मुरादाबाद: बैंकों के निजीकरण को लेकर बैंक कर्मचारियों ने मोदी सरकार के खिलाफ बैंक के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी. उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों का बड़ा योगदान है. बैंकों का विलय कर सरकार की बैंकों के निजीकरण करने की मंशा है, जिसके माध्यम से बड़े उद्योपतियों को लोन दिया जा सके. इस विलय से एक लाख से ज्यादा बैंक कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है.
यूनियन के जिला सचिव नवीन कुमार ने बताया कि सरकार के इस फैसले से जनता को कोई फायदा नहीं होगा और न ही सरकार को कोई फायदा होगा. सरकार की यह बात कहना कि देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों का कोई योगदान नहीं है, यह बिल्कुल गलत है. बैंकों का सबसे बड़ा योगदान है. सरकार बड़े बैंकों में छोटे बैंकों का विलय कर बड़े-बड़े उद्योगपति को लोन देने की तैयारी कर रही है. पहले से ही देश के अंदर बैंकों में एनपीए की राशि लगातार बढ़ती जा रही है. इसकी वसूली के लिए कोई भी ठोस कानून अभी तक नहीं बनाया गया है.
सरकार के द्वारा जिन बैंकों का विलय किया जा रहा है, उन कर्मचारियों की संख्या एक लाख से ऊपर है, जिसकी वजह से उनकी नौकरी पर भी खतरा मंडरा रहा है. SBI के अंदर जब बैंकों का विलय हुआ था तो उसमें 6,950 शाखा बंद कर दी गई थीं. सरकार की मंशा यह है कि बैंकों का विलय करके बैंकों का निजीकरण छोड़ दिया जाए. बैंकों को उद्योगपतियों के हाथों में सौंपने की तैयारी हो रही है. इलाहाबाद बैंक 155 साल पुराना है. यह विश्व का सबसे पुराना बैंक है. हम चाहते हैं कि इलाहाबाद बैंक की पहचान बनी रहे. ओपन सेंट्रल कमेटी की बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाए.
-नवीन कुमार, जिला सचिव, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन