ETV Bharat / state

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया कल बीजेपी में होंगे शामिल, तीन बार रहे सांसद - भाजपा कार्यालय में पार्टी ज्वाइन करेंगे

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया एक बार फिर बीजेपी का दामन थामेंगे. महरिया 19 मई को अपने समर्थकों के साथ पार्टी ज्वाइन करेंगे.

ex union minister Subhash Maharia to join BJP on May 19th, know his political journey
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया कल बीजेपी में होंगे शामिल, तीन बार रहे सांसद
author img

By

Published : May 18, 2023, 8:32 PM IST

सीकर. तीन बार के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया 19 मई को अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री विधानसभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर भाजपा में शामिल होकर पार्टी को मजबूत करेंगे. मेहरिया कल 10 बजे प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी ज्वाइन करेंगे. महरिया अक्टूबर 1999 से जनवरी 2003 तक ग्रामीण विकास और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जनवरी 2003-04 तक उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री मंत्री थे. महरिया भाजपा के टिकट पर 1998 से 2009 तक सीकर से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं.

तीन बार सांसद रहे महरियाः लोकसभा चुनाव 1996 में कांग्रेस के डॉ हरिसिंह ने महरिया को पहले चुनाव में हार का मुंह दिखाया. डॉक्टर हरिसिंह ने बीजेपी के सुभाष महरिया को 38000 मतों से पराजित किया था. लेकिन महरिया ने 2 साल बाद ही 1998 के लोकसभा चुनाव में डॉक्टर हरिसिंह से अपनी हार का बदला ले लिया. इस चुनाव में बीजेपी के महरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ सिंह को 41322 वोटों से हराया. इसके बाद मेहरिया ने 1999 में कांग्रेस के डॉ बलराम जाखड़ को 28173 मतों से हराया. 2004 में सुभाष महरिया ने फिर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह को 54683 मतों से शिकस्त दी.

पढ़ेंः अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करता शेखावाटी का महरिया परिवार

हार के बाद थामा कांग्रेस का हाथ: भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर महरिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. चुनाव में हार के कुछ समय बाद ही तत्कालीन एआईसीसी के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत, पीसीसी प्रमुख सचिन पायलट और पूर्व पीसीसी प्रमुख नारायणसिंह ने महरिया को कांग्रेस में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में महरिया को कांग्रेस की तरफ से सांसद का प्रत्याशी बनाया गया था. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से पार्टी ने मेहरिया से किनारा कर लिया. 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉक्टर बलराम जाखड़ को हराकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के आंख के तारे बने मेहरिया आज फिर से उसी पार्टी में जाने को आतुर हैं.

पढ़ेंः नेता जी रो बहीखातो : सुभाष महरिया, सीकर से कांग्रेस प्रत्याशी

पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस कीः सितंबर 1957 को जन्मे मेहरिया मूलतः सीकर के लक्ष्मणगढ़ तहसील के कूदन गांव के रहने वाले हैं. रामदेव सिंह धोद क्षेत्र से कई बार विधायक रहने के साथ ही कांग्रेस की राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे. कांग्रेसी पृष्ठभूमि का होने के बावजूद बीजेपी के कद्दावर नेता भैरों सिंह शेखावत ने सुभाष महरिया की प्रतिभा को देखकर उन्हें बीजेपी में लाकर 1996 में सीकर लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा था. पहली बार हार के बावजूद पार्टी ने 1996 में फिर महरिया पर भरोसा जताया तो वह उस पर खरे उतरे और कांग्रेस के डॉक्टर हरिसिंह को हराकर सांसद बने.

पढ़ेंः घनश्याम तिवाड़ी के बाद अब वरिष्ठ नेता कुलदीप धनखड़ की भाजपा में हुई घर वापसी

बलराम जाखड़ को हरा बने हीरोः 1999 के चुनाव में महरिया ने जब कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ बलराम जाखड़ को चुनाव हराया, तो वे पार्टी के आंखों के तारे बन गये. यहीं से उनका स्वर्णिम काल शुरू हुआ और उन्हें केंद्र में राज्य मंत्री के पद से नवाजा गया. उसके बाद लगातार 2004 में भी पार्टी ने महरिया को चुनाव मैदान में उतारा, तो उन्होंने हैट्रिक बनाई लेकिन वह 2009 में महादेव सिंह से मात खा गए. 2014 में जब पार्टी ने उनको टिकट से दरकिनार किया, तो वे बगावती तेवरों के साथ चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन सफल नहीं हो पाए.

सीकर. तीन बार के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया 19 मई को अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री विधानसभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर भाजपा में शामिल होकर पार्टी को मजबूत करेंगे. मेहरिया कल 10 बजे प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी ज्वाइन करेंगे. महरिया अक्टूबर 1999 से जनवरी 2003 तक ग्रामीण विकास और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जनवरी 2003-04 तक उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री मंत्री थे. महरिया भाजपा के टिकट पर 1998 से 2009 तक सीकर से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं.

तीन बार सांसद रहे महरियाः लोकसभा चुनाव 1996 में कांग्रेस के डॉ हरिसिंह ने महरिया को पहले चुनाव में हार का मुंह दिखाया. डॉक्टर हरिसिंह ने बीजेपी के सुभाष महरिया को 38000 मतों से पराजित किया था. लेकिन महरिया ने 2 साल बाद ही 1998 के लोकसभा चुनाव में डॉक्टर हरिसिंह से अपनी हार का बदला ले लिया. इस चुनाव में बीजेपी के महरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ सिंह को 41322 वोटों से हराया. इसके बाद मेहरिया ने 1999 में कांग्रेस के डॉ बलराम जाखड़ को 28173 मतों से हराया. 2004 में सुभाष महरिया ने फिर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह को 54683 मतों से शिकस्त दी.

पढ़ेंः अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करता शेखावाटी का महरिया परिवार

हार के बाद थामा कांग्रेस का हाथ: भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर महरिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. चुनाव में हार के कुछ समय बाद ही तत्कालीन एआईसीसी के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत, पीसीसी प्रमुख सचिन पायलट और पूर्व पीसीसी प्रमुख नारायणसिंह ने महरिया को कांग्रेस में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में महरिया को कांग्रेस की तरफ से सांसद का प्रत्याशी बनाया गया था. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से पार्टी ने मेहरिया से किनारा कर लिया. 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉक्टर बलराम जाखड़ को हराकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के आंख के तारे बने मेहरिया आज फिर से उसी पार्टी में जाने को आतुर हैं.

पढ़ेंः नेता जी रो बहीखातो : सुभाष महरिया, सीकर से कांग्रेस प्रत्याशी

पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस कीः सितंबर 1957 को जन्मे मेहरिया मूलतः सीकर के लक्ष्मणगढ़ तहसील के कूदन गांव के रहने वाले हैं. रामदेव सिंह धोद क्षेत्र से कई बार विधायक रहने के साथ ही कांग्रेस की राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे. कांग्रेसी पृष्ठभूमि का होने के बावजूद बीजेपी के कद्दावर नेता भैरों सिंह शेखावत ने सुभाष महरिया की प्रतिभा को देखकर उन्हें बीजेपी में लाकर 1996 में सीकर लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा था. पहली बार हार के बावजूद पार्टी ने 1996 में फिर महरिया पर भरोसा जताया तो वह उस पर खरे उतरे और कांग्रेस के डॉक्टर हरिसिंह को हराकर सांसद बने.

पढ़ेंः घनश्याम तिवाड़ी के बाद अब वरिष्ठ नेता कुलदीप धनखड़ की भाजपा में हुई घर वापसी

बलराम जाखड़ को हरा बने हीरोः 1999 के चुनाव में महरिया ने जब कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ बलराम जाखड़ को चुनाव हराया, तो वे पार्टी के आंखों के तारे बन गये. यहीं से उनका स्वर्णिम काल शुरू हुआ और उन्हें केंद्र में राज्य मंत्री के पद से नवाजा गया. उसके बाद लगातार 2004 में भी पार्टी ने महरिया को चुनाव मैदान में उतारा, तो उन्होंने हैट्रिक बनाई लेकिन वह 2009 में महादेव सिंह से मात खा गए. 2014 में जब पार्टी ने उनको टिकट से दरकिनार किया, तो वे बगावती तेवरों के साथ चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन सफल नहीं हो पाए.

ETV Bharat Logo

Copyright © 2025 Ushodaya Enterprises Pvt. Ltd., All Rights Reserved.