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अवैध रूप से लिंग परीक्षण मामले में डॉक्टर के खिलाफ परिवाद दायर, पुलिस ने पकड़ा था रंगे हाथ - Rewa Aggarwal nursing home

रीवा में अवैध रूप से लिंग परीक्षण करने के मामले में अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर किया गया. बता दें कि पुलिस ने जांच में उन्हें रंगे हाथ पकड़ा था.

लिंग परीक्षण मामले में डॉक्टर के खिलाफ परिवाद दायर
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Published : Aug 9, 2019, 2:21 PM IST

Updated : Aug 9, 2019, 2:57 PM IST

रीवा। शहर में संचालित अग्रवाल नर्सिंग होम के डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है. दरअसल, कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव को शिकायत मिली थी कि डॉक्टर अरुण अवैध रूप से सोनोग्राफी की मशीन लगाकर घर पर लिंग परीक्षण करते हैं. जिस पर कलेक्टर के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की सयुंक्त टीम ने महिला सब इंस्पेक्टर को लिंग परीक्षण कराने भेजा था, ताकि डॉक्टर पुलिस की जाल में फंस सके और यही हुआ, यहां डॉक्टर अरुण अग्रवाल रंगे हाथ पकड़ा गया.

लिंग परीक्षण मामले में डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ परिवाद दायर

जिला न्यायालय में विशेष लोक अभियोजक सचिन द्विवेदी ने बताया कि अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉक्टर अरुण अग्रवाल के खिलाफ लगातार जिला कलेक्टर को शिकायत मिल रही थी. उन्होंने बताया कि अरुण अग्रवाल घर पर अवैध रूप से लिंग परीक्षण कर गर्भपात करा रहा थे.

इसके बाद कलेक्टर ने जांच टीम का गठन किया और महिला इंस्पेक्टर को छह हजार रुपये के साथ डॉक्टर के पास लिंग परीक्षण कराने भेजा गया. इस दौरान डॉक्टर परीक्षण के बाद रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के मुताबिक, अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉ अरुण अग्रवाल अपने घर में लिंग परीक्षण करता था, जबकि हर सोनोग्राफी मशीन का रजिस्ट्रेशन कलेक्ट्रेट से होता है, मगर जांच के दौरान ना तो मशीन का रजिस्ट्रेशन मिला और ना ही संचालक.

रीवा। शहर में संचालित अग्रवाल नर्सिंग होम के डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है. दरअसल, कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव को शिकायत मिली थी कि डॉक्टर अरुण अवैध रूप से सोनोग्राफी की मशीन लगाकर घर पर लिंग परीक्षण करते हैं. जिस पर कलेक्टर के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की सयुंक्त टीम ने महिला सब इंस्पेक्टर को लिंग परीक्षण कराने भेजा था, ताकि डॉक्टर पुलिस की जाल में फंस सके और यही हुआ, यहां डॉक्टर अरुण अग्रवाल रंगे हाथ पकड़ा गया.

लिंग परीक्षण मामले में डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ परिवाद दायर

जिला न्यायालय में विशेष लोक अभियोजक सचिन द्विवेदी ने बताया कि अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉक्टर अरुण अग्रवाल के खिलाफ लगातार जिला कलेक्टर को शिकायत मिल रही थी. उन्होंने बताया कि अरुण अग्रवाल घर पर अवैध रूप से लिंग परीक्षण कर गर्भपात करा रहा थे.

इसके बाद कलेक्टर ने जांच टीम का गठन किया और महिला इंस्पेक्टर को छह हजार रुपये के साथ डॉक्टर के पास लिंग परीक्षण कराने भेजा गया. इस दौरान डॉक्टर परीक्षण के बाद रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के मुताबिक, अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉ अरुण अग्रवाल अपने घर में लिंग परीक्षण करता था, जबकि हर सोनोग्राफी मशीन का रजिस्ट्रेशन कलेक्ट्रेट से होता है, मगर जांच के दौरान ना तो मशीन का रजिस्ट्रेशन मिला और ना ही संचालक.

Intro:रीवा शहर में संचालित बहु प्रतिष्ठित अग्रवाल नर्सिंग होम के डॉ अरुण अग्रवाल के खिलाफ जिला न्यायालय में परिवाद दायर हो चुका है आपको बता दे कि कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव को नर्सिंग होम के खिलाफ घर में अवैध रूप से सोनोग्राफी मशीन लगाकर गुप्त रूप से लिंग परीक्षण करने की शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर के निर्देश में स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने अपनी एक महिला सब इंस्पेक्टर को लिंग परीक्षण करने भेजा था जिसके बाद डॉक्टर रंगे हाथ पकड़ा गया था



Body:अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉ अरुण अग्रवाल द्वारा बगल में ही बने अपने घर के कमरे में लिंग परीक्षण करते थे जब की कार्यवाही कर रही टीम ने बताया था कि हर सोनोग्राफी मशीन का रजिस्ट्रेशन भाव से चलाने वाले का रजिस्ट्रेशन कलेक्ट्रेट से होता है लेकिन जांच के दौरान न तो मशीन का रजिस्ट्रेशन मिला और ना ही संचालक जिसके प्रसव पूर्व निसंतान तकनीकी 1994 के तहत कार्यवाही की गई और मशीन को जप्त कर लिया गया था।

वहीं इस मामले को लेकर आज जिला न्यायालय में सचिन द्विवेदी विशेष लोक अभियोजक जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा द्वारा बताया गया कि अग्रवाल नर्सिंग होम डॉक्टर अरुण अग्रवाल के खिलाफ लगातार जिला कलेक्टर को शिकायत प्राप्त हो रही थी कि अरुण अग्रवाल द्वारा उनके निवास में वह अवैध रूप से लिंग परीक्षण कर गर्भपात कराते हैं लोक अभियोजक अधिकारी ने बताया कि इसके पहले भी कई बार टीम ने कार्यवाही की थी लेकिन इस पर अप्रत्याशित परिणाम नहीं मिला जिसके बाद कलेक्टर ने कहा कि पहले गोपनीय शिकायत का सत्यापन करते हैं इसके बाद निर्णय लिया जाएगा

पूर्व में टीम गठित कर ट्रैप आयोजित करने पर ₹6000 लेकर एक गर्भवती महिला सब इंस्पेक्टर को भेजा गया था जिसके बाद डॉक्टर द्वारा महिला सब इंस्पेक्टर का लिंग परीक्षण कर परिणाम बताने के बाद उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया गया था जिसके बाद कलेक्टर द्वारा डीपीओ कार्यालय को परिवाद वाद दायर करने के लिए प्रस्तुत किया था जिसके बाद मामले की विधि स्थिति को देखते हुए पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 3,6 धारा 22 धारा 18 और धारा 23 के अंतर्गत परिवारवाद आज सीजेएम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है


Conclusion:बता दे कि अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डॉ अरुण अग्रवाल के ऊपर लिंग परीक्षण करने के आरोप कई बार लग चुके थे लेकिन यह मामला आज तक कोर्ट नहीं पहुंचा वह इस तरह के मामले भी कभी कोर्ट तक नहीं आ पाते थे लेकिन सेम रीवा कलेक्टर के इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद यह मामला पहली बार रीवा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है ऐसा माना जा रहा है कि इस लिंग परीक्षण के मामले में नर्सिंग होम और उसके संचालक के ऊपर कठोर कार्यवाही हो सकती है।

बाइट: सचिन द्विवेदी, विशेष लोक अभियोजक, जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा।
Last Updated : Aug 9, 2019, 2:57 PM IST
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