लखनऊ : राजधानी के अहिमामऊ दुबग्गा, अवध चौराहा, सीतापुर रोड, पॉलिटेक्निक चौराहा, मुंशी पुलिया चौराहा ऐसे कई प्रमुख चौराहे हैं, जहां पर हर रोज बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में आते हैं. इनमें प्रमुख रूप से घर बनाने वाले मिस्त्री, लेबर शामिल होते हैं. ये सभी इसी आशा से रोज आते हैं कि आज उन्हें काम मिलेगा पर इस आंशिक लॉकडाउन के दौर में इन दिहाड़ी मजदूरों को प्रतिदिन निराश होकर अपने घर लौट जाना पड़ता है. रोजी-रोटी की तलाश में आए इन मजदूरों को रोटी तो नहीं मिलती पर पुलिस के डंडे जरूर मिलते हैं. ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए मजदूरों का दर्द छलक पड़ा.
मजदूरों का छलका दर्द
काम की तलाश में आए मजदूर कन्हैयालाल कहते हैं, 'हम लोग मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाते हैं. पिछले 20 दिनों से हम लोगों को कोई काम नहीं मिल रहा है. ऐसे में हम लोगों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है. घर में बच्चे भूखे मर रहे हैं पर हमलोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.'
'काम की तलाश में 20 दिनों से आ रहे'
मजदूरी करने वाले राजबहादुर का कहना है कि विगत 20 दिनों से वह काम की तलाश में आते हैं पर काम नहीं मिलता. हां, काम के बदले पुलिस का डंडा यहां जरूर मिलता है. राजबहादुर का कहना है कि घर में ना खाने के लिए कुछ है और ना ही पैसा है. सरकार पर गुस्सा करें या फिर खुद को कोसें. पुलिस भी लगातार डंडा मारकर भगा देती है. घर पर बच्चे खाने के लिए तरस रहे हैं. ऐसे में हम लोगों के सामने बड़ी समस्या है.