वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लगभग 3 साल बाद छात्रों के महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. इसमें 35000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे. बड़ी बात यह है कि यह वेशभूषा न सिर्फ इस उत्सव को और भी ज्यादा यादगार बनाएगी, बल्कि विश्वविद्यालय के नींव की परिकल्पना को भी साकार करेगी.
जी हां लगभग 3 साल बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन होने जा रहा है. इसमें लगभग 37000 से ज्यादा विद्यार्थियों को 3 दिनों तक डिग्रियां प्रदान की जाएंगी. यह पहला ऐसा मौका होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी खास वेशभूषा में एक साथ उपाधियों को ग्रहण करेंगे. ये आयोजन 10 दिसंबर को होगा. दीक्षांत समारोह का आयोजन होने वाला है, जो 3 दिन तक संचालित होगा.
बता दें कि इन उपाधियों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डिलीट की उपाधि शामिल होंगी. इस बाबत छात्रों का कहना है कि उनके लिए यह बेहद यादगार मौका होने वाला है. क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लगभग 3 साल बाद उन्हें इस तरीके के दीक्षांत समारोह में डिग्रियां प्रदान की जाएंगी. यह उनके जीवन का गौरवान्वित पल होगा.
क्या होता है दीक्षांत
इस बारे में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बाला लखेंद्र सिंह बताते हैं कि दीक्षांत समारोह उपाधि वितरण समारोह होता है. इसमें छात्रों को उपाधियां प्रदान की जाती हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत विद्यार्थियों को भविष्य में किस तरीके का आचरण करना है इस बात को भी बताता है. काशी हिंदू विश्वविद्यालय का दीक्षांत इसी उद्देश्य के साथ वेदों और प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था से लिया गया है. उन्होंने बताया कि यहीं की परंपरा का अनुसरण करते हुए पूरे देश में अलग-अलग विश्वविद्यालयों में दीक्षांत की परंपरा शुरू की गई.
दीक्षांत के ड्रेस कोड का है खास महत्व
उन्होंने बताया कि हर जगह दीक्षांत में विदेशी वेशभूषा पहनी जाती है. लेकिन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एक खास तरीके का ड्रेस कोड होता है. इसमें छात्रों को सफेद कुर्ता पाजामा, धोती कुर्ता पहनना होता है. तो वहीं, छात्राओं के लिए लाल रंग के बॉर्डर की क्रीम कलर की साड़ी निर्धारित की जाती है. उन्होंने बताया कि यह वेशभूषा विद्यार्थियों के अंदर आगे चलकर के जीवन में किस तरह शांति व गंभीरता के साथ व्यवहार करना है, इस बात की सीख देता है. इसके साथ ही ड्रेस कोड में मौजूद पीले रंग का दुपट्टा विश्वविद्यालय की स्थापना को बताता है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना बसंत पंचमी के दिन हुई थी, इसलिए इस साफे का रंग पीला रखा गया है और इस पर विश्वविद्यालय के लोगों को लगाया गया है. यह रंग विद्यार्थियों के अंदर ऊर्जा का संचार करता है. इसके साथ ही अलग-अलग डिग्री धारकों के लिए अलग-अलग रंग की पगड़ी भी निर्धारित की गई है.
37 हजार विद्यार्थियों को मिलेगी उपाधि
बता दें कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के 37,896 विद्यार्थी अपने छात्र जीवन के उन सबसे प्रमुख अवसरों में से एक का अनुभव करने को तैयार हैं. जिसके स्मरण से वे जीवनपर्यन्त गौरवान्वित होंगे. विश्वविद्यालय अपने 102वें दीक्षांत समारोह में वर्ष 2020, 2021 और 2022 में डिग्री उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को उपाधियां प्रदान करेगा. दीक्षांत समारोह का मुख्य कार्यक्रम सुबह से स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित होगा.
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मुख्य समारोह में विद्यार्थियों को मिलेंगी 91 उपाधियां
इस बारे में कुलपति प्रो. जैन ने बताया कि मुख्य समारोह में कुल 91 उपाधियां प्राप्तकर्त्ताओं को मंच से विभिन्न पदक प्रदान किए जाएंगे. इनमें कुलाधिपति पदक, स्वर्गीय महाराजा विभूति नारायण सिंह स्वर्ण पदक और बीएचयू पदक शामिल हैं. इसमें बीएचयू के पुरा छात्र और पालो अल्टो नेटवर्क्स के अध्यक्ष तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकेश अरोड़ा इस वर्ष का दीक्षांत संबोधन देंगे.