शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला अंग्रेजों द्वारा बसाई गई थी. आज भी यहां पर मौजूद ज्यादातर इमारतें ब्रिटिश काल की बनी हुई हैं. दशकों पुरानी यह इमारतें अब अपने आखिरी पढ़ाव पर हैं. कई भवन ऐसे हैं जो गिरने की कगार पर हैं लेकिन फिर भी उन्हें खाली नहीं किया जा रहा. आंकड़ों की बात करें तो शहर के 150 भवन ऐसे हैं जिन्हें नगर निगम द्वारा असुरक्षित घोषित कर दिया गया है. असुरक्षित होने के बावजूद इन भवनों को तोड़ने या खाली करवाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही.
बरसात में इमारत गिरने का खतरा
बरसात का मौसम शुरू हो चुका है, ऐसे में असुरक्षित इमारतों और भवनों के गिरने का ज्यादा खतरा होता है. इमारत गिरने से न सिर्फ उसमें रहने वाले लोगों को हानि पहुंचती है बल्कि राहगीरों के लिए भी यह जानलेवा साबित होती हैं. शिमला शहर में सबसे ज्यादा असुरक्षित भवन लोअर बाजार, मिडिल बाजार, कृष्णा नगर में हैं. इस साल भी नगर निगम ने 30 भवनों का निरीक्षण कर उन्हें असुरक्षित घोषित कर दिया है. नगर निगम का कहना है कि समय-समय पर ऐसे भवनों की चेकिंग की जाती है जिनकी हालत खराब है.
लोग खाली नहीं करते असुरक्षित भवन
चेकिंग के बाद खतरे की घंटी बजाने वाले भवनों को असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है. इसके बावजूद अगर भवन को लोग खाली नहीं करते तो नोटिस का सहारा लिया जाता है. जब नोटिस को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है तो उस भवन का बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया जाता है. शिमला शहर में बरसात के दिनों में असुरक्षित भवन ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं. संजौली ढली बाईपास पर बीते दिनों एक बहुमंजिला भवन गिरा था. इसके अलावा लक्कड़ बाजार के पास भी भवन बरसात में गिरा था.
2021 में 30 भवन घोषित हुए असुरक्षित
लक्कड़ बाजार बस स्टैंड के पास भी भूस्खलन के कारण हादसा हुआ था. ऐसे हादसे होने के बाद भी नगर निगम की नींद नहीं खुल रही है. निगम केवल खानापूर्ति के लिए नोटिस जारी कर अपना पल्ला झाड़ देता है. नगर निगम की ओर से असुरक्षित भवनों को लेकर कमेटी बनाई है जिसके अध्यक्ष अतिरिक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज हैं. उनका कहना है कि शहर में असुरक्षित भवनों का हर साल निरीक्षक करते हैं. इसमें देखा जाता है कि इमारत रहने लायक है या नहीं. लोगों की शिकायतों पर भी टीम मौके पर जाती है. इस साल 30 के आसपास भवन असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं. इससे पहले भी कई भवनों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है.
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