कन्नौज: लॉकडाउन के बीच सरकार की ओर से थोड़ी छूट देते हुए ऑनलाइन शॉपिंग के विकल्प को हरी झंडी दी गई है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का व्यापारी नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है. विज्ञप्ति जारी कर शनिवार को अखिल भारतीय उधोग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में सभी व्यापारियों ने सरकार के फैसले का पालन करते हुए प्रतिष्ठानों को बन्द रखा. वहीं ऑनलाइन शॉपिंग के फैसले का सब व्यापारी पुरजोर विरोध करते हैं, जिसमें विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से संचालित बड़े समूहों को ऑनलाइन बिक्री करने की अनुमति दी गई है.
व्यापारियों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण सभी को काफी नुकसान हो रहा है. ऐसे में विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को व्यापार करने की छूट देना स्वदेशी व्यापारियों के साथ अन्याय है. उनका कहना है की सरकार मानवीय दृष्टिकोण से सहानुभूति पूर्वक जल्द निर्णय उनके पक्ष में ले, वरना सब व्यापारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप विरोध करने के लिए बाध्य होंगे. इसके अलावा फुटकर व्यापारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना-अपना विरोध शुरू कर दिया है.
कन्नौज: व्यापारियों ने किया ऑनलाइन शॉपिंग का विरोध - व्यापारी कर रहे ऑनलाइन शॉपिंग का विरोध
सरकार की ओर से ऑनलाइन शॉपिंग के विकल्प को हरी झंडी मिल गई है, उत्तर प्रदेश के कन्नौज में व्यापारी नेता इसका विरोध कर रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि यह उनके साथ अन्याय है.
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कन्नौज: लॉकडाउन के बीच सरकार की ओर से थोड़ी छूट देते हुए ऑनलाइन शॉपिंग के विकल्प को हरी झंडी दी गई है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का व्यापारी नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है. विज्ञप्ति जारी कर शनिवार को अखिल भारतीय उधोग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में सभी व्यापारियों ने सरकार के फैसले का पालन करते हुए प्रतिष्ठानों को बन्द रखा. वहीं ऑनलाइन शॉपिंग के फैसले का सब व्यापारी पुरजोर विरोध करते हैं, जिसमें विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से संचालित बड़े समूहों को ऑनलाइन बिक्री करने की अनुमति दी गई है.
व्यापारियों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण सभी को काफी नुकसान हो रहा है. ऐसे में विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को व्यापार करने की छूट देना स्वदेशी व्यापारियों के साथ अन्याय है. उनका कहना है की सरकार मानवीय दृष्टिकोण से सहानुभूति पूर्वक जल्द निर्णय उनके पक्ष में ले, वरना सब व्यापारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप विरोध करने के लिए बाध्य होंगे. इसके अलावा फुटकर व्यापारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना-अपना विरोध शुरू कर दिया है.