायक वनपाल की मौत मामले में सर्वसमाज के लोग बुधवार को लामबद्ध हो गए और धरने पर बैठ गए. उन्होंने जिला अस्पताल परिसर में वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, मृतक के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. इस दौरान तीन दौर में हुई वार्ता के पश्चात मांगों पर सहमति बनने पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया.
मामले के अनुसार शहर के वार्ड 40 निवासी 60 वर्षीय सुशील कुमार पंवार वन विभाग में सहायक वनपाल के पद से गत 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे. सोमवार की रात बिना बताए घर से निकल गए, जो मंगलवार की शाम समाज कल्याण विभाग के छात्रावास के पास अचेत हालत में मिले. सुशील कुमार को परिजन जिला अस्पताल लेकर आए, जहां पर उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई. बुधवार सुबह सर्व समाज के लोग लामबद्ध हो गए तथा जिला अस्पताल में धरना देकर आक्रोश जताया.
धरने की सूचना पर विधायक पूसाराम गोदारा, एसडीएम रामकुमार वर्मा, तहसीलदार सज्जनकुमार लाटा, सीआई दिलीपसिंह सहित वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा आक्रोशित लोगों से वार्ता की. लेकिन दो दौर की हुई वार्ता में सहमति नहीं बनी तथा प्रदर्शन जारी रहा.
तीसरे दौर की वार्ता में मुख्यमंत्री सहायता कोष से मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलवाने, मृतक के एक परिजन को संविदा पर नगरपालिका में नौकरी, 31 मार्च तक पेंशन से संबंधित प्रकरणों का निस्तारण कर राशि दिलवाने एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच करवाने का आश्वासन दिया गया, तब जाकर धरना समाप्त हुआ. धरने पर बैठे हुए लोगों ने आरोप लगाया कि सुशील कुमार को सेवानिवृत्त के बाद मिलने वाले परिलाभों से अधिकारियों द्वारा वंचित रखा जा रहा था. उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
DFO ने कहा नहीं कोई बकाया: चूरू डीएफओ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सुशील कुमार 31 जनवरी को रिटायर हुए थे. उनके यहां कोई बकाया नहीं है. इनका पुराना मामला बीकानेर से पेंडिंग चल रहा है. वहां से आते ही मैं 7 दिन में अपना काम पूरा कर दूंगा. मेरे यहां ज्वाइन करने के बाद किसी भी रिटायर्ड कर्मचारियों का कोई भी काम बाकी नहीं रहा है.