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जबलपुर नगर निगम का बजट सत्र बना मजाक, कैंडी क्रश खेलते नजर आए पार्षद, अधिकारी रहे गायब - जबलपुर नगर निगम का बजट सत्र

जबलपुर में नगर निगम के बजट सत्र का पार्षदों और अधिकारियों ने मजाक बना दिया. भाजपा के धनवंतरी नगर से पार्षद मोबाइल पर कैंडी क्रश खेलते हुए नजर आए तो वहीं कई पार्षद मोबाइल पर अपना पर्सनल काम निपटाते दिखे. बजट पर भाषण के दौरान कई अधिकारी नदारद रहे.

jabalpur municipal budget session
जबलपुर नगर निगम का बजट सत्र बना मजाक
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Published : Apr 14, 2023, 4:55 PM IST

Updated : Apr 14, 2023, 5:03 PM IST

कैंडी क्रश खेलते नजर आए पार्षद

जबलपुर। नगर निगम में इन दिनों बजट पर बहस सत्र चल रहा है. इस दौरान जबलपुर नगर निगम के लिए आने वाले साल में 1400 करोड़ रूपया खर्च करने की योजना बनाई जा रही है. इसमें सभी पार्षद अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं. शहर विकास के लिए यह एक बेहद जरूरी बहस मानी जाती है. लेकिन इस दौरान बजट बहस में हिस्सा लेने वाले कई पार्षदों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक रहा. जब सदन का ही कोई दूसरा सदस्य बजट के किसी अहम मुद्दे पर आपत्ति या समर्थन दिखा रहा था, तब कुछ पार्षद मोबाइल पर गेम खेल रहे थे. इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के पार्षद शामिल हैं.

कैंडी क्रश खेलते नजर आए भाजपा पार्षद: भारतीय जनता पार्टी के धनवंतरी नगर से पार्षद मोबाइल पर कैंडी क्रश खेलते हुए नजर आए. वहीं नेपालगंज के पार्षद मोबाइल पर अपना पर्सनल काम निपटाते दिखे. कई महिला पार्षद बजट भाषण के दौरान सेल्फी लेती दिखाई दीं तो बहुत से पार्षद बजट भाषण के दौरान मोबाइल पर बात करते रहे. इधर बजट सत्र पर भाषण के दौरान अधिकारी भी गायब रहे.

अधिकारी रहे नदारद: वहीं, दूसरी आपत्तिजनक बात यह सामने आई कि नगर निगम के बजट सत्र का सबसे ज्यादा मखोल नगर निगम के अधिकारी उड़ा रहे हैं. जिस दौरान नगर निगम के पार्षद बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे उस दौरान सदन में अधिकारियों के बैठने की जगह पूरी तरह से खाली थी कोई भी अधिकारी सदन में मौजूद नहीं था. इसी विषय पर आपत्ति लेते हुए नगर निगम प्रतिपक्ष के नेता कमलेश अग्रवाल ने कहा कि ''यह चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपमान है और शहर विकास में बाधा है. क्योंकि यदि कोई पार्षद बजट के प्रावधान में कोई परिवर्तन करवाना चाहता है तो इस परिवर्तन को अंजाम अधिकारियों के माध्यम से ही दिया जाता है, लेकिन यदि बहस के दौरान अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो इसका फायदा जनता को कैसे मिलेगा.''

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जबलपुर पिछड़े शहरों में शामिल: जबलपुर अभी भी देश के कुछ पिछड़े हुए शहरों में है. शहरी इलाके में कुछ ग्रामीण इलाके जोड़े गए हैं. उनकी स्थिति बहुत ज्यादा बदतर है और नगर निगम के भरोसे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैठे हुए हैं. ऐसे में यदि अधिकारियों और नेताओं ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया तो इन लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा.

कैंडी क्रश खेलते नजर आए पार्षद

जबलपुर। नगर निगम में इन दिनों बजट पर बहस सत्र चल रहा है. इस दौरान जबलपुर नगर निगम के लिए आने वाले साल में 1400 करोड़ रूपया खर्च करने की योजना बनाई जा रही है. इसमें सभी पार्षद अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं. शहर विकास के लिए यह एक बेहद जरूरी बहस मानी जाती है. लेकिन इस दौरान बजट बहस में हिस्सा लेने वाले कई पार्षदों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक रहा. जब सदन का ही कोई दूसरा सदस्य बजट के किसी अहम मुद्दे पर आपत्ति या समर्थन दिखा रहा था, तब कुछ पार्षद मोबाइल पर गेम खेल रहे थे. इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के पार्षद शामिल हैं.

कैंडी क्रश खेलते नजर आए भाजपा पार्षद: भारतीय जनता पार्टी के धनवंतरी नगर से पार्षद मोबाइल पर कैंडी क्रश खेलते हुए नजर आए. वहीं नेपालगंज के पार्षद मोबाइल पर अपना पर्सनल काम निपटाते दिखे. कई महिला पार्षद बजट भाषण के दौरान सेल्फी लेती दिखाई दीं तो बहुत से पार्षद बजट भाषण के दौरान मोबाइल पर बात करते रहे. इधर बजट सत्र पर भाषण के दौरान अधिकारी भी गायब रहे.

अधिकारी रहे नदारद: वहीं, दूसरी आपत्तिजनक बात यह सामने आई कि नगर निगम के बजट सत्र का सबसे ज्यादा मखोल नगर निगम के अधिकारी उड़ा रहे हैं. जिस दौरान नगर निगम के पार्षद बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे उस दौरान सदन में अधिकारियों के बैठने की जगह पूरी तरह से खाली थी कोई भी अधिकारी सदन में मौजूद नहीं था. इसी विषय पर आपत्ति लेते हुए नगर निगम प्रतिपक्ष के नेता कमलेश अग्रवाल ने कहा कि ''यह चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपमान है और शहर विकास में बाधा है. क्योंकि यदि कोई पार्षद बजट के प्रावधान में कोई परिवर्तन करवाना चाहता है तो इस परिवर्तन को अंजाम अधिकारियों के माध्यम से ही दिया जाता है, लेकिन यदि बहस के दौरान अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो इसका फायदा जनता को कैसे मिलेगा.''

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जबलपुर पिछड़े शहरों में शामिल: जबलपुर अभी भी देश के कुछ पिछड़े हुए शहरों में है. शहरी इलाके में कुछ ग्रामीण इलाके जोड़े गए हैं. उनकी स्थिति बहुत ज्यादा बदतर है और नगर निगम के भरोसे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैठे हुए हैं. ऐसे में यदि अधिकारियों और नेताओं ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया तो इन लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा.

Last Updated : Apr 14, 2023, 5:03 PM IST
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