नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में माओवादियों के दो शीर्ष भर्तीकर्ताओं को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है (Maoists in Andhra Pradesh, Telengana and Tamil Nadu).
भारत की प्रमुख आतंकवाद विरोधी एजेंसी के सूत्रों ने गुरुवार को ईटीवी भारत को बताया कि एजेंसी ने उदय उर्फ गडरिया रवि उर्फ गणेश उर्फ बिरसू और अरुणा उर्फ वेंकट रवि चैतन्य के बारे में जानकारी देने के लिए नकद इनाम की भी घोषणा की है. सूत्रों के अनुसार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में माओवादियों की भर्ती करने वाले दो महत्वपूर्ण लोग जिम्मेदार हैं.
ईटीवी भारत के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, एनआईए केस संख्या आरसी 02/2022/एनआईए/एचवाईडी (पेड्डाबयालु भर्ती मामला) के संबंध में उदय और अरुणा की तलाश कर रही है.
एजेंसी ने दोनों फरार लोगों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया है. सूत्रों ने बताया कि उदय तेलंगाना के वारंगल का रहने वाला है जबकि अरुणा आंध्र प्रदेश की रहने वाली है.
इन दोनों की भूमिका तब सामने आई जब एनआईए आंध्र प्रदेश स्थित धर्मार्थ संगठन चैतन्य महिला संघम (सीएमएस) में शामिल होने के लिए युवा लड़कियों की कथित भर्ती की जांच कर रही थी.
सूत्रों ने कहा कि सीएमएस में शामिल होने के बाद, वे नए सदस्य कट्टरपंथी बन रहे हैं और उन्हें सीपीआई (माओवादी) में भर्ती किया जा रहा है. सीपीआई (माओवादियों) में युवा लड़कियों की भर्ती तब सुर्खियों में आई जब विशाखापत्तनम के पेद्दाबायलु पुलिस स्टेशन ने पिछले साल की शुरुआत में एक मामला दर्ज किया था जिसे जून में एनआईए द्वारा फिर से दर्ज किया गया था.
यह मामला राधा नाम की महिला की सीपीआई (माओवादी) संगठन में भर्ती के संबंध में शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था. सूत्रों ने कहा कि 'उदय और अरुणा दोनों संभावित व्यक्ति हैं जिनके माध्यम से माओवादी दक्षिण भारतीय राज्यों में युवाओं की भर्ती करते हैं.'
सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, माओवादी केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के जंगलों वाले अपने पश्चिमी घाट को पुनर्जीवित करने की बेताब कोशिश कर रहे हैं. सूत्रों ने कहा कि 'कैडर की कमी और खोता जन समर्थन माओवादियों को भर्ती के लिए मजबूर कर रहा है.'