आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता : विदेश मंत्री जयशंकर - इजराइल हमास युद्ध
एस. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लेकर क्षेत्र और दुनिया भर के कई नेताओं से बात की है. उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए. EAM Jaishankar, EAM Jaishankar on Israel Hamas conflict, Israel Hamas conflict, EAM Jaishankar at BRICS Summit, Hamas Israel news
विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया.
अहमदाबाद:विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका की तसफ से आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए. बैठक के दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि गाजा में चल रहे इजराइल-हमास संघर्ष की वजह से आम नागरिकों को अपनी जान देनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी कोशिशों का स्वागत करता है.
एस. जयशंकर ने कहा कि अभी ये सुनिश्चित करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता और राहत गाजा की आबादी तक प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से पहुंचे. उन्होंने सभी बंधकों की रिहाई पर भी जोर दिया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर किसी को भी इसके साथ समझौता नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत नागरिकों की किसी भी मौत की कड़ी निंदा करता है.
उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहे इजराइल-हमास संघर्ष से नागरिकों, बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों समेत भारी मानवीय पीड़ा हो रही है. हम तनाव कम करने की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सभी कोशिशों का स्वागत करते हैं. अभी, मानवीय सहायता सुनिश्चित करने की और गाजा की आबादी तक राहत प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से पहुंचाने की जरूरत है. ये भी जरूरी है कि सभी बंधकों को रिहा किया जाए। हमारा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना सभी दायित्व है.
उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि ये संकट आतंकवादियों ने पैदा किया था. जहां तक आतंकवाद का सवाल है, हममें से किसी को भी इसके साथ समझौता नहीं करना चाहिए. बंधक बनाना भी उतना ही अस्वीकार्य है. बाद के घटनाक्रमों ने हमारी चिंताओं को और भी ज्यादा गहरा कर दिया है क्योंकि हम बड़े पैमाने पर नागरिक हत्याओं और मानवीय संकट को देख रहे हैं. हम नागरिकों की किसी भी मौत की कड़ी निंदा करते हैं.
विदेश मंत्री ने कहा कि संयम और तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत के साथ-साथ, भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर भी जोर देता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में क्षेत्र और दुनिया भर के कई नेताओं से बात की है. उन्होंने शांति के लिए स्थितियां बनाने और प्रत्यक्ष और सार्थक शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की जरूरत पर प्रकाश डाला है. हमारा मानना है कि फिलिस्तीनी लोगों की चिंताओं पर गंभीरता से और टिकाऊ तरीके ध्यान दिया जाना चाहिए. ये केवल दो देशों के समाधान के साथ ही हो सकता है.
उन्होंने कहा कि हम इस अधिनियम के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों का लगातार समर्थन करते रहे हैं. पिछले कुछ सालों में भारत ने फिलिस्तीनी लोगों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण और राष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत करने का समर्थन किया है. हमारी विकास साझेदारी इन उद्देश्यों के लिए साफ है. हम द्विपक्षीय और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से मदद करना जारी रखते हैं. फिलिस्तीन को हमारी आर्थिक सहायता, वहां की विकास परियोजनाएं और फिलिस्तीनी प्राधिकरण को वित्तीय मदद उसे दिखाती है.
जयशंकर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत और कल्याण एजेंसी का समर्थक बना हुआ है और सालाना पांच मिलियन डॉलर का योगदान दे रहा है. गाजा में भारत ने भी 16.5 टन दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति सहित 70 टन मानवीय मदद भेजी है. हम इस डिलीवरी को सुविधाजनक बनाने के लिए मिस्र को धन्यवाद देते हैं, हमारी मदद जारी रहेगी.
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय आज एक बहुत ही जटिल स्थिति का सामना कर रहा है. हमें उन सभी चीजों पर ध्यान देना होगा। हमारी कोशिश ये होना चाहिए कि हम तत्काल जमीनी स्तर पर बदलाव लाएं और साथ ही स्थायी समाधान के लिए स्थितियां भी बनाएं। विचारों का ये आदान-प्रदान उस संबंध में मददगार हो सकता है और मैं इस कठिन समय में हम सभी को इकट्ठा करने के लिए एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका को धन्यवाद देता हूं.