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कुवैत एयर बेस पर पहुंचे अमेरिकी सैन्य बल, देखें वीडियो - 28 एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स

इरान में हुए हवाई हमले से पहले अमेरिका के 28 एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स कूवैत पहुंच गए थे. रक्षा विभाग द्वार जारी फुटेज में इन सैनिकों को एयर पोर्ट उतरते दिखाया गया है.

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अमेरिकी एयर फोर्स
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Published : Jan 3, 2020, 2:54 PM IST

कुवैत : अमेरिकी सेना के 82 वें एयरबोर्न डिवीजन पैराट्रूपर्स गुरुवार को इरान में हुए हवाई हमले से एक दिन पहले कुवैत एयर बेस पर पहुंच गए थे.

रक्षा विभाग द्वारा जारी वीडियो फुटेज में अली अल सलेम एयर बेस पर परिवहन विमानों को उतरते दिखाया गया है.

अली अल सलेम एयर बेस पर पहुंते अमेरिकी पैराट्रूपर्स

सप्ताह भर पहले बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद लगभग 750 अमेरिकी सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात किया गया था.

पढ़ें- अमेरिकी सैनिकों ने ईरान के टॉप कमांडर को मार गिराया, व्हाइट हाउस ने की पुष्टि

पैराट्रूपर्स के इस क्षेत्र में पहुंचने के बाद पेंटागन ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आदेश पर इरान के शीर्ष कड्स फोर्स कमांडर जनरल कासेम सोलेमानी को मारे जाने की पुष्टी की.

कुवैत : अमेरिकी सेना के 82 वें एयरबोर्न डिवीजन पैराट्रूपर्स गुरुवार को इरान में हुए हवाई हमले से एक दिन पहले कुवैत एयर बेस पर पहुंच गए थे.

रक्षा विभाग द्वारा जारी वीडियो फुटेज में अली अल सलेम एयर बेस पर परिवहन विमानों को उतरते दिखाया गया है.

अली अल सलेम एयर बेस पर पहुंते अमेरिकी पैराट्रूपर्स

सप्ताह भर पहले बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद लगभग 750 अमेरिकी सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात किया गया था.

पढ़ें- अमेरिकी सैनिकों ने ईरान के टॉप कमांडर को मार गिराया, व्हाइट हाउस ने की पुष्टि

पैराट्रूपर्स के इस क्षेत्र में पहुंचने के बाद पेंटागन ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आदेश पर इरान के शीर्ष कड्स फोर्स कमांडर जनरल कासेम सोलेमानी को मारे जाने की पुष्टी की.

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सीडीएस रावत ने एयर डिफेंस कमांड के लिए दिए निर्देश



 (22:20) 



नई दिल्ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)| जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में कार्यभार संभालने के एक दिन बाद गुरुवार को तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए एयर डिफेंस कमांड स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान उन्होंने प्रस्ताव के लिए एक समय सीमा भी निर्धारित की। रक्षा मंत्रालय ने कहा, "इस प्रस्ताव की समय सीमा 30 जून, 2020 है।"



अब तक तीनों सेवाओं के बीच एक ही वायु रक्षा कमान (एयर डिफेंस कमांड) है। जनरल रावत की पहली प्राथमिकता भारत को किसी भी हवाई हमले से सुरक्षित करने के लिए वायु रक्षा कमान का गठन करना है।



भारतीय वायु सेना वायु रक्षा में एक प्रमुख भूमिका निभाती है, लेकिन भारतीय सेना के पास अपनी खुद की क्षेत्र वायु रक्षा प्रणाली है। वहीं भारतीय नौसेना के पास सबसे उन्नत और गतिशील वायु रक्षा प्रणाली है।



रावत ने 30 जून और 31 दिसंबर, 2020 तक तालमेल के लिए प्राथमिकताएं तय कीं।



सामान्य कार्य प्रणाली पर जोर देते हुए सीडीएस रावत ने निर्देश दिया कि सभी तीनों सेनाओं और तटरक्षक से परामर्श किया जाना चाहिए और उनके विचारों को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जाना चाहिए।



सीडीएस ने तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि सभी को वांछित परिणामों को पूरा करने और बेहतर विचार एवं सुझाव के साथ काम करना चाहिए।


Conclusion:
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