जयपुर. हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल बढ़ते शहर में वन्य क्षेत्रों में अतिक्रमण न हो इसके लिए राज्य सरकार ने वन्यजीवों और वन्य क्षेत्र के संरक्षण के लिए विभिन्न परियोजनाओं को मूर्त रूप देना शुरू किया है. शहर के आस-पास की वन भूमियों को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने पर 42.02 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. वन भूमि पर 6 परियोजनाएं विकसित होगी. हाल ही में जेडीए की पीडब्ल्यूसी की बैठक में इन परियोजनाओं के लिए 34.44 करोड़ रुपए की स्वीकृत जारी की गई. जबकि 7.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति पहले ही जारी की जा चुकी है.
राजस्थान सरकार की ओर से जयपुर को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए तैयारी की जा रही (Eco tourism being developed in Jaipur city) है. इसको लेकर जयपुर के आसपास की वन भूमि को ईको टूरिज्म के तौर पर विकसित किया जाएगा. जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए मंजूरी दे दी है. इस क्षेत्र के पर्यटन के हिसाब से विकास होने पर पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी. पशु-पक्षियों का संवर्धन और सुरक्षा भी होगी.
जेडीए सचिव उज्ज्वल राठौड़ का बयान पढ़ें:जयपुर : एनजीटी ने नाहरगढ़ किले पर सभी वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाई रोक, अब वन विभाग विकसित करेगा इको टूरिज्म
ईकोटूरिज्म के तहत विकसित होने वाली परियोजनाएं :
- आमागढ़ आरक्षित वन में तेंदुआ संरक्षण कार्य - 10.80 करोड़
- बीड़ गोविन्दपुरा बायोडाईवरसिटी फोरेस्ट - 5 करोड़
- टाईगर सफारी - नाहरगढ़ जैविक उद्यान - 4.54 करोड़
- आद्रभूमि संवर्द्धन मुहाना - 8 करोड़
- जैव विविधता गोनेर परियोजना - 6.10 करोड़
- सिल्वन बायोडाईवरसिंटी फोरेस्ट फेज- III - 7.60 करोड़
शहर का हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल विस्तार हो रहा : इस संबंध में जेडीए सचिव उज्ज्वल राठौड़ ने कहा कि जयपुर शहर का हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल विस्तार हो रहा है. बिल्डिंग्स, मॉल्स बन रहे हैं. इसके साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े विषय पर भी काम किया जा रहा है. राज्य सरकार के वन और पर्यावरण विभाग इन परियोजनाओं पर काम कर रहा है. इस पर कुछ फंडिंग भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से की जा रही है. कुछ फंडिंग जेडीए कर रहा है. अब जल्द लेपर्ड सफारी, टाइगर रिजर्व और पक्षियों के लिए वेटलैंड विकसित किया जा रहा है. इन इको टूरिज्म स्थलों से पर्यटन नगरी में और चार चांद लगेंगे. इससे पहले किशनबाग और आमागढ़ को विकसित किया गया. इसके पीछे एक कारण ये भी है कि ग्रीन बेल्ट एरिया या फिर फॉरेस्ट एरिया में किसी तरह का अतिक्रमण न हो.
इन परियोजनाओं के जरिए वन्य जीवों के लिए प्रजनन योजना, अरावली में पाए जाने वाले लुप्तप्राय वनस्पतियों, जीवों और पूर्व से बेरी के पौधों की रक्षा की जाएगी. तितली प्रजनन, मोर संरक्षण, चीतल प्रजनन क्षेत्रों का विकास किया जाएगा. वेट लैंड एरिया आर्द्रभूमि पक्षियों, प्रवासी और निवासी पक्षियों के लिए बहुत उपयोगी होगा. यही नहीं क्षेत्र अतिक्रमण से प्रभावित न हो, आबादी को स्वच्छ वातावरण मिले और वन्य जीवन, पौधारोपण, मृदा जल संरक्षण का ध्यान रखा जा सकेगा. इसके अलावा झालाना तेंदुआ अभयारण्य में तेंदुआ, जरख, रताल और अन्य प्रजातियों का संरक्षण संभव होगा. वहीं नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर सफारी परियोजना विकसित की जाएगी.