नई दिल्ली:सीएए और एनआरसी को लेकर जामिया के छात्रों की भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है ये रिले हंगर स्ट्राइक पिछले 18 दिनों से लागातार जारी है और छात्रों ने अन्न, जल त्याग दिया है. उनकी मांग है कि ये कानून हर हाल में वापस होना चाहिए.
रिले भूख हड़ताल का 18वां दिन नागरिकता संशोधन बिल को लेकर रिले हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्र अब पहले से भी ज्यादा हौसला मंद नजर आ रहे हैं. जामिया के छात्रों में 18वें दिन अर्शिया, शफ्फान, अमीर हम्जा समेत 2 छात्र और भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
रिले भूख हड़ताल पर बैठे जामिया छात्र
छात्रा अर्शिया ने बताया कि वो रिले भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इसमें हर दिन कोई 5 से 6 स्टुडेंट स्ट्राइक पर बैठेंगे. वहीं स्टुडेंट अर्शिया का कहना है कि ये सरकार इस कानून के जरिए लोगों को धर्म के आधार पर बांटने का काम कर रही है. एक कानून से जहां वो नागरिकता दे रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ कागज ना होने पर बाहर कर डिटेंशन सेंटर में डाल रहे हैं, तो हमारी मांग है कि इस कानून को वापस लिया जाये.
कानून वापस लेने तक संघर्ष जारी रहेगा
वहीं जामिया के ही दूसरे छात्र शफ्फान का कहना है कि जिस तरह पुलिस ने बिना परमिशन कैंपस और लाइब्रेरी में घुसकर छात्रों को मारा है. इस सबसे छात्र अभी तक मैंटली डिस्टर्ब हैं. पुलिस के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. जब तक दोषियों के खिलाफ FIR नहीं हो जाती, तो हम भी भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे. ये कानून वापस नहीं लिया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
आपको बता दें कि इन छात्रों ने बिल्कुल खाना पीना त्याग दिया है और रिले हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्र और छात्राएं तब तक हंगर स्ट्राइक पर बैठेंगे. जब तक सरकार कानून वापस ना लें या उसमें बदलाव न करें. छात्रों का कहना है कि हम मर भी जाएं, संघर्ष नहीं छोड़ेंगे.