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सहकारी शुगर कारखाना अस्थायी रूप से बंद, अब लिक्विडेटर के जरिए होगा कर्मचारियों का लंबित भुगतान - ग्वालियर न्यूज

मुरैना की पहचान रहा कैलारस सहकारी शुगर मिल कारखाना अस्थायी रूप से बंद हो चुका है. उसके कर्मचारियों को उनके लंबित भुगतान और रिटायरमेंट ड्यूज के लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है.

सहकारी शुगर कारखाना अस्थाई रूप से बंद
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Published : Oct 23, 2019, 3:27 PM IST

Updated : Oct 24, 2019, 2:55 PM IST

ग्वालियर। मुरैना की पहचान रहा कैलारस का सहकारी शुगर मिल कारखाना अस्थायी रूप से बंद हो चुका है. उसके कर्मचारियों को उनके लंबित भुगतान और रिटायरमेंट ड्यूज के लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है. जिसपर कलेक्टर प्रियंका दास ने हाईकोर्ट में जवाब पेश किया है.

सहकारी शुगर कारखाना अस्थायी रूप से बंद

दरअसल कैलारस सहकारी शुगर मिल कारखाना लंबे अरसे से बंद है. इसे शुरू कराने की सभी कोशिशें असफल हो चुकी हैं. ऐसे में सरकार के पास इसे बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. इसके लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है. जिसके जरिए मिल और उसकी संपत्ति को बेचकर कर्मचारियों का भुगतान किया जाएगा. गौरतलब है कि कर्मचारियों ने अपने लंबित भुगतान को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस पर हाईकोर्ट ने मुरैना जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया था.

इस सिलसिले में मुरैना कलेक्टर प्रियंका दास को हाई कोर्ट ने तलब भी किया. प्रियंका दास ने कोर्ट को बताया है कि लिक्विडेटर के जरिए सभी कर्मचारियों का भुगतान कराया जाएगा. जिसमें कुछ समय लग सकता है. इस कारखाने में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे. जिनका करीब लगभग 15 से 20 करोड़ रुपया बकाया है.

ग्वालियर। मुरैना की पहचान रहा कैलारस का सहकारी शुगर मिल कारखाना अस्थायी रूप से बंद हो चुका है. उसके कर्मचारियों को उनके लंबित भुगतान और रिटायरमेंट ड्यूज के लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है. जिसपर कलेक्टर प्रियंका दास ने हाईकोर्ट में जवाब पेश किया है.

सहकारी शुगर कारखाना अस्थायी रूप से बंद

दरअसल कैलारस सहकारी शुगर मिल कारखाना लंबे अरसे से बंद है. इसे शुरू कराने की सभी कोशिशें असफल हो चुकी हैं. ऐसे में सरकार के पास इसे बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. इसके लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है. जिसके जरिए मिल और उसकी संपत्ति को बेचकर कर्मचारियों का भुगतान किया जाएगा. गौरतलब है कि कर्मचारियों ने अपने लंबित भुगतान को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस पर हाईकोर्ट ने मुरैना जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया था.

इस सिलसिले में मुरैना कलेक्टर प्रियंका दास को हाई कोर्ट ने तलब भी किया. प्रियंका दास ने कोर्ट को बताया है कि लिक्विडेटर के जरिए सभी कर्मचारियों का भुगतान कराया जाएगा. जिसमें कुछ समय लग सकता है. इस कारखाने में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे. जिनका करीब लगभग 15 से 20 करोड़ रुपया बकाया है.

Intro:ग्वालियर
एक समय मुरैना की पहचान रहा कैलारस का सहकारी शुगर मिल कारखाना अस्थाई रूप से बंद हो चुका है। उसके कर्मचारियों को उनके लंबित भुगतान और रिटायरमेंट ड्यूज के लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है। हाईकोर्ट में इस तरह का जवाब मुरैना जिला प्रशासन ने पेश किया है।


Body: दरअसल कैलारस सहकारी शुगर मिल कारखाना लंबे अरसे से बंद है ऐसे चालू कराने की सभी कोशिशें असफल हो चुकी हैं ऐसे में सरकार के पास इसको बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है ।इसके लिए परिसमापक यानी लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है जिसके जरिए मिल और उसकी संपत्ति को बेचकर कर्मचारियों का भुगतान किया जाएगा ।गौरतलब है कि कर्मचारियों ने अपने लंबित भुगतान को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और अविलंब अपने भुगतान कराने की मांग की थी इस पर हाईकोर्ट ने मुरैना जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया था।


Conclusion:इस सिलसिले में मुरैना कलेक्टर प्रियंका दास की पेशी भी हुई थी प्रियंका दास ने कोर्ट को बताया है कि लिक्विडेटर के जरिए सभी कर्मचारियों का भुगतान कराया जाएगा जिसमें कुछ समय लग सकता है। इस कारखाने में करीब डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे जिनका करीब लगभग 15 से 20 करोड़ रुपया कारखाने पर बकाया है।
बाइट अंकुर मोदी अतिरिक्त महाधिवक्ता हाई कोर्ट ग्वालियर
Last Updated : Oct 24, 2019, 2:55 PM IST
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