नई दिल्ली : रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने दुर्लभ बूटी विषनाग से सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) को खत्म करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है. करीब दस हजार फुट की ऊंचाई पर पाई जाने वाली विषनाग और अन्य बूटियों के मिश्रण से तैयार डीआरडीओ की दवा ल्यूकोस्किन के अब सफल परिणाम सामने आ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार देश में करीब चार से पांच फीसदी लोगों में सफेद दाग की परेशानी देखने को मिलती है जबकि विश्व स्तर पर यह आंकड़ा करीब एक से दो फीसदी है. अब डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने एक लंबे अध्ययन के बाद ल्यूकोस्किन दवा तैयार की है.
विषनाग औषधि सूरज की किरणों की मदद से सफेद दाग को बढ़ने से रोकने में प्रभावी है. साथ ही इसे पूरी तरह से खत्म भी कर रही है. विषनाग के अलावा कौंच, बाकुची, मंडूकपर्णी, एलोवेरा, तुलसी इत्यादि जड़ी बूटियां भी मिलकर सफेद दाग को रोकती हैं.
विश्व विटिलिगो दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय वैज्ञानिकों की इस सफलता के बारे में एमिल फॉर्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने कहा कि विषनाग काफी दुर्लभ बूटी है.
संचित शर्मा ने बताया कि इन जड़ी-बूटियों से तैयार ल्यूकोस्किन दवा को प्रभावित हिस्से में लगाने के बाद सुबह और शाम 10-10 मिनट धूप की किरणों में बैठने की सलाह दी जाती है क्योंकि सुबह की धूप से त्वचा को नुकसान भी कम होता है. साथ ही शरीर को विटामिन भी मिलते हैं.