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ये दिवाली ग्रीन पटाखे वाली, SC और NGT के निर्देश पर बिक रहे कम प्रदूषण वाले पटाखे - बिक रहे कम प्रदूषण वाले पटाखे

देश में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस बार ग्रीन पटाखे बाजार में आए हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर पहली बार दीपावली पर ग्रीन पटाखे ही चलाने के आदेश दिए गए हैं. ग्रीन पटाखे जलने के बाद सामान्य पटाखों की तुलना में 40-50 फ़ीसदी तक कम नाइट्रोजन और सल्फर का उत्सर्जन करते हैं, हालांकि इनकी क्वालिटी एवं शोर पहले जैसा ही है.

Low pollution green crackers being sold on instructions of SC and NGT
SC और NGT के निर्देश पर बिक रहे कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे
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Published : Nov 1, 2021, 12:29 PM IST

इंदौर। देश में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस बार ग्रीन पटाखे बाजार में आए हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर पहली बार दीपावली पर ग्रीन पटाखे ही चलाने के आदेश दिए गए हैं, यही वजह है कि देशभर के पटाखा बाजारों में इस बार ग्रीन पटाखे बिक रहे हैं. ये ग्रीन पटाखे जलने के बाद सामान्य पटाखों की तुलना में 40-50 फ़ीसदी तक कम नाइट्रोजन और सल्फर का उत्सर्जन करते हैं, हालांकि इनकी क्वालिटी एवं शोर पहले जैसा ही है. लेकिन यह स्वास्थ्य की दृष्टि से कम हानिकारक रहेंगे. मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के आतिशबाजी बाजारों में भी इस बार ग्रीन पटाखे ही बिक रहे हैं. ग्रीन पटाखे आम पटाखों से महंगे हैं और प्रदूषण रोकने के लिहाज से इसे प्राथमिकता दी जा रही है.

SC और NGT के निर्देश पर बिक रहे कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे


क्यों खास है ग्रीन पटाखे
देश के विभिन्न बाजारों में इस बार राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) द्वारा विकसित फार्मूले के तहत तैयार ग्रीन पटाखे ही बेचे जा रहे हैं. नीरी ने 4 तरह के ग्रीन पटाखे का फार्मूला विकसित किया था. जिनमें सेव वाटर रिलीजर, स्टार क्रेकर, सेफल पटाखे, और अरोमा क्रैकर्स मुख्य हैं .सेव वाटर जलने के बाद पानी जैसे कारण उत्पन्न करेंगे, जिसमें हानिकारक गैसें मौके पर ही धूल जाएंगी, इसके अलावा स्टार क्रेकर में एक खास तरह का केमिकल उपयोग किया गया है जो ऑक्सिडाइजिंग एजेंट का काम करेगा. जबकि सफल पटाखे में 50 से 60 फीसदी कम एलमुनियम का उपयोग किया गया है. इसी तरह अरोमा क्रैकर्स में हानिकारक गैसें कम उत्पन्न होगी और यह खुशबू भी देंगे. जबकि पहले जो पटाखे बिकते थे उसमें बड़ी मात्रा में मौजूद बेरियम नाइट्रेट वायु प्रदूषण का कारण बनता था जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी घातक माना जाता है.

दीपावली से पहले फूटा महंगाई बम, कॉमर्शि‍यल LPG सिलेंडर के दाम में ₹266 की बढ़त

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ग्रीन क्रैकर्स

दरअसल साल भर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए आदेश जारी किया था. जिसमें देश की तमाम आतिशबाजी इकाइयों को निर्देश दिए थे कि आगामी दीपावली पर ग्रीन पटाखे ही बेचे जाएं. इसके बाद से ही ग्रीन पटाखे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ एनजीटी आदेश के तहत ग्रीन पटाखे बेचने की हिदायत दी गई है.

अब आतिशबाजी उद्योग भी सरकार की निगरानी में
दरअसल पहली बार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने शिवाकाशी के आतिशबाजी उद्योग को भी ग्रीन पटाखों के माध्यम से नियंत्रण के दायरे में लाया है. आतिशबाजी तैयार करने के नए नियम बनाए जाने से असंगठित रूप से चलने वाली आतिशबाजी निर्माण की इकाइयों को भी अब लाइसेंस लेना होगा, इसके अलावा ग्रीन पटाखे के लिए पहले भारत सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकृत फार्मूले के अधीन ही आतिशबाजी का निर्माण करना होगा. इसके अलावा अब आतिशबाजी तैयार करने में ग्रीन पटाखे की फार्मूले के उपयोग के बाद संबंधित सरकारी एजेंसी से बाकायदा लाइसेंस लेना होगा.

इस बार कम होगी आतिशबाजी
दरअसल कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते आतिशबाजी व्यापारियों ने आतिशबाजी की तुलनात्मक रूप से कम खरीदी की है. इसके अलावा बड़े पैमाने पर आतिशबाजी तैयार करने वाली कई फैक्ट्री ग्रीन पटाखे बनाने की बाध्यता के चलते सील की गई है. ऐसी स्थिति में जो उत्पादन हुआ है वह कई राज्यों में काफी कम साबित हो रहा है, इसके अलावा इस बार बड़ी संख्या लोगों की कोरोना से मृत्यु होने के कारण पहली दीपावली में सिर्फ रस्म के लिहाज से फुलझड़ी-चकरी और अनार ही जलाए जा सकेंगे. इंदौर में ही हर साल आतिशबाजी का करीब दो करोड़ का कारोबार होता है जो इस बार 50 से 60 फ़ीसदी पर ही सिमट जाने के आसार हैं.

इंदौर। देश में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस बार ग्रीन पटाखे बाजार में आए हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर पहली बार दीपावली पर ग्रीन पटाखे ही चलाने के आदेश दिए गए हैं, यही वजह है कि देशभर के पटाखा बाजारों में इस बार ग्रीन पटाखे बिक रहे हैं. ये ग्रीन पटाखे जलने के बाद सामान्य पटाखों की तुलना में 40-50 फ़ीसदी तक कम नाइट्रोजन और सल्फर का उत्सर्जन करते हैं, हालांकि इनकी क्वालिटी एवं शोर पहले जैसा ही है. लेकिन यह स्वास्थ्य की दृष्टि से कम हानिकारक रहेंगे. मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के आतिशबाजी बाजारों में भी इस बार ग्रीन पटाखे ही बिक रहे हैं. ग्रीन पटाखे आम पटाखों से महंगे हैं और प्रदूषण रोकने के लिहाज से इसे प्राथमिकता दी जा रही है.

SC और NGT के निर्देश पर बिक रहे कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे


क्यों खास है ग्रीन पटाखे
देश के विभिन्न बाजारों में इस बार राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) द्वारा विकसित फार्मूले के तहत तैयार ग्रीन पटाखे ही बेचे जा रहे हैं. नीरी ने 4 तरह के ग्रीन पटाखे का फार्मूला विकसित किया था. जिनमें सेव वाटर रिलीजर, स्टार क्रेकर, सेफल पटाखे, और अरोमा क्रैकर्स मुख्य हैं .सेव वाटर जलने के बाद पानी जैसे कारण उत्पन्न करेंगे, जिसमें हानिकारक गैसें मौके पर ही धूल जाएंगी, इसके अलावा स्टार क्रेकर में एक खास तरह का केमिकल उपयोग किया गया है जो ऑक्सिडाइजिंग एजेंट का काम करेगा. जबकि सफल पटाखे में 50 से 60 फीसदी कम एलमुनियम का उपयोग किया गया है. इसी तरह अरोमा क्रैकर्स में हानिकारक गैसें कम उत्पन्न होगी और यह खुशबू भी देंगे. जबकि पहले जो पटाखे बिकते थे उसमें बड़ी मात्रा में मौजूद बेरियम नाइट्रेट वायु प्रदूषण का कारण बनता था जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी घातक माना जाता है.

दीपावली से पहले फूटा महंगाई बम, कॉमर्शि‍यल LPG सिलेंडर के दाम में ₹266 की बढ़त

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ग्रीन क्रैकर्स

दरअसल साल भर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए आदेश जारी किया था. जिसमें देश की तमाम आतिशबाजी इकाइयों को निर्देश दिए थे कि आगामी दीपावली पर ग्रीन पटाखे ही बेचे जाएं. इसके बाद से ही ग्रीन पटाखे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ एनजीटी आदेश के तहत ग्रीन पटाखे बेचने की हिदायत दी गई है.

अब आतिशबाजी उद्योग भी सरकार की निगरानी में
दरअसल पहली बार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने शिवाकाशी के आतिशबाजी उद्योग को भी ग्रीन पटाखों के माध्यम से नियंत्रण के दायरे में लाया है. आतिशबाजी तैयार करने के नए नियम बनाए जाने से असंगठित रूप से चलने वाली आतिशबाजी निर्माण की इकाइयों को भी अब लाइसेंस लेना होगा, इसके अलावा ग्रीन पटाखे के लिए पहले भारत सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकृत फार्मूले के अधीन ही आतिशबाजी का निर्माण करना होगा. इसके अलावा अब आतिशबाजी तैयार करने में ग्रीन पटाखे की फार्मूले के उपयोग के बाद संबंधित सरकारी एजेंसी से बाकायदा लाइसेंस लेना होगा.

इस बार कम होगी आतिशबाजी
दरअसल कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते आतिशबाजी व्यापारियों ने आतिशबाजी की तुलनात्मक रूप से कम खरीदी की है. इसके अलावा बड़े पैमाने पर आतिशबाजी तैयार करने वाली कई फैक्ट्री ग्रीन पटाखे बनाने की बाध्यता के चलते सील की गई है. ऐसी स्थिति में जो उत्पादन हुआ है वह कई राज्यों में काफी कम साबित हो रहा है, इसके अलावा इस बार बड़ी संख्या लोगों की कोरोना से मृत्यु होने के कारण पहली दीपावली में सिर्फ रस्म के लिहाज से फुलझड़ी-चकरी और अनार ही जलाए जा सकेंगे. इंदौर में ही हर साल आतिशबाजी का करीब दो करोड़ का कारोबार होता है जो इस बार 50 से 60 फ़ीसदी पर ही सिमट जाने के आसार हैं.

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