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डबल महंगाई, आधी कमाई! कैसे पूरा होगा दोगुनी आय का वादा, डीजल के बाद खाद के बढ़े दाम - एमपी में खाद के दाम बढ़े

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने एनपीके (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) खाद की कीमत बढ़ा (Fertilizer Rate Increased) दी है. खाद में 515 रुपये से लेकर 320 रुपये की वृद्धि की गई है. ये वृद्धि प्रति पचास किलोग्राम की बोरी में की गई है. डीएपी की कीमत प्रति बोरी एक हजार 211 रुपये यथावत रहेगी. नई दरें एक अक्टूबर से लागू होंगी.

fertilizers rate increased
खाद के दाम बढ़ने से टूटी किसानों की कमर
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Published : Sep 23, 2021, 9:25 PM IST

भोपाल। मोदी सरकार (Modi Government) किसानों की आय दोगुना करने की वादा कर चुकी है. इसके लिए कई योजनाओं की तैयारी हो रही है. लेकिन एमपी सरकार केन्द्र के वादे को तोड़ने का पूरा इंतजाम कर रही है. एमपी सरकार ने खाद के दाम पढ़ा(Fertilizer Rate Increased) दिए हैं. महंगे डीजल की मार झेल रहे किसानों के लिए अब महंगी खाद के बोझ से उठना काफी मुश्किल हो रहा है. नई दरें एक अक्टूबर से लागू होंगी.

fertilizers rate increased
डीजल के बाद खाद के बढ़े दाम

डीजल के बाद खाद भी महंगी

वैसे तो अन्नदाता बुरा वक्त हमेशा से झेलता रहा है. अब एक बार फिर मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) ने एनपीके (नाइट्रोजन,फास्फोरस और पोटेशियम) खाद की कीमत बढ़ा दी है. अलग-अलग श्रेणी की खाद में 50 किलो की बोरी पर 320 रुपए से लेकर 515 रुपए बढ़ा दिए गए हैं. डीएपी की कीमत नहीं बढ़ाई गई है. ये प्रति बोरी 1211 रुपए पहले की तरह ही रहेगी.

320 रुपए से 515 रुपए तक महंगी हुई खाद

मध्य प्रदेश में रबी सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों के दाम बढ़ा (Fertilizer Rate Increased) दिए गए हैं. एनपीके (12,32,36) की कीमत प्रति बोरी 1700 रुपए कर दी गई है. इससे पहले इसकी प्रति बोरी कीमत 1185 रुपए थी. इसी तरह एनपीके(14,35,14) की एक बोरी की कीमत 1230 से बढ़ाकर 1550 रुपए कर दी गई है. जबकि अमोनियम फास्फेट सल्फेट की एक बोरी की कीमत 1050 रुपए से 1225 रुपए कर दी गई है.

डीजल के बाद खाद के दाम बढ़ने से किसान की टूटी कमर

किसानों के साथ अन्याय

खजूरी कला गांव के किसान मिश्रीलाल राजपूत का कहना है कि खाद की कीमतें बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है. 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के बजाए सरकार किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है. डीजल और बीज पहले से ही महंगे हो चुके हैं. अब खाद महंगी (Fertilizer Rate Increased) होने से किसान की कमर ही टूट जाएगी. अगर डीजल, बीज,खाद महंगे हो गए हैं, तो सरकार को किसानों की फसलों की कीमत भी दोगुना करनी चाहिए.

'किसानों की आय बढ़ानी है तो खाद सस्ती करनी चाहिए'

कम कीमत में उपलब्ध हो खाद

कृषि के जानकार डॉक्टर जीएस कौशल का कहना है कि वैसे तो जैविक खाद ही सबसे अच्छी होती है. लेकिन इसकी उपलब्धता कम होती है. इसलिए रसायनिक खाद आज की जरूरत है. अगर रसायनिक खादों की कीमत बढ़ेगी (Fertilizer Rate Increased) तो किसानों की लागत बढ़ेगी. इसलिए खाद की कीमत बढ़ाना ठीक नहीं है. वैसे किसानों को खेती में संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. अगर सरकार किसान को फायदा पहुंचाना चाहती है तो खाद की कीमतों को कम रखना होगा, नहीं तो उत्पादन पर असर पड़ेगा. डॉक्टर कौशल का कहना है कि जिस तरह डीएपी की कीमतों को नहीं बढ़ाया गया है, उसी तरह सरकार को एनपीके और अमोनियम फास्फेट सल्फेट की कीमत पर पुनर्विचार करना चाहिए.

'बैकडोर से किसानों को बर्बाद करने की साजिश'
बैकडोर से बढ़ रही लागत

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के सदस्य और किसान राहुल राज का आरोप है कि सरकार पिछले दरवाजे से दाम बढ़ाकर (Fertilizer Rate Increased) किसानों को कमजोर कर रही है. किसानों के लिए बैकडोर से लागत बढ़ाने का काम सरकार कर रही है. बिजली,डीजल और दूसरे कृषि उपकरण पहले से ही महंगे हो चुके हैं. अब खाद महंगी होने से किसान पूरी तरह से टूट चुके हैं. पहले से ही आज की पीढ़ी खेती से दूर भाग रही है. राहुल राज का आरोप है कि इस तरह खेती पर भी कार्पोरेट कंपनियों का राज हो जाएगा. छोटे किसान बाहर हो जाएंगे.

fertilizers rate increased
जैविक खाद अच्छा विकल्प है, लेकिन बड़े स्केल पर उत्पादन चाहिए

किसानों पर आर्थिक बोझ

खाद महंगी करने को कांग्रेस ने भी गलत बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने खाद के दाम बढ़ाए (Fertilizer Rate Increased) जाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा. पहले ही किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों के दाम पढ़ने से फसल की लागत लगातार बढ़ रही है. किसानों की लागत कम करने की बजाए सरकार खाद के दाम बढ़ाकर किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है.


अन्नदाता का अधूरा सम्मान: 52 फीसदी किसानों तक नहीं पहुंची किसान सम्मान निधि योजना, सरकारी आंकड़ों ने खोली पोल


मार्कफेड राज्य में रासायनिक उर्वरक की खरीदी-बिक्री की सबसे बड़ी संस्था है. राज्य और मार्कफेड ने 2017-18 में 64.32 लाख मीट्रिक टन, 2018-19 में 72.95 लाख मीट्रिक टन, 2019-20 में 82.54 लाख मीट्रिक टन और 2020-21 में मार्च तक 80.27 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक की बिक्री की है.

भोपाल। मोदी सरकार (Modi Government) किसानों की आय दोगुना करने की वादा कर चुकी है. इसके लिए कई योजनाओं की तैयारी हो रही है. लेकिन एमपी सरकार केन्द्र के वादे को तोड़ने का पूरा इंतजाम कर रही है. एमपी सरकार ने खाद के दाम पढ़ा(Fertilizer Rate Increased) दिए हैं. महंगे डीजल की मार झेल रहे किसानों के लिए अब महंगी खाद के बोझ से उठना काफी मुश्किल हो रहा है. नई दरें एक अक्टूबर से लागू होंगी.

fertilizers rate increased
डीजल के बाद खाद के बढ़े दाम

डीजल के बाद खाद भी महंगी

वैसे तो अन्नदाता बुरा वक्त हमेशा से झेलता रहा है. अब एक बार फिर मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) ने एनपीके (नाइट्रोजन,फास्फोरस और पोटेशियम) खाद की कीमत बढ़ा दी है. अलग-अलग श्रेणी की खाद में 50 किलो की बोरी पर 320 रुपए से लेकर 515 रुपए बढ़ा दिए गए हैं. डीएपी की कीमत नहीं बढ़ाई गई है. ये प्रति बोरी 1211 रुपए पहले की तरह ही रहेगी.

320 रुपए से 515 रुपए तक महंगी हुई खाद

मध्य प्रदेश में रबी सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों के दाम बढ़ा (Fertilizer Rate Increased) दिए गए हैं. एनपीके (12,32,36) की कीमत प्रति बोरी 1700 रुपए कर दी गई है. इससे पहले इसकी प्रति बोरी कीमत 1185 रुपए थी. इसी तरह एनपीके(14,35,14) की एक बोरी की कीमत 1230 से बढ़ाकर 1550 रुपए कर दी गई है. जबकि अमोनियम फास्फेट सल्फेट की एक बोरी की कीमत 1050 रुपए से 1225 रुपए कर दी गई है.

डीजल के बाद खाद के दाम बढ़ने से किसान की टूटी कमर

किसानों के साथ अन्याय

खजूरी कला गांव के किसान मिश्रीलाल राजपूत का कहना है कि खाद की कीमतें बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है. 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के बजाए सरकार किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है. डीजल और बीज पहले से ही महंगे हो चुके हैं. अब खाद महंगी (Fertilizer Rate Increased) होने से किसान की कमर ही टूट जाएगी. अगर डीजल, बीज,खाद महंगे हो गए हैं, तो सरकार को किसानों की फसलों की कीमत भी दोगुना करनी चाहिए.

'किसानों की आय बढ़ानी है तो खाद सस्ती करनी चाहिए'

कम कीमत में उपलब्ध हो खाद

कृषि के जानकार डॉक्टर जीएस कौशल का कहना है कि वैसे तो जैविक खाद ही सबसे अच्छी होती है. लेकिन इसकी उपलब्धता कम होती है. इसलिए रसायनिक खाद आज की जरूरत है. अगर रसायनिक खादों की कीमत बढ़ेगी (Fertilizer Rate Increased) तो किसानों की लागत बढ़ेगी. इसलिए खाद की कीमत बढ़ाना ठीक नहीं है. वैसे किसानों को खेती में संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. अगर सरकार किसान को फायदा पहुंचाना चाहती है तो खाद की कीमतों को कम रखना होगा, नहीं तो उत्पादन पर असर पड़ेगा. डॉक्टर कौशल का कहना है कि जिस तरह डीएपी की कीमतों को नहीं बढ़ाया गया है, उसी तरह सरकार को एनपीके और अमोनियम फास्फेट सल्फेट की कीमत पर पुनर्विचार करना चाहिए.

'बैकडोर से किसानों को बर्बाद करने की साजिश'
बैकडोर से बढ़ रही लागत

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के सदस्य और किसान राहुल राज का आरोप है कि सरकार पिछले दरवाजे से दाम बढ़ाकर (Fertilizer Rate Increased) किसानों को कमजोर कर रही है. किसानों के लिए बैकडोर से लागत बढ़ाने का काम सरकार कर रही है. बिजली,डीजल और दूसरे कृषि उपकरण पहले से ही महंगे हो चुके हैं. अब खाद महंगी होने से किसान पूरी तरह से टूट चुके हैं. पहले से ही आज की पीढ़ी खेती से दूर भाग रही है. राहुल राज का आरोप है कि इस तरह खेती पर भी कार्पोरेट कंपनियों का राज हो जाएगा. छोटे किसान बाहर हो जाएंगे.

fertilizers rate increased
जैविक खाद अच्छा विकल्प है, लेकिन बड़े स्केल पर उत्पादन चाहिए

किसानों पर आर्थिक बोझ

खाद महंगी करने को कांग्रेस ने भी गलत बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने खाद के दाम बढ़ाए (Fertilizer Rate Increased) जाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा. पहले ही किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों के दाम पढ़ने से फसल की लागत लगातार बढ़ रही है. किसानों की लागत कम करने की बजाए सरकार खाद के दाम बढ़ाकर किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है.


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मार्कफेड राज्य में रासायनिक उर्वरक की खरीदी-बिक्री की सबसे बड़ी संस्था है. राज्य और मार्कफेड ने 2017-18 में 64.32 लाख मीट्रिक टन, 2018-19 में 72.95 लाख मीट्रिक टन, 2019-20 में 82.54 लाख मीट्रिक टन और 2020-21 में मार्च तक 80.27 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक की बिक्री की है.

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