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इंडोनेशियाः चुनाव संपन्न, जोको को बढ़त, आसान भाषा में समझें यहां की चुनावी प्रक्रिया - प्रबोवो सुबियांतो

जोको विडिडो की पार्टी का नाम है पीडीआई -पी.  प्रबोवो सुबियांतो की पार्टी का नाम है जेरिंड्रा (ग्रेट इंडोनेशिया मूवमेंट पार्टी). पिछली बार 2014 में जोकोवी ने प्रबोवो को ही हराया था.

जोको विडिडो और प्रबोवो सुबियांतो. डिजाइन फोटो.
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Published : Apr 17, 2019, 2:15 PM IST

जकार्ता: इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और संसद का चुनाव समाप्त हो गया. कुछ घंटों बाद प्राथमिक तौर पर परिणाम आने की संभावना है. अंतिम परिणाम आने में समय लगेगा. दो प्रमुख उम्मीदवारों वर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो और पूर्व जनरल प्रबोवो सुबियांतो के बीच मुकाबला है. शुरुआती रुझानों में जोको आगे चल रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विडोडो का पलड़ा भारी है. वैसे, दोनों ही नेता संकीर्ण इस्लामिक लहर से प्रभावित हैं. इस मुद्दे पर दोनों के बीच रेस जैसी स्थिति है. दोनों ने चुनाव जीतने पर आर्थिक मदद का भरोसा दिया है.

लगभग 20 हजार प्रतिनिधियों (स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर) का चयन होना है. यह चुनाव ऐतिहासिक है. इसकी वजह ये है कि एक ही दिन में मतदाताओं ने राष्ट्रपति, संसद और स्थानीय चुनावों में हिस्सा लिया. 19.2 करोड़ मतदाता हैं.

कुल 2.45 लाख उम्मीदवारों ने इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई है.

चुनाव के मुख्य मुद्दे- चीनी निवेश, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था. दूसरे धर्म के लोगों के प्रति नीति भी एक मुद्दा है. मुस्लिम आबादी बहुमत में होने के बावजूद इंडोनेशिया ने इस्लाम को राज्य का धर्म घोषित नहीं किया है. हालांकि, हाल के दिनों में यहां भी कट्टर इस्लामिक शक्तियां मजबूत हुई हैं.

चीन के निवेश को लेकर कमोबेश दोनों ही पार्टियों का रूख समान है. चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा निवेशकर्ता है. इंडोनेशिया ने चीन के महत्वाकांक्षी बीआरआई का भी समर्थन किया है.

जोको को लेकर मुख्य विवाद चीन के प्रति उनकी नरमी है. चीन ने इंडोनेशिया के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है. लेकिन उतना विकास नहीं हुआ. इसके बदले इंडोनेशिया काफी कर्ज में भी आ गया है. इंडोनेशिया की कई सरकारी कंपनियां इसके चपेटे में आ गई हैं.

चुनाव शुरू होने से पहले ये आरोप लगा था कि मलेशिया ने विडिडो का पक्ष लिया है. मलेशिया में करीब 10 लाख इंडोनेशियाई रहते हैं. कुछ बैलेट मलेशिया में मिले थे. इसके बाद विवाद हो गया था.

प्रबोवो इंडोनेशिया के पूर्व तानाशाह जनरल सुहार्तो के दामाद हैं. प्रबोवो पर मानव अधिकार के उल्लंघन के मामले में सुहार्तो का साथ देने का आरोप है. हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं थे. उन्होंने चीन की निवेश नीति की समीक्षा करने की भी बात कही है.

पढ़ें-इंडोनेशिया चुनाव में मतदान जारी, राष्ट्रपति विडोडो ने भी किया मतदान

कट्टरवादी ताकतों की वजह से जकार्ता के गवर्नर अहोक पर ईशनिंदा का मुकदमा दर्ज किया गया था. उन्हें दो साल की सजा दी गई.

विडिडो ने मारुफ अमिन को अपना रनिंग मेट बनाया है.

प्रबोवो ने इस्लामिक नेताओं और इस्लामिक स्कूलों को आर्थिक मदद देने का वादा किया है.

इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी रहती है. करीब 26 करोड़ मुस्लिम लोग यहां रहते हैं. इंडोनेशिया में करीब 17 हजार छोटे-छोटे द्वीप है.

जकार्ता: इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और संसद का चुनाव समाप्त हो गया. कुछ घंटों बाद प्राथमिक तौर पर परिणाम आने की संभावना है. अंतिम परिणाम आने में समय लगेगा. दो प्रमुख उम्मीदवारों वर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो और पूर्व जनरल प्रबोवो सुबियांतो के बीच मुकाबला है. शुरुआती रुझानों में जोको आगे चल रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विडोडो का पलड़ा भारी है. वैसे, दोनों ही नेता संकीर्ण इस्लामिक लहर से प्रभावित हैं. इस मुद्दे पर दोनों के बीच रेस जैसी स्थिति है. दोनों ने चुनाव जीतने पर आर्थिक मदद का भरोसा दिया है.

लगभग 20 हजार प्रतिनिधियों (स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर) का चयन होना है. यह चुनाव ऐतिहासिक है. इसकी वजह ये है कि एक ही दिन में मतदाताओं ने राष्ट्रपति, संसद और स्थानीय चुनावों में हिस्सा लिया. 19.2 करोड़ मतदाता हैं.

कुल 2.45 लाख उम्मीदवारों ने इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई है.

चुनाव के मुख्य मुद्दे- चीनी निवेश, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था. दूसरे धर्म के लोगों के प्रति नीति भी एक मुद्दा है. मुस्लिम आबादी बहुमत में होने के बावजूद इंडोनेशिया ने इस्लाम को राज्य का धर्म घोषित नहीं किया है. हालांकि, हाल के दिनों में यहां भी कट्टर इस्लामिक शक्तियां मजबूत हुई हैं.

चीन के निवेश को लेकर कमोबेश दोनों ही पार्टियों का रूख समान है. चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा निवेशकर्ता है. इंडोनेशिया ने चीन के महत्वाकांक्षी बीआरआई का भी समर्थन किया है.

जोको को लेकर मुख्य विवाद चीन के प्रति उनकी नरमी है. चीन ने इंडोनेशिया के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है. लेकिन उतना विकास नहीं हुआ. इसके बदले इंडोनेशिया काफी कर्ज में भी आ गया है. इंडोनेशिया की कई सरकारी कंपनियां इसके चपेटे में आ गई हैं.

चुनाव शुरू होने से पहले ये आरोप लगा था कि मलेशिया ने विडिडो का पक्ष लिया है. मलेशिया में करीब 10 लाख इंडोनेशियाई रहते हैं. कुछ बैलेट मलेशिया में मिले थे. इसके बाद विवाद हो गया था.

प्रबोवो इंडोनेशिया के पूर्व तानाशाह जनरल सुहार्तो के दामाद हैं. प्रबोवो पर मानव अधिकार के उल्लंघन के मामले में सुहार्तो का साथ देने का आरोप है. हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं थे. उन्होंने चीन की निवेश नीति की समीक्षा करने की भी बात कही है.

पढ़ें-इंडोनेशिया चुनाव में मतदान जारी, राष्ट्रपति विडोडो ने भी किया मतदान

कट्टरवादी ताकतों की वजह से जकार्ता के गवर्नर अहोक पर ईशनिंदा का मुकदमा दर्ज किया गया था. उन्हें दो साल की सजा दी गई.

विडिडो ने मारुफ अमिन को अपना रनिंग मेट बनाया है.

प्रबोवो ने इस्लामिक नेताओं और इस्लामिक स्कूलों को आर्थिक मदद देने का वादा किया है.

इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी रहती है. करीब 26 करोड़ मुस्लिम लोग यहां रहते हैं. इंडोनेशिया में करीब 17 हजार छोटे-छोटे द्वीप है.

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इंडोनेशियाः चुनाव संपन्न, जोको को बढ़त, आसान भाषा में समझें यहां की चुनावी प्रक्रिया



जकार्ता: इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और संसद का चुनाव समाप्त हो गया. कुछ घंटों बाद प्राथमिक तौर पर परिणाम आने की संभावना है. अंतिम परिणाम आने में समय लगेगा. दो प्रमुख उम्मीदवारों वर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो और पूर्व जनरल प्रबोवो सुबियांतो के बीच मुकाबला है. शुरुआती रुझानों में जोको आगे चल रहे हैं. 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विडोडो का पलड़ा भारी है. वैसे, दोनों ही नेता संकीर्ण इस्लामिक लहर से प्रभावित हैं. इस मुद्दे पर दोनों के बीच रेस जैसी स्थिति है. दोनों ने चुनाव जीतने पर आर्थिक मदद का भरोसा दिया है. 

लगभग 20 हजार प्रतिनिधियों (स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर) का चयन होना है. यह चुनाव ऐतिहासिक है. इसकी वजह ये है कि एक ही दिन में मतदाताओं ने राष्ट्रपति, संसद और स्थानीय चुनावों में हिस्सा लिया. 19.2 करोड़ मतदाता हैं.

कुल 2.45 लाख उम्मीदवारों ने इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई है. 

जोको विडिडो की पार्टी का नाम है पीडीआई -पी.  प्रबोवो सुबियांतो की पार्टी का नाम है जेरिंड्रा (ग्रेट इंडोनेशिया मूवमेंट पार्टी). पिछली बार 2014 में जोकोवी ने प्रबोवो को ही हराया था. 

चुनाव के मुख्य मुद्दे- चीनी निवेश, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था. दूसरे धर्म के लोगों के प्रति नीति भी एक मुद्दा है. मुस्लिम आबादी बहुमत में होने के बावजूद इंडोनेशिया ने इस्लाम को राज्य का धर्म घोषित नहीं किया है. हालांकि, हाल के दिनों में यहां भी कट्टर इस्लामिक शक्तियां मजबूत हुई हैं. 

चीन के निवेश को लेकर कमोबेश दोनों ही पार्टियों का रूख समान है. चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा निवेशकर्ता है. इंडोनेशिया ने चीन के महत्वाकांक्षी बीआरआई का भी समर्थन किया है. 

जोको को लेकर मुख्य विवाद चीन के प्रति उनकी नरमी है. चीन ने इंडोनेशिया के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है. लेकिन उतना विकास नहीं हुआ. इसके बदले इंडोनेशिया काफी कर्ज में भी आ गया है. इंडोनेशिया की कई सरकारी कंपनियां इसके चपेटे में आ गई हैं. 

चुनाव शुरू होने से पहले ये आरोप लगा था कि मलेशिया ने विडिडो का पक्ष लिया है. मलेशिया में करीब 10 लाख इंडोनेशियाई रहते हैं. कुछ बैलेट मलेशिया में मिले थे. इसके बाद विवाद हो गया था.

प्रबोवो इंडोनेशिया के पूर्व तानाशाह जनरल सुहार्तो के दामाद हैं. प्रबोवो पर मानव अधिकार के उल्लंघन के मामले में सुहार्तो का साथ देने का आरोप है. हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं थे. उन्होंने चीन की निवेश नीति की समीक्षा करने की भी बात कही है. 

कट्टरवादी ताकतों की वजह से जकार्ता के गवर्नर अहोक पर ईशनिंदा का मुकदमा दर्ज किया गया था. उन्हें दो साल की सजा दी गई. 

विडिडो ने मारुफ अमिन को अपना रनिंग मेट बनाया है. 

प्रबोवो ने इस्लामिक नेताओं और इस्लामिक स्कूलों को आर्थिक मदद देने का वादा किया है.

इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी रहती है. करीब 26 करोड़ मुस्लिम लोग यहां रहते हैं. इंडोनेशिया में करीब 17 हजार छोटे-छोटे द्वीप है. 

 


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