श्रावस्ती: भारत नेपाल सीमा पर बसे आदिवासी थारू गांव मोतीपुर की हर गली सन्नाटे में है. उगते सूर्य की लालिमा भले ही गांव वालों को नया सवेरा बताने आती हो. लेकिन, उनकी उदासी नहीं खत्म कर पाती. उम्मीदें जिंदा है. बस इसी आस के भरोसे कि शायद उत्तर काशी सुरंग में फंसे गांव के 6 बेटे जल्द ही सही सलामत वापस लौट आएंगे.
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मोतीपुर गांव के राम सुंदर, संतोष, सत्यदेव, राममिलन, अंकित और जय प्रकाश उत्तराखंड के उत्तर काशी जिले के यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर टनल निर्माण में मजदूरी कर रहे थे. टनल भूस्खलन से करीब 57 मीटर धंस गई. सभी दीपावली के दिन से इसमें फंसे हुए हैं. 12 नवंबर को इनके टनल में फंसे होने की सूचना मिली तो गांव में दीपावली की खुशी गायब हो गई. 14 दिनों से टनल में फंसे मजदूरों के परिवार भरपेट भोजन नहीं कर रहे हैं. बेटों की सलामती की चिंता परिवार को खाए जा रही है.
रामसुंदर की पत्नी शीला कहती हैं कि एक-एक दिन पहाड़ की तरह कट रहा है. बच्चे भी पापा के लिए बेचैन हैं. वीडियो देखा है. आवाज भी सुनी है. लेकिन, सामने देखकर ही मन को तसल्ली मिलेगी. बच्चूपुरवा के संतोष की मां विदेशनी बताती हैं कि लड़के की आवाज को सुन लेना काफी नहीं है, जब तक अपने जिगर के टुकड़े को आंख से न निहार लूं.
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भरी आंखों को पोंछते हुए 85 वर्षीय दादी चैनी ने बताया कि अगर ऐसा जानती तो अपने पोते को बाहर नहीं जाने देती. पोते की सलामती के लिए मान मनौती कर रही हैं. अपने पोते को सुरक्षित घर में देखना चाहती हूं. ऐसा ही हाल टनल में फंसे चार मजदूर सत्यदेव, राम मिलन,अंकित और जय प्रकाश के परिजनों का हाल है. सभी सकुशल घर वापसी की राह देख रहे हैं. सत्यदेव की पत्नी राम रती को तो अब ढांढस के दो शब्द भी कचोटने लगे हैं. नन्हे बच्चे उम्मीद के साथ पापा के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं.
मोबाइल पर कुशलक्षेम जाना तो आई जान में जान
उत्तरकाशी में यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर टनल निर्माण में मजदूरी करने गए राम सुंदर, संतोष, सत्यदेव, राममिलन, अंकित और जय प्रकाश परिवार वालों ने बताया कि मोबाइल फोन पर जानकारी मिली है. इससे इनके परिवारीजन और रिश्तेदारों के चेहरों पर मुस्कान तो लौटी है. लेकिन, समय के साथ इन परिवारों की धड़कनें भी तेज हो रही हैं. मोतीपुर कला गांव में शनिवार को महिलाएं टनल में फंसे गांव के बेटों का वीडियो और वाकी-टाकी से बात को सुनने के लिए आतुर बैठी थीं.
उत्तराखंड सरकार का प्रयास सराहनीय
राम मिलन की पत्नी सुनीता बताती हैं कि हमरे थरवा (पति) समेत सबको सलामत बाहर निकालने के लिए उत्तराखंड सरकार का प्रयास सराहनीय है. लेकिन, कब घर आएंगे यह सवाल परेशान कर रहा है.
ढांढस बंधा रहे मौके पर डटे परिवार के लोग
अंकित के पिता सीताराम, राम सुंदर के पिता मनीराम, संतोष के भाई अशोक व बहनोई विष्णू और सत्यदेव के भाई महेश व राममिलन उत्तरकाशी में डटे हैं. ये लोग मौके की स्थिति से परिवार को अवगत कराते हुए ढांढस बंधा रहे हैं. राज्य समन्वयक के तौर पर मौके पर मौजूद अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि मजदूरों तक खाद्य सामग्री पहुंच रही हैं. सभी स्वस्थ हैं. बहुत जल्द ही सभी को सुरक्षित घर लेकर लौटेंगे.
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