अयोध्या: मिथिला भाव के विशिष्ट उपासक अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल स्वामी रामहर्षण दास की तपोस्थली मंत्रार्थ मंडपम में भगवान श्रीराम और जानकी का रंगोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर किशोरी जी के आदेश पर सीता जी की सहेलियों ने श्रीराम पर पुष्पवर्षा कर उत्सव आरंभ किया. देखते ही देखते पूरा मंच फूलों से भर गया.
सखियों के साथ रंग महल में पधारीं सीता
रंग महोत्सव में लाडली श्री किशोरी जी के आने के बाद होली उत्सव का श्री गणेश होता है. महोत्सव में सखियां लाडली श्री किशोरी जी से कहती हैं कि पहले वे अपने कर कमलों से लाल जू को अबीर गुलाल लगाकर उनका स्वागत करें.
किशोरी जी अबीर गुलाल लगाकर करती हैं स्वागत
किशोरी जी राघव सरकार जी को अबीर गुलाल लगाकर उनका स्वागत करती हैं. उसके बाद राघव जी भी किशोरी जी को अबीर गुलाल लगाकर उनका स्वागत करते हैं. इसके बाद मिथिला की होली का आरंभ होता है. सखियां होली के पद गाकर राम जी के साथ होली उत्सव का आनंद लेती हैं.
मोसे खेलो न रंग रस रोरी कौशल्या जी के लाडले
होली उत्सव के बीच में लाडली श्री किशोरी जी ने राम जी से कहा कि हे सरकार आप मिथिला की सखियों और मेरे साथ होली मत खेलिये, नहीं तो आप थक जाएंगे. इसके बाद किशोरी जी ने राम जी से निवेदन करते हुए कहा कि मोसे खेलो न रंग रस रोरी कौशल्या जी के लाडले. अंत में सभी सखियां दोनों हाथ जोड़कर राम जी और लाडली श्री किशोरी जी के चरणों में निवेदन करती हैं कि रंग की लाज तोहे रसिया, रंग की तोहे लाज.
88 सालों से हो रहा है कार्यक्रम
भागवत मधुकर मनीराम दास कहते हैं कि मंत्रार्थ मंडपम का उत्सव दूसरी जगहों से काफी अलग होता है. श्री प्रेम रामायण महाकाव्य में हमारे श्री सदगुरुदेव भगवान स्वामी श्री राम हर्षण दास जी महाराज ने सभी लीलाओं का वर्णन किया है. मिथिला के रस में डूबने के लिए हम सभी लोगों को प्रेम रामायण महाकाव्य जी का पाठ अवश्य करना चाहिए. यहां पर श्री सीताराम विवाह महोत्सव 88 वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है.