नागौर. जिले का परबतसर कस्बा प्राचीन वीर तेजा मंदिर और ऐतिहासिक पशु मेले के लिए देशभर में पहचान रखता है. स्थानीय निवासियों का मानना है कि यहां का पशु मेला कभी पूरे एशिया में अपना अलग महत्व रखता था. इसे प्रशासनिक उदासीनता कहें या राजनीतिक उपेक्षा लेकिन हालात यह है कि यहां के वीर तेजा मंदिर को वह भव्य स्वरूप नहीं मिल पाया, जिसका वह हकदार है. इसके साथ ही ऐतिहासिक पशु मेला भी अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है.
वीर तेजा मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्य नथमल पारीक ने बताया कि यह मंदिर विक्रम संवत 1791 में बना था. जिसमें एक चबूतरे पर गर्भगृह है. पास ही एक खेजड़ी का पेड़ है. जो 300 साल पुराना है. मंदिर के चारों तरफ लोहे की रेलिंग लगी हुई है. छाया के लिए नाममात्र के टीन शेड हैं. उन्होंने बताया कि सावन और भाद्रपद महीने में देशभर के हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं. लेकिन उनके ठहरने की कोई सुविधाजनक व्यवस्था नहीं है.
इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 2005 में प्रोजेक्ट बना. जो कागजों में ही अटक कर रह गया. ग्रामीण गिरिराज का कहना है कि यह वीर तेजा मंदिर और यहां का पशु मेला देशभर में पहचान रखता था. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अब अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.
वीर तेजाजी के मंदिर के पास ही खारिया तालाब है. जो कभी पूरे परबतसर की प्यास बुझाता था. लेकिन अनदेखी के कारण यह तालाब भी पूरा सुख चुका है. उनका कहना है कि यदि सरकार प्रयास करे तो परबतसर में पर्यटन को आकर्षित करने में सफलता मिल सकती है.