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दिल्ली कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट को लेकर AAP और बीजेपी पर उठाए सवाल - CONGRESS ON NEW LIQUOR POLICE

दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को सीएजी रिपोर्ट पेश की गई. नई एक्साइज पॉलिसी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है.

दिल्ली कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट को लेकर AAP और बीजेपी पर उठाए सवाल
दिल्ली कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट को लेकर AAP और बीजेपी पर उठाए सवाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : Feb 26, 2025, 6:50 PM IST

नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कैग रिपोर्ट को लेकर बीजेपी और AAP पर निशाना साधा है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा है कि BJP के कुछ बड़े नेता और तत्कालीन उप-राज्यपाल की भूमिका से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं, जो इस CAG रिपोर्ट में नजर अंदाज कर दिए गए. 1 साल के अंदर तीन आबकारी निदेशकों को बदलने का निर्णय क्यों और किसने लिया? दिल्ली में शराब के नए ब्रांड्स को बढ़ावा देना का काम किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए.

केजरीवाल सरकार की शराब नीति को लागू करने की अनुमति तत्कालीन राज्यपाल ने दी थी, आज तक इसपर कोई जांच क्यों नहीं हुई? मास्टर प्लान का उल्लंघन कर, शराब के ठेके खोलने के लाइसेंस कैसे दिए गए, इसकी जांच करने की जरूरत है. कॉर्पोरेशन की अनुमति के बिना, शराब के ठेके नहीं खोले जा सकते और उस समय कॉर्पोरेशन में BJP थी. लेकिन BJP ने दिल्ली सरकार को नॉन-कंफर्मिंग एरिया में भी शराब के ठेके खोलने की इजाजत दे दी.

कांग्रेस का AAP और भाजपा पर आरोप: देवेंद्र यादव ने कहा है कि पहले 377 के करीब रिटेल थे, जिसमें सिर्फ 262 प्राइवेट किए जाते थे, बाकी सरकारी कंपनियां बेचा करती थीं. लेकिन बाद में 850 के करीब रिटेल हो गए और सिर्फ 22 प्राइवेट प्लेयर बचे. मुख्य बात ये भी है कि इसमें कुछ ब्रांड को भी प्रमोट किया गया. दिल्ली में कुछ ऐसे ब्रांड को प्रमोट किया जा रहा था, जिसे NCR में पसंद नहीं किया गया. इसके अलावा, दिल्ली में कई ब्रांड्स को दबाया भी गया. इतना ही नहीं.. इसमें करप्ट प्रैक्टिस की बात भी कही गई. यानी सरकार की तरफ से Market Competition गलत तरीके से डील किया गया. दिल्ली में उन टॉप ब्रांड्स को प्रमोट किया गया, जिनके प्लांट्स पंजाब में थे और सभी को पता है कि पंजाब में AAP की सरकार थी.

शराब घोटाले में भाजपा भी जिम्मेदार-कांग्रेस: संदीप दीक्षित ने कहा है कि AAP सरकार कहती है कि वे प्रति बोतल पर Excise नहीं लगाएगी, जिस तरह कुछ साल पहले Excise लिए जाते थे, वे उसी पर हर साल 5%-10% बढ़ाकर, एक मूल अमाउंट ले लेंगे. फिर वे कितनी बोतलें बेचते हैं, इससे हमें मतलब नहीं है. दिल्ली में 30%-40% अवैध शराब बिकती हैं. मान लीजिए- अगर दिल्ली में 10 हजार बोतलें शराब की बिकती थीं, तो यहां 13-14 हजार बोतलें बिक रही हैं. इसलिए 3-4 हजार बोतलों का Excise सरकार के पास नहीं आता है. अगर ऐसा था तो सरकार ने 10 हजार बोतलों को ही स्टैंडर्ड क्यों माना? साफ है- सरकार ने 30%-40% की चोरी को एक लीगल सैंक्शन दे दिया है. ये बात भी CAG रिपोर्ट में कवर नहीं की गई है.

संदीप दीक्षित ने कहा है कि CAG रिपोर्ट में कहा गया कि शराब नीति जिस मंशा के साथ बनी, उसे बार-बार बदला गया. इसमें जहां पहले 77 की भागीदारी थी, वह बाद में घटकर 14 हो गई. यह 14 ऐसी संस्थाएं हैं, जो आपस में संबंध रखती हैं. कुछ इस देश के ऐसे हिस्सों से आती हैं, जहां के राजनेता और उनके परिवार के लोग AAP सरकार के साथ संबंध बनाकर चलते हैं. इस शराब नीति की बारीकियां नीति बनने के 8-9 महीने पहले से ही चर्चा में आ गई थी. कई अधिकारी कह रहे थे कि ये बात चर्चा में इसलिए आई, क्योंकि ये नीति ही सरकार और शराब के ठेकेदारों के बीच में बने संबंधों और अपने हितों के चलते बनी थीं. इस मामले में अलग से जांच होनी चाहिए.

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नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कैग रिपोर्ट को लेकर बीजेपी और AAP पर निशाना साधा है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा है कि BJP के कुछ बड़े नेता और तत्कालीन उप-राज्यपाल की भूमिका से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं, जो इस CAG रिपोर्ट में नजर अंदाज कर दिए गए. 1 साल के अंदर तीन आबकारी निदेशकों को बदलने का निर्णय क्यों और किसने लिया? दिल्ली में शराब के नए ब्रांड्स को बढ़ावा देना का काम किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए.

केजरीवाल सरकार की शराब नीति को लागू करने की अनुमति तत्कालीन राज्यपाल ने दी थी, आज तक इसपर कोई जांच क्यों नहीं हुई? मास्टर प्लान का उल्लंघन कर, शराब के ठेके खोलने के लाइसेंस कैसे दिए गए, इसकी जांच करने की जरूरत है. कॉर्पोरेशन की अनुमति के बिना, शराब के ठेके नहीं खोले जा सकते और उस समय कॉर्पोरेशन में BJP थी. लेकिन BJP ने दिल्ली सरकार को नॉन-कंफर्मिंग एरिया में भी शराब के ठेके खोलने की इजाजत दे दी.

कांग्रेस का AAP और भाजपा पर आरोप: देवेंद्र यादव ने कहा है कि पहले 377 के करीब रिटेल थे, जिसमें सिर्फ 262 प्राइवेट किए जाते थे, बाकी सरकारी कंपनियां बेचा करती थीं. लेकिन बाद में 850 के करीब रिटेल हो गए और सिर्फ 22 प्राइवेट प्लेयर बचे. मुख्य बात ये भी है कि इसमें कुछ ब्रांड को भी प्रमोट किया गया. दिल्ली में कुछ ऐसे ब्रांड को प्रमोट किया जा रहा था, जिसे NCR में पसंद नहीं किया गया. इसके अलावा, दिल्ली में कई ब्रांड्स को दबाया भी गया. इतना ही नहीं.. इसमें करप्ट प्रैक्टिस की बात भी कही गई. यानी सरकार की तरफ से Market Competition गलत तरीके से डील किया गया. दिल्ली में उन टॉप ब्रांड्स को प्रमोट किया गया, जिनके प्लांट्स पंजाब में थे और सभी को पता है कि पंजाब में AAP की सरकार थी.

शराब घोटाले में भाजपा भी जिम्मेदार-कांग्रेस: संदीप दीक्षित ने कहा है कि AAP सरकार कहती है कि वे प्रति बोतल पर Excise नहीं लगाएगी, जिस तरह कुछ साल पहले Excise लिए जाते थे, वे उसी पर हर साल 5%-10% बढ़ाकर, एक मूल अमाउंट ले लेंगे. फिर वे कितनी बोतलें बेचते हैं, इससे हमें मतलब नहीं है. दिल्ली में 30%-40% अवैध शराब बिकती हैं. मान लीजिए- अगर दिल्ली में 10 हजार बोतलें शराब की बिकती थीं, तो यहां 13-14 हजार बोतलें बिक रही हैं. इसलिए 3-4 हजार बोतलों का Excise सरकार के पास नहीं आता है. अगर ऐसा था तो सरकार ने 10 हजार बोतलों को ही स्टैंडर्ड क्यों माना? साफ है- सरकार ने 30%-40% की चोरी को एक लीगल सैंक्शन दे दिया है. ये बात भी CAG रिपोर्ट में कवर नहीं की गई है.

संदीप दीक्षित ने कहा है कि CAG रिपोर्ट में कहा गया कि शराब नीति जिस मंशा के साथ बनी, उसे बार-बार बदला गया. इसमें जहां पहले 77 की भागीदारी थी, वह बाद में घटकर 14 हो गई. यह 14 ऐसी संस्थाएं हैं, जो आपस में संबंध रखती हैं. कुछ इस देश के ऐसे हिस्सों से आती हैं, जहां के राजनेता और उनके परिवार के लोग AAP सरकार के साथ संबंध बनाकर चलते हैं. इस शराब नीति की बारीकियां नीति बनने के 8-9 महीने पहले से ही चर्चा में आ गई थी. कई अधिकारी कह रहे थे कि ये बात चर्चा में इसलिए आई, क्योंकि ये नीति ही सरकार और शराब के ठेकेदारों के बीच में बने संबंधों और अपने हितों के चलते बनी थीं. इस मामले में अलग से जांच होनी चाहिए.

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