सुलतानपुर: विभागीय अधिकारियों से लेकर शासन-प्रशासन तक के जिम्मेदारों को गुमराह करने की हरकत तहसीलदार को महंगी पड़ गई. वही, तरीका उच्च न्यायालय के साथ अपनाने पर न्यायमूर्ति ने प्रकरण को गंभीरता से लिया और हाईकोर्ट को गुमराह करने के आरोप में तहसीलदार कादीपुर पर 10,000 का अर्थदंड लगाया है.
हाईकोर्ट द्वारा जनहित याचिका के आदेश का अनुपालन ना करने पर तहसीलदार कादीपुर के विरुद्ध अवमानना याचिका 13 जनवरी 2022 को दायर की गई थी. जिसमें तहसीदार कादीपुर बृजेश कुमार सिंह से अनुपालन के सन्दर्भ में हलफनामा मांगा गया था. जिसके संदर्भ में तहसीलदार द्वारा तोड़ मरोड़ के भ्रामक हलफ नामा दाखिल किया गया. जिससे इलाहबाद उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने नाराज होकर तहसीलदार कादीपुर पर 10,000 जुर्माना लगाते हुए हलफनामा स्वीकार करने से मना कर दिया. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जुर्माने की राशि तहसीलदार स्वयं की जेब से भरेंगे. किसी भी स्थिति में सरकारी खजाने से जुर्माने की भरपाई नहीं की जायेगी.
बता दें कि तहसील कादीपुर के ग्राम कल्यानपुर निवासी प्रिया मिश्रा ग्राम सभा की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट में में जनहित याचिका दायर की थी. इसके बाद कोर्माट ने 4 महीने के अन्दर जमीन खाली करने का निर्देश दिया था. परन्तु आदेश के एक साल बीत जाने के बाद भी तहसीलदार कादीपुर द्वारा अनुपालन नहीं किया गया. जिसके बाद हाईकोर्ट ने दिसंबर माह में अवमानना नियोजित की गई तथा 2 तहसीदार द्वारा 2 बार अनुपालन के सन्दर्भ हलफनामा दाखिल करने का समय लिया गया था. अततः तहसीदार द्वारा भ्रामक हलफनामा दाखिल किया गया. जिससे चलते तहसीदार कादीपुर पर जुर्माना लगा. सरकारी भूमि / जलाशय की भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में न्यायमूर्ति ने यह आदेश जारी किया है.
अधिवक्ता सौभाग्य मिश्रा ने बताया कि हाईकोर्ट उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की तरफ से 10000 का जुर्माना लगाया गया है. जनहित याचिका में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करने एवं कोर्ट को गुमराह करने के मामले में न्यायालय ने आदेश जारी किया है. न्यायालय ने यह भी कहा है कि यह जुर्माने की धनराशि वह अपने जेब से भरेंगे. इसमें सरकारी धन को कतई शामिल नहीं किया जाएगा.