लखनऊ:किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर सुधीर वर्मा ने पहली बार कोरोना वायरस के संक्रमित मरीज के केजीएमयू में भर्ती होने पर अपनी ड्यूटी कोरोना वार्ड में निभाई थी. इसके बाद उन्होंने एक्टिव क्वारंटाइन के बाद पैसिव क्वारंटाइन की भूमिका भी निभाई थी. इतने लंबे समय तक घर परिवार से दूर रहकर मरीजों की लगातार सेवा करने के बाद डॉक्टर सुधीर आज भी मेडिसिन वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं. साथ ही कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए कोविड-19 हॉस्पिटल के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की भूमिका भी निभा रहे हैं.
मरीजों में कोरोना को लेकर भय का माहौल
ईटीवी भारत से बातचीत में डॉ. सुधीर ने बताया कि मार्च में जब कोरोना वायरस से संक्रमित पहली मरीज यहां भर्ती हुई थी, तब उन्होंने यहां पर ड्यूटी की थी. उस दौरान मरीजों में भय का माहौल था. उन्हें लगता था कि यदि एक बार कोरोना हो गया तो उनकी मौत निश्चित है. साथ ही डॉक्टरों में भी संक्रमण के फैलने का डर साफ तौर पर देखा जा रहा था. इस दौरान मैंने ड्यूटी करने का फैसला किया था. वह कहते हैं कि मेरी ड्यूटी पर जाने की बात सुनकर घर वालों को काफी चिंता हुई थी, तब उन्हें भी मैंने यही समझाया था कि यदि हम इनका इलाज नहीं करेंगे तो फिर कौन करेगा?
'पीपीई किट पहनने के बाद हम कुछ खा नहीं सकते'
डॉ. सुधीर बताते हैं कि वार्ड में ड्यूटी करने के दौरान लगभग साढे़ 6 घंटे तक पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (PPE) को हमें पहनना पड़ता था. इसके पहनने और उतारने का एक निश्चित प्रोसीजर होता है. इस पीपीई किट को पहनने के बाद हम कुछ खा नहीं सकते थे, किसी से फोन पर बात नहीं कर सकते, एसी में नहीं बैठ सकते थे और साथ ही यह ऐसी किट है, जिससे हवा भी पास नहीं हो सकती थी. इसलिए जब भी किट उतारते थे, तो पूरी तरह से पसीने से भीगे हुए पाए जाते थे.