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सूरत में तैयार हो रहा दुनिया का सबसे बड़ा 'ग्रीन डायमंड हब', पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन - 'ग्रीन डायमंड हब'

सूरत में दुनिया का सबसे बड़ा 'ग्रीन डायमंड हब' तैयार किया जा रहा है. अगले छह महीनों में यहां से कच्चे हीरे की नीलामी और पॉलिश किए हुए हीरों को निर्यात करने का व्यापार शुरू होगा. इससे दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है.

'ग्रीन डायमंड हब'
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Published : May 17, 2021, 5:55 PM IST

Updated : May 17, 2021, 6:09 PM IST

गुजरात : सूरत में दुनिया का सबसे बड़ा 'ग्रीन डायमंड हब' तैयार किया जा रहा है. अगले छह महीनों में यहां से कच्चे हीरे की नीलामी और पॉलिश किए हुए हीरों को निर्यात करने का व्यापार शुरू होगा. हब से दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है. हब के निर्माण में शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिए इसे ग्रीन प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है. प्रोजेक्ट में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है. इस साल दिवाली के मौके पर इसके उद्घाटन की उम्मीद की जा रही है. आइए एक नजर डालते हैं इस हब की खास बातों पर.

सूरत में तैयार हो रहा 'ग्रीन डायमंड हब'

6 महीने बाद दुनिया के सामने होगा ये हब

गुजरात और सूरत के लिए गर्व करने वाली बात होगी कि अगले छह महीने में वे दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन डायमंड हब से रूबरू होंगे. बता दें, देश और विदेश के चार हजार से ज्यादा व्यापारी इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं. दुनियाभर के प्रमुख हीरा व्यापारी इस परियोजना को आशा की नजर से देख रहे हैं. सूरत में तैयार हो रहा ग्रीन डायमंड हब, मुंबई स्थित डायमंड हब से चार गुना बड़ा होगा, जहां 75 देश व्यापार करेंगे.

सूरत डायमंड हब की खास बातें

इस डायमंड हब में 20 मंजिला नौ टॉवर होंगे, जिसमें प्रत्येक टॉवर में 4,500 ऑफिस होंगे. इसे 'पंचतत्व' की थीम पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें सौर पैनल्स और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी होंगे. टॉवर के मुख्य द्वार से किसी भी ऑफिस में सिर्फ पांच मिनट में पहुंचा जा सकेगा. सभी टॉवर में कुल 128 लिफ्ट होंगी. लिफ्ट से 16वीं मंजिल तक जाने में सिर्फ 18 सेकंड का समय लगेगा.

  • इस परियोजना की लागत 2,500 करोड़ रुपये और निवेश 1.25 लाख करोड़ रुपये है.
  • इसके निर्माण में 46 हजार टन स्टील का इस्तेमाल होगा.
  • इस हब से सूरत में 2 लाख करोड़ रुपये का व्यवसाय होगा.
  • यहां दो घंटे में आग बुझाने की सुविधा उपलब्ध होगी.
  • सभी इमारतों पर 400 केवी सोलर रूफटॉप के साथ 1.8 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होगा.
  • साथ ही इन टॉवर में बिजली और पानी की बचत की भी सुविधा होगी.
  • हब के लिए गुजरात सरकार ने समिति को 36 एकड़ जमीन दी और परियोजना की आधारशिला रखी.
    'ग्रीन डायमंड हब'
    'ग्रीन डायमंड हब'

एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से एमएसएमई (MSME) क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा. एमएसएमई से जुड़े दुनिया भर के खरीदार जब यहां आएंगे, तो मुंबई के डायमंड हब में ऑफिस ना मिलने की स्थिति में उन्हें सूरत डायमंड हब में जाने का मौका मिलेगा. वे दुनिया भर के खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे और छोटे व्यापारियों को लाभान्वित करेंगे.

जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पश्चिम जोन के चेयरमैन दिनेश नवादिया ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि डायमंड इंडस्ट्री से जुड़े व्यापारियों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि इस क्षेत्र का विनिर्माण केंद्र सूरत में, तो वहीं व्यापारिक केंद्र मंबुई में था, जिसके कारण व्यापारियों को मुंबई और सूरत दोनों जगहों पर ऑफिस बनाने की जरूरत पड़ती थी.

कोरोना महामारी के दौरान मुंबई के व्यापारियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. फिर व्यापारियों ने देखा कि उन्हें सूरत में शिक्षा, चिकित्सा देखभाल और परिवहन की सुविधाएं काफी किफायती दरों पर मिल सकती हैं. सूरत में हब से स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सूरत में लोग अपना आयकर रिटर्न भी दाखिल कर सकेंगे, जिसका सीधा फायदा गुजरात सरकार को होगा. उन्होंने आगे बताया कि इसके निर्माण के लिए देश-विदेश से योगदान मिला है.

डायमंड हब समिति के सदस्य माथुर सावनी ने ईटीवी भारत को बताया कि 4,500 व्यापारी इस परियोजना को बना रहे हैं. 75 देशों से खरीदार यहां पॉलिश किए गए हीरे खरीदने आएंगे. साथ ही यहां कच्चे हीरों की भी नीलामी की जाएगी. यह प्रोजेक्ट छह महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा. उन्होंने आगे बताया कि अकेले सूरत में 100 में से 90 हीरों का तराशा और उन पर पॉलिश की जाती है. आने वाले दिनों में सूरत में 2 लाख करोड़ रुपये का व्यवसाय होगा. इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम द्वारा पानी की सप्लाई की जा रही है.

पीएम मोदी करेंगे हब का उद्घाटन ?

परियोजना से जुड़े व्यापारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परियोजना का उद्घाटन कराने की कोशिश कर रहे हैं. हब को इस साल दिवाली के मौके पर लॉन्च करने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, इस परियोजना से जुडे़ उद्योगपतियों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से इस प्रोजेक्ट में देरी हुई, लेकिन उन्होंने इस बात का विश्वास जताया कि यह परियोजना अगले छह महीने में पूरी हो जाएगी.

पढ़ेंः बच्चों को कोरोना टीका लेना चाहिए? जानें बाल रोग विशेषज्ञ की राय

गुजरात : सूरत में दुनिया का सबसे बड़ा 'ग्रीन डायमंड हब' तैयार किया जा रहा है. अगले छह महीनों में यहां से कच्चे हीरे की नीलामी और पॉलिश किए हुए हीरों को निर्यात करने का व्यापार शुरू होगा. हब से दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है. हब के निर्माण में शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिए इसे ग्रीन प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है. प्रोजेक्ट में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है. इस साल दिवाली के मौके पर इसके उद्घाटन की उम्मीद की जा रही है. आइए एक नजर डालते हैं इस हब की खास बातों पर.

सूरत में तैयार हो रहा 'ग्रीन डायमंड हब'

6 महीने बाद दुनिया के सामने होगा ये हब

गुजरात और सूरत के लिए गर्व करने वाली बात होगी कि अगले छह महीने में वे दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन डायमंड हब से रूबरू होंगे. बता दें, देश और विदेश के चार हजार से ज्यादा व्यापारी इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं. दुनियाभर के प्रमुख हीरा व्यापारी इस परियोजना को आशा की नजर से देख रहे हैं. सूरत में तैयार हो रहा ग्रीन डायमंड हब, मुंबई स्थित डायमंड हब से चार गुना बड़ा होगा, जहां 75 देश व्यापार करेंगे.

सूरत डायमंड हब की खास बातें

इस डायमंड हब में 20 मंजिला नौ टॉवर होंगे, जिसमें प्रत्येक टॉवर में 4,500 ऑफिस होंगे. इसे 'पंचतत्व' की थीम पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें सौर पैनल्स और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी होंगे. टॉवर के मुख्य द्वार से किसी भी ऑफिस में सिर्फ पांच मिनट में पहुंचा जा सकेगा. सभी टॉवर में कुल 128 लिफ्ट होंगी. लिफ्ट से 16वीं मंजिल तक जाने में सिर्फ 18 सेकंड का समय लगेगा.

  • इस परियोजना की लागत 2,500 करोड़ रुपये और निवेश 1.25 लाख करोड़ रुपये है.
  • इसके निर्माण में 46 हजार टन स्टील का इस्तेमाल होगा.
  • इस हब से सूरत में 2 लाख करोड़ रुपये का व्यवसाय होगा.
  • यहां दो घंटे में आग बुझाने की सुविधा उपलब्ध होगी.
  • सभी इमारतों पर 400 केवी सोलर रूफटॉप के साथ 1.8 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होगा.
  • साथ ही इन टॉवर में बिजली और पानी की बचत की भी सुविधा होगी.
  • हब के लिए गुजरात सरकार ने समिति को 36 एकड़ जमीन दी और परियोजना की आधारशिला रखी.
    'ग्रीन डायमंड हब'
    'ग्रीन डायमंड हब'

एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से एमएसएमई (MSME) क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा. एमएसएमई से जुड़े दुनिया भर के खरीदार जब यहां आएंगे, तो मुंबई के डायमंड हब में ऑफिस ना मिलने की स्थिति में उन्हें सूरत डायमंड हब में जाने का मौका मिलेगा. वे दुनिया भर के खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे और छोटे व्यापारियों को लाभान्वित करेंगे.

जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पश्चिम जोन के चेयरमैन दिनेश नवादिया ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि डायमंड इंडस्ट्री से जुड़े व्यापारियों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि इस क्षेत्र का विनिर्माण केंद्र सूरत में, तो वहीं व्यापारिक केंद्र मंबुई में था, जिसके कारण व्यापारियों को मुंबई और सूरत दोनों जगहों पर ऑफिस बनाने की जरूरत पड़ती थी.

कोरोना महामारी के दौरान मुंबई के व्यापारियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. फिर व्यापारियों ने देखा कि उन्हें सूरत में शिक्षा, चिकित्सा देखभाल और परिवहन की सुविधाएं काफी किफायती दरों पर मिल सकती हैं. सूरत में हब से स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सूरत में लोग अपना आयकर रिटर्न भी दाखिल कर सकेंगे, जिसका सीधा फायदा गुजरात सरकार को होगा. उन्होंने आगे बताया कि इसके निर्माण के लिए देश-विदेश से योगदान मिला है.

डायमंड हब समिति के सदस्य माथुर सावनी ने ईटीवी भारत को बताया कि 4,500 व्यापारी इस परियोजना को बना रहे हैं. 75 देशों से खरीदार यहां पॉलिश किए गए हीरे खरीदने आएंगे. साथ ही यहां कच्चे हीरों की भी नीलामी की जाएगी. यह प्रोजेक्ट छह महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा. उन्होंने आगे बताया कि अकेले सूरत में 100 में से 90 हीरों का तराशा और उन पर पॉलिश की जाती है. आने वाले दिनों में सूरत में 2 लाख करोड़ रुपये का व्यवसाय होगा. इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम द्वारा पानी की सप्लाई की जा रही है.

पीएम मोदी करेंगे हब का उद्घाटन ?

परियोजना से जुड़े व्यापारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परियोजना का उद्घाटन कराने की कोशिश कर रहे हैं. हब को इस साल दिवाली के मौके पर लॉन्च करने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, इस परियोजना से जुडे़ उद्योगपतियों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से इस प्रोजेक्ट में देरी हुई, लेकिन उन्होंने इस बात का विश्वास जताया कि यह परियोजना अगले छह महीने में पूरी हो जाएगी.

पढ़ेंः बच्चों को कोरोना टीका लेना चाहिए? जानें बाल रोग विशेषज्ञ की राय

Last Updated : May 17, 2021, 6:09 PM IST
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