जबलपुर। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने नई रेत नीति 2019 लागू की है. जिसके प्रावधानों को कटघरे में खड़ा करते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि नई रेत नीति 2019 के प्रावधानों के तहत रेत भंडारण और बेचने के लिए दिए गए लाइसेंस जीरो घोषित कर दिए गए हैं. मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जबाव तलब किया है.
पीड़ित ने कोर्ट को बताया है कि उसका क्या कुसूर है, जो उसका लाइसेंस रद कर दिया गया है. आवेदक का कहना है कि रेत नीति 2018 के प्रावधानों के तहत रेत भंडारण के लिए 5 साल और रेत बेचने के लिए 3 साल की अवधि के लिए लाइसेंस दिए गए थे, जिसे नई रेत नीति 2019 के नियम 17 (1) व 18 (1) के तहत शून्य घोषित कर दिया गया है.
याचिककर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि जब कानूनन ये लाइसेंस दिए गए हैं, तब उन्हें अचानक रद कर दिया गया, जोकि संवैधानिक हैं. याचिकाकर्ता कई ट्रक रेत की खरीददारी रॉयल्टी जमा करने के बाद की है. ऐसे में उसका लाइसेंस रद कर दिया गया है.
इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई एक नबंवर को तय की गयी है.