हजारीबागः जिला के खिरगांव स्थित मुक्तिधाम में उत्साह के साथ विद्युत शवदाह गृह का निर्माण 2017 में कराया गया था. देश के तत्कालीन वित्त एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसका उद्घाटन किया था. लेकिन अब यह सिर्फ दिखावटी सामान बनकर रह गया है. अब इसे अपग्रेड कर गैस चेंबर लगाने की तैयारी चल रही है.
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भ्रष्टाचार हर जगह देखने को मिल जाता है. लेकिन मुक्तिधाम जहां हर एक व्यक्ति का जीवन का सफर समाप्त होता है वहां भी अगर भ्रष्टाचार दिखे तो यह माना जा सकता है कि व्यक्ति का नैतिक पतन हो गया है. हजारीबाग में लगभग दो करोड़ की लागत से विद्युत शवदाह गृह बनाया गया. लेकिन विद्युत शवदाह गृह भ्रष्टाचार की वेदी पर ऐसा चढ़ा कि अब वह कभी ठीक नहीं हो सकता. आलम यह है कि इस सिस्टम चालू करने के लिए गैस चेंबर बनाया जा रहा है, जहां एलपीजी गैस से शव जलाया जाएगा.
जो भी मुक्ति धाम आते हैं एक बार विद्युत शवदाह गृह की ओर टकटकी निगाह से जरूर देखते हैं. फिर कहते हैं कि शायद यह कभी शुरू ही नहीं हो पाएगा. लेकिन अब नगर निगम इस विद्युत शवदाह गृह को एलपीजी से चलाने के लिए कोशिश कर रही है ताकि पर्यावरण भी प्रदूषित ना हो और आम जनता को इसका लाभ मिले. लेकिन मुक्तिधाम में लकड़ी समेत अन्य व्यवस्था करने वाली भूतनाथ मंडली कहती है कि जब तक शुरू नहीं हो जाएगा, तब तक हम लोगों को विश्वास नहीं होगा.
हजारीबाग को 2017 में ही विद्युत शवदाह गृह बनाकर दिया गया. बड़े तामझाम के साथ तत्कालीन वित्त एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा नगर निगम की अध्यक्ष अंजली कुमारी समेत अन्य वार्ड पार्षदों ने इसका उद्घाटन भी किया. लेकिन यह सिर्फ और सिर्फ उद्घाटन तक ही सीमित रहा. यहां महज कुछ शव जल पाया, इसके बाद पूरा सिस्टम फेल हो गया.
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भूतनाथ मंडली जो लकड़ी समेत अन्य व्यवस्था मुक्तिधाम में करती है वह भी बताते हैं कि यह सिर्फ और सिर्फ कमीशनखोरी के कारण बर्बाद हो गया. सस्ता सामान लगाया गया, इस कारण पूरा मशीन ही खराब हो गया. जहां महज चार से पांच शव जलाया गया और वह भी पूरा जला नहीं. अंत में शव फिर से विद्युत शवदाह गृह से निकालकर लकड़ी में जाना पड़ा. ऐसे में भारी फजीहत भी हो गई.
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उनका कहना है कि यहां जनरेटर भी है लेकिन जनरेटर में तेल जलाकर शव जलाना काफी महंगा साबित होता है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति इसे उपयोग करना नहीं चाहता है. हजारीबाग में महज कुछ घंटे ही बिजली रहती है. इसके चैंबर को गर्म होने में 4 से 5 घंटा लगता है. ऐसे में यह विद्युत शवदाह गृह जब बनाया गया था उसी समय तय हो गया था किसका उपयोग भविष्य में नहीं होना है.
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मनोज गुप्ता समाज सेवी हैं और भूतनाथ मंडली के अध्यक्ष भी. उनका कहना है कि हम लोगों ने एक दर्जन शव भी नहीं जलाया और 10 लाख रुपया का बिजली बिल विभाग की ओर से भेज दिया गया. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि एक शव जलाने में 1 लाख रुपया औसतन लग गया. अब यह हम लोगों को जानकारी मिल रही है कि पूरे सिस्टम को गैस से चलाने की योजना है. इसे पूरा करने के लिए टेंडर भी किया जा रहा है. अब यह देखने वाली बात होगी कितना गैस सिलेंडर लगता है और उसके लिए क्या व्यवस्था होती है. वहीं उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब यहां भ्रष्टाचार होने नहीं दिया जाएगा.
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भूतनाथ मंडली के सचिव भी कहते हैं कि हम लोग को लकड़ी लाने में काफी परेशानी अब हो रही है. लकड़ी कटने से पर्यावरण प्रभावित होता है. हजारीबाग में लकड़ी नहीं मिल पा रहा है. इसलिए हम लोग ओड़िशा, बंगाल से लकड़ी मंगा रहे हैं. कुछ लकड़ियां स्थानीय टाल से भी ली जाती है. अगर विद्युत शवदाह गृह तैयार हो जाता है तो हम लोगों को आराम होता और पर्यावरण संरक्षण भी होता.
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अंतिम संस्कार करने के लिए यहां राम प्रसाद हमेशा दिखेंगे. इनके ही आग देने के बाद अंतिम संस्कार पूरा होता है. उनका कहना है कि प्रत्येक दिन यहां 1 से 2 शव जलता है. एक शव जलाने में लगभग 4 क्विंटल लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन संक्रमण काल के दौरान 30 से 35 शव प्रत्येक दिन जल रहे थे. हम लोग मुक्तिधाम से भी लकड़ी कोनार नदी भेजते थे. अगर विद्युत शवदाहगृह शुरू तो जाता तो हम लोगों को परेशानी नहीं होती.
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इस पूरे प्रकरण पर हजारीबाग नगर निगम की मेयर रोशनी तिर्की कहती हैं कि कोरोना काल के दौरान ही हम लोग शवदाह गृह को ठीक कराना चाहते थे. नगर निगम की बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि इसे अब गैस में परिवर्तित कर दिया जाए, इस बाबत टेंडर भी किया गया. एक कंपनी ने टेंडर लिया अभी लेकिन बाद में वह काम करने में असमर्थ बताया. अब फिर से टेंडर किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द व्यवस्था को शुरू किया जा सके. वह भी स्वीकार करती हैं कि इस पूरे विद्युत शवदाह गृह बनाने में भारी अनियमितता हुई है.
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कोरोना की दूसरे लहर में ही इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए कोशिश की जा रही थी. लेकिन अब तक दुरुस्त नहीं हो पायी. ऐसे में अब नगर निगम मुंबई की जिस कंपनी ने विद्युत शवदाह गृह बनाया था उस पर कार्रवाई करने के मूड में नजर आ रही है. यशवंत सिन्हा ने जो सपना देखा था कि हजारीबाग को हाई टेक करना है प्रदूषण मुक्त जिला बनाना है, आज उनका सपना धरा का धरा रह गया. नगर निगम अपनी संपत्ति को फिर से दुरुस्त करने की कोशिश में लग गई है. अब देखने वाली बात होगी कब तक गैस से चलने वाला शवदाह गृह तैयार हो पाता है या कमीशन के तले दबकर तो नहीं रह जाएगा.
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