बैजनाथ: उपमंडल में मंदिर शुक्रवार से खुलेंगे, क्योंकि मंदिरों को खोलने के बारे में अधिसूचना देर शाम जारी होने से आज क्षेत्र के धर्मिक स्थल नहीं खुले हैं. वहीं, मंदिर सहायुक्त एवं एसडीएम छवि नांटा, मंदिर अधिकारी एवं तहसीलदार पवन कुमार ने न्यास सदस्यों को इस संबंध में जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं.
मंदिर सहायुक्त छवि नांटा कहा कि श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक शिव मंदिर और बाबा काठक मंदिर के बाहर दो गेटों को खोला जाएगा, जिसमें से एक गेट से प्रवेश व दूसरे गेट से श्रद्धालुओं को वापस भेजा जाएगा. साथ ही प्रत्येक श्रद्धालु की थर्मल स्केनिंग व हाथों को सेनिटाइज करने के बाद मंदिर के मुख्य गेट में प्रवेश दिया जाएगा.
हालांकि भक्तों को गर्भ गृह में जाने की इजाजत नहीं होगी और ना मंदिरों में प्रसाद चढ़ाया जाएगा. उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक दर्शनों के लिए खुला रहेगा और तीन समय की आरती केवल पुजारी ही कर पाएंगे, लेकिन इस समय कोई भी भक्त मौजूद नहीं रहेगा.
एसडीएम छवि नांटा कहा कि 65 वर्ष या इससे ऊपर आयु के व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों का मंदिर में आना वर्जित है. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को मंदिर परिसर में सामाजिक दूरी का ख्याल रखना अनिवार्य होगा और मुंह पर मास्क पहना भी जरुरी है.
साथ ही उन्होंने कहा कि खुले में थूकने की सख्त मनाही है और खांसते-छींकते समय रुमाल या टिशू पेपर का प्रयोग जरुर करें. वहीं, अगर कोई एसओपी का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बता दें कि आज से पूरे प्रदेश में सभी धर्मिक स्थलों को खोला गया है, जिससे भक्तों ने सभी देवी-देवता के दर्शन लंबे अंतराल के बाद किए हैं. मंदिर खुलने से भक्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है. आज बैजनाथ से करीब 5 किलोमीटर दूर महाकाल मंदिर में भाद्रपद का अंतिम शनिवार मेला है, जिसके तहत स्थानीय प्रशासन तैयारियों में जुट गया है.
मंदिर सहायुक्त एवं एसडीएम बैजनाथ छवि नांटा ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देशों के बाद मंदिरों को खोलने की अधिसूचना जारी हुई है. स्थानीय प्रशासन की तैयारियों के बाद ही शुक्रवार को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मंदिर के कपाट खुलेंगे.
इसके अलावा भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से जारी एसओपी के तहत अंदर भीड़ जमा करने की मनाही है. साथ ही भजन-कीर्तन और प्रसाद बांटने व चढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. साथ ही कहा कि पिछले साल की भांति इस बार महाकाल में अंतिम शनिवार मेला नहीं मनाया जाएगा.
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