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अयोध्या में 14 कोस पैदल चल अमिट पुण्य के भागी बने आस्था के पुजारी - अयोध्या की खबरें

रामनगरी अयोध्या में मंगलवार सुबह 6:05 से शुरू हुई 14 कोसी परिक्रमा बुधवार यानी आज सुबह 7:49 पर समाप्त हो गई. इस परिक्रमा में देश भर से लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिसके बाद आज परिक्रमा समाप्त होने पर श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान कर पुण्य लाभ लिया.

अमिट पुण्य के भागी बने श्रद्धालु
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Published : Nov 6, 2019, 7:52 PM IST

अयोध्या: अयोध्या यूं ही नहीं राम की नगरी कही जाती. यहां की मान्यता इसे विशेष बनाती है. प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाने वाली अयोध्या का धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व है. समस्त ब्रम्हांड की प्रदक्षिणा न करके अयोध्या की पद प्रदक्षिणा करने मात्र से ही लोगों को कभी न समाप्त होने वाला पुण्य फल मिलता है. अक्षय नवमी की तिथि पर अयोध्या में हर वर्ष होने वाले 14 कोसी परिक्रमा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसा माना जाता है कि इसी तिथि पर जब अयोध्या की परिक्रमा की जाती है तो उसे अक्षय पुण्य मिलता है. इसी मान्यता के चलते लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगा कर अपना संकल्प पूरा किया है.

अमिट पुण्य के भागी बने श्रद्धालु.

सभी धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु टेकते हैं मत्था
अक्षय नवमी की तिथि पर अयोध्या में हर वर्ष होने वाले 14 कोसी परिक्रमा होती है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. अयोध्या में 14 कोसीय परिक्रमा को लेकर मान्यता है कि अगर अयोध्या का भ्रमण कर लिया जाए तो भगवान राम-सीता की प्रदक्षिणा हो जाती है. इसके साथ ही साकेत की राजधानी अयोध्या का भी भ्रमण हो जाता है, जो पुराणों में पवित्र पवित्र स्थल माना जाता है. 14 कोस यानी 42 किलोमीटर की परिधि में अयोध्या के सभी प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं. परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकते हैं और अपनी पदयात्रा पर चलते रहते हैं.

अमिट पुण्य के भागी बने श्रद्धालु
मंगलवार सुबह 6:05 से शुरू हुई 14 कोसीय परिक्रमा बुधवार यानी आज सुबह 7:49 पर समाप्त हो गई. जिन श्रद्धालुओं ने नए घाट से परिक्रमा की शुरुआत की थी. वह राम की पैड़ी पर पहुंचे और सरयू नदी में डुबकी लगाई. जिसके बाद उनका संकल्प पूरा हुआ. मान्यता के अनुसार यह सभी श्रद्धालु अमित पुण्य के भागी बने हैं.

अयोध्या में किए जाने वाले पुण्य होते हैं अमिट
अयोध्या में हर वर्ष आयोजित की जाने वाली 14 कोसी परिक्रमा से जुड़े तथ्यों को जानने के लिए ईटीवी भारत ने नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास से बात की. उन्होंने कहा कि 14 कोसीय परिक्रमा वर्षों से अयोध्या की परंपरा रही है. माना जाता है कि अयोध्या की प्रदक्षिणा करने से लोगों को समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा करने का फल मिलता है. अक्षय नवमी की तिथि पर होने वाली परिक्रमा का फल और भी अधिक हो जाता है, क्योंकि इस दौरान धार्मिक नगरी में किए जाने वाले पुण्य अमिट होते हैं इसका कभी क्षय नहीं होता है.

सृष्टि की शुरुआत अयोध्या से
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार अयोध्या सृष्टि की जननी रही है. यह मानव जाति का उद्गम स्थल है. मनु और शतरूपा की हजारों वर्ष की तपस्या के बाद भगवान राम का जन्म हुआ था, जिसके बाद सृष्टि में मानव जाति की उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली गई.

परिक्रमा के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने किया मार्च
अयोध्या में राम मंदिर के संभावित फैसले और कार्तिक मेला के दौरान 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा को लेकर शहर में उमड़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है. पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई है. इसके साथ ही सेना के जवानों का भी सहयोग लिया जा रहा है. 14 कोसी परिक्रमा के दौरान शहर में भारी भीड़ को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका का इनपुट मिलने के बाद रैपिड एक्शन फोर्स के जवान पूरी तरह मुस्तैद दिखे. उन्होंने शहर में नाका हनुमानगढ़ी के आस-पास मार्च भी किया.


अयोध्या: अयोध्या यूं ही नहीं राम की नगरी कही जाती. यहां की मान्यता इसे विशेष बनाती है. प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाने वाली अयोध्या का धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व है. समस्त ब्रम्हांड की प्रदक्षिणा न करके अयोध्या की पद प्रदक्षिणा करने मात्र से ही लोगों को कभी न समाप्त होने वाला पुण्य फल मिलता है. अक्षय नवमी की तिथि पर अयोध्या में हर वर्ष होने वाले 14 कोसी परिक्रमा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसा माना जाता है कि इसी तिथि पर जब अयोध्या की परिक्रमा की जाती है तो उसे अक्षय पुण्य मिलता है. इसी मान्यता के चलते लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगा कर अपना संकल्प पूरा किया है.

अमिट पुण्य के भागी बने श्रद्धालु.

सभी धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु टेकते हैं मत्था
अक्षय नवमी की तिथि पर अयोध्या में हर वर्ष होने वाले 14 कोसी परिक्रमा होती है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. अयोध्या में 14 कोसीय परिक्रमा को लेकर मान्यता है कि अगर अयोध्या का भ्रमण कर लिया जाए तो भगवान राम-सीता की प्रदक्षिणा हो जाती है. इसके साथ ही साकेत की राजधानी अयोध्या का भी भ्रमण हो जाता है, जो पुराणों में पवित्र पवित्र स्थल माना जाता है. 14 कोस यानी 42 किलोमीटर की परिधि में अयोध्या के सभी प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं. परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकते हैं और अपनी पदयात्रा पर चलते रहते हैं.

अमिट पुण्य के भागी बने श्रद्धालु
मंगलवार सुबह 6:05 से शुरू हुई 14 कोसीय परिक्रमा बुधवार यानी आज सुबह 7:49 पर समाप्त हो गई. जिन श्रद्धालुओं ने नए घाट से परिक्रमा की शुरुआत की थी. वह राम की पैड़ी पर पहुंचे और सरयू नदी में डुबकी लगाई. जिसके बाद उनका संकल्प पूरा हुआ. मान्यता के अनुसार यह सभी श्रद्धालु अमित पुण्य के भागी बने हैं.

अयोध्या में किए जाने वाले पुण्य होते हैं अमिट
अयोध्या में हर वर्ष आयोजित की जाने वाली 14 कोसी परिक्रमा से जुड़े तथ्यों को जानने के लिए ईटीवी भारत ने नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास से बात की. उन्होंने कहा कि 14 कोसीय परिक्रमा वर्षों से अयोध्या की परंपरा रही है. माना जाता है कि अयोध्या की प्रदक्षिणा करने से लोगों को समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा करने का फल मिलता है. अक्षय नवमी की तिथि पर होने वाली परिक्रमा का फल और भी अधिक हो जाता है, क्योंकि इस दौरान धार्मिक नगरी में किए जाने वाले पुण्य अमिट होते हैं इसका कभी क्षय नहीं होता है.

सृष्टि की शुरुआत अयोध्या से
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार अयोध्या सृष्टि की जननी रही है. यह मानव जाति का उद्गम स्थल है. मनु और शतरूपा की हजारों वर्ष की तपस्या के बाद भगवान राम का जन्म हुआ था, जिसके बाद सृष्टि में मानव जाति की उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली गई.

परिक्रमा के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने किया मार्च
अयोध्या में राम मंदिर के संभावित फैसले और कार्तिक मेला के दौरान 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा को लेकर शहर में उमड़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है. पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई है. इसके साथ ही सेना के जवानों का भी सहयोग लिया जा रहा है. 14 कोसी परिक्रमा के दौरान शहर में भारी भीड़ को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका का इनपुट मिलने के बाद रैपिड एक्शन फोर्स के जवान पूरी तरह मुस्तैद दिखे. उन्होंने शहर में नाका हनुमानगढ़ी के आस-पास मार्च भी किया.


Intro:अयोध्या: अयोध्या यूं ही नहीं राम की नगरी कही जाती. यहां की मान्यता इसे विशेष बनाती है. प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाने वाला अयोध्या अपने धार्मिक अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व का है. समस्त ब्रम्हांड की प्रतिक्षा ना करके अयोध्या की पर दक्षिणा करने मात्र से ही लोगों को कभी ना समाप्त होने वाला पुण्य फल मिलता है. इसी मान्यता के चलते लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगा कर अपना संकल्प पूरा किया है.

राम की नगरी पहुंचे लाखों की संख्या में श्रद्धालु.परिक्रमा पूरी होने के बाद जब घर जाएंगे तो जो यहां से लेकर वह जाएंगे वह उनके जीवन पर्यंत काम आएगा. ऐसा माना जाता है कि इसी तिथि पर जब अयोध्या की परिक्रमा की जाती है तो उसे अक्षय पुण्य मिलता है.


Body:अक्षय नवमी की तिथि पर अयोध्या में हर वर्ष होने वाले 14 कोसी परिक्रमा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा को लेकर मान्यता है कि अगर अयोध्या का भ्रमण कर लिया जाए तो भगवान राम सीता की प्रदक्षिणा हो जाती है. इसके साथ ही साकेत की राजधानी अयोध्या का भी भ्रमण हो जाता है, जो पुराणों में पवित्र पवित्र स्थल माना जाता है. 14 कोस यानी 42 किलोमीटर की परिधि में अयोध्या के सभी प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकते हैं और अपने पदयात्रा पर चलते रहते हैं.

अयोध्या में हर वर्ष आयोजित की जाने वाली 14 कोसी परिक्रमा से जुड़े तथ्यों को जानने के लिए ईटीवी भारत ने नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि 14 कोसी परिक्रमा वर्षों से अयोध्या की परंपरा नहीं है. माना जाता है कि अयोध्या की प्रदक्षिणा करने से लोगों को समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा करने का फल मिलता है. अक्षय नवमी की तिथि पर होने वाली परिक्रमा का फल और भी अधिक हो जाता है, क्योंकि इस दौरान धार्मिक नगरी में किए जाने वाले पुणे अमित होते हैं इसका कभी क्षय नहीं होता है.

सृष्टि की शुरुआत अयोध्या से
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार अयोध्या श्रेष्ठ की जननी रही है. मानव जाति का उद्गम स्थल है. मनु और शतरूपा की हजारों वर्ष की तपस्या के बाद भगवान राम का जन्म हुआ था. जिसके बाद सृष्टि में मानव जाति की उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली गई.




Conclusion:मंगलवार सुबह 6:05 से शुरू हुई 14 कोसी परिक्रमा बुधवार यानी आज सुबह 7:49 पर समाप्त हो गई. जी श्रद्धालुओं ने नए घाट से परिक्रमा की शुरुआत की थी. वह राम की पैड़ी पर पहुंचे और सरयू नदी में डुबकी लगाया, जिसके बाद उनका संकल्प पूरा हुआ. मान्यता के अनुसार यह सभी श्रद्धालु अमित पुण्य के भागी बने हैं. यह अयोध्या से आज इस पुण्य को लेकर गए हैं वह इनके जीवन पर्यंत काम आने वाला है.

परिक्रमा के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने किया मार्च
अयोध्या में राम मंदिर के संभावित फैसले और कार्तिक मेला के दौरान 14 कोसी और पंचकोशी परिक्रमा को लेकर शहर में उमड़ती भीड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट पर है पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात किए गए हैं. इसके साथ ही सेना के जवानों का भी सहयोग लिया जा रहा है. 14 कोसी परिक्रमा के दौरान शहर में भारी भीड़ को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका का इनपुट मिलने के बाद रैपिड एक्शन फोर्स के जवान पूरी तरह मुस्तैद दिखे. उन्होंने शहर में नाका हनुमानगढ़ी के आसपास मार्च किया.


बाइट- रामदास, महंत, नाका हनुमानगढ़ी
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