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Sawan 2023: माता सीता और महर्षि वाल्मीकि इस मंदिर में करने आते थे पूजा, सीएम नीतीश की भी गहरी आस्था - जटाशंकर शिव मंदिर वाल्मीकिनगर

त्रेता कालीन शिव मंदिर में महर्षि वाल्मीकि और माता सीता पूजा अर्चना करने पहुंचती थीं. लिहाजा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गर्भ में बसे जटाशंकर मंदिर में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और सावन माह में जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. इस मंदिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी खास कनेक्शन है. पढ़ें पूरी खबर..

Shiva temple of Valmiki Nagar
Shiva temple of Valmiki Nagar
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Published : Jul 24, 2023, 2:05 PM IST

त्रेता कालीन शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बगहा: इंडो नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर के जटाशंकर शिव मंदिर और कौलेश्वर शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर सावन माह में भारत और नेपाल के दूरदराज के इलाके से श्रद्धालु इन दोनों शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गर्भ में अवस्थित इस शिवमन्दिर का पौराणिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां महर्षि वाल्मीकि और माता जानकी पूजा अर्चना करने आते थे.

पढ़ें- Sawan 2023: समस्तीपुर के इस मंदिर का नाम थानेश्वर क्यों पड़ा? जानिए इसके पीछे का रोचक किस्सा

महर्षि वाल्मीकि और माता जानकी करते थे पूजा : साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वाल्मीकिनगर प्रवास के दौरान इस मंदिर में पूजा करना नहीं भूलते हैं. बताया जाता है कि वाल्मीकि आश्रम से नजदीक होने के कारण जटाशंकर शिव मंदिर में महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और लव कुश त्रेता युग में पूजा करने आते थे. लिहाजा इस मंदिर में पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.

त्रेता कालीन शिव मंदिर से नीतीश कुमार का खास कनेक्शन: यही वजह है कि इस मंदिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी खास कनेक्शन है. सीएम जब भी वाल्मीकिनगर के दौरे पर आते हैं तो इस मंदिर में सुबह सुबह पूजा अर्चना करने जरूर आते हैं. मंदिर के पुजारी मनोज शर्मा ने बताया की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत हिंदुस्तान और नेपाल के भक्त यहां पूजा करने पहुंचते हैं. साथ ही पर्यटकों के लिए भी यह पसंदीदा धर्मस्थली है.

"यह मंदिर भगवान का दरबार है. यहां माता सीता से लेकर महर्षि वाल्मीकि तक भी पूजा करने आते थे. त्रिवेणी धाम की भी महत्ता है."-मुख्य पुजारी, जटाशंकर मंदिर

मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि त्रेता युग में इस मंदिर में वाल्मीकि आश्रम से महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और लव कुश भी पूजा करने आते थे. इसलिए घने जंगलों के बीच अवस्थित इस मंदिर में भारी संख्या में भक्त अपनी मन्नतें मांगने पहुंचते हैं. खासकर सावन में जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. त्रिवेणी संगम से जलबोझी कर भक्त पहले जटाशंकर मंदिर में जलाभिषेक करते हैं और फिर यहां से बिहार , यूपी और नेपाल के शिवालयों में ले जाकर जलाभिषेक करते हैं.

"हमारी मन्नत थी कि जल चढ़ाएंगे इसलिए आए हैं. दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं."- श्रद्धालु

रामसेतु का पत्थर बना आकर्षण का केंद्र: वहीं बेतिया के सिकटा से आए श्रद्धालु ने बताया कि वह यहां जलाभिषेक करने पहुंचे हैं. इस मंदिर के बारे में बहुत कुछ तो नहीं जानते लेकिन बाबा महादेव के बुलावा पर वह यहां पूजा अर्चना करने पहुंचे हैं. बता दें कि इस त्रेता युगीन शिव मंदिर के प्रांगण में एक टैंक बनाया गया है जहां रामेश्वरम से लाया गया रामसेतु का पत्थर भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है जो पानी पर तैरता है. पानी में तैरता पत्थर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है.

"सीएम नीतीश कुमार जब भी यहां आते हैं तो इस मंदिर में जरूर आते हैं. इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. देश ही नहीं बल्कि दूसरे देशों से भी लोग यहां पहुंचते हैं."- मनोज शर्मा, पुजारी

त्रेता कालीन शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बगहा: इंडो नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर के जटाशंकर शिव मंदिर और कौलेश्वर शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर सावन माह में भारत और नेपाल के दूरदराज के इलाके से श्रद्धालु इन दोनों शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गर्भ में अवस्थित इस शिवमन्दिर का पौराणिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां महर्षि वाल्मीकि और माता जानकी पूजा अर्चना करने आते थे.

पढ़ें- Sawan 2023: समस्तीपुर के इस मंदिर का नाम थानेश्वर क्यों पड़ा? जानिए इसके पीछे का रोचक किस्सा

महर्षि वाल्मीकि और माता जानकी करते थे पूजा : साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वाल्मीकिनगर प्रवास के दौरान इस मंदिर में पूजा करना नहीं भूलते हैं. बताया जाता है कि वाल्मीकि आश्रम से नजदीक होने के कारण जटाशंकर शिव मंदिर में महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और लव कुश त्रेता युग में पूजा करने आते थे. लिहाजा इस मंदिर में पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.

त्रेता कालीन शिव मंदिर से नीतीश कुमार का खास कनेक्शन: यही वजह है कि इस मंदिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी खास कनेक्शन है. सीएम जब भी वाल्मीकिनगर के दौरे पर आते हैं तो इस मंदिर में सुबह सुबह पूजा अर्चना करने जरूर आते हैं. मंदिर के पुजारी मनोज शर्मा ने बताया की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत हिंदुस्तान और नेपाल के भक्त यहां पूजा करने पहुंचते हैं. साथ ही पर्यटकों के लिए भी यह पसंदीदा धर्मस्थली है.

"यह मंदिर भगवान का दरबार है. यहां माता सीता से लेकर महर्षि वाल्मीकि तक भी पूजा करने आते थे. त्रिवेणी धाम की भी महत्ता है."-मुख्य पुजारी, जटाशंकर मंदिर

मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि त्रेता युग में इस मंदिर में वाल्मीकि आश्रम से महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और लव कुश भी पूजा करने आते थे. इसलिए घने जंगलों के बीच अवस्थित इस मंदिर में भारी संख्या में भक्त अपनी मन्नतें मांगने पहुंचते हैं. खासकर सावन में जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. त्रिवेणी संगम से जलबोझी कर भक्त पहले जटाशंकर मंदिर में जलाभिषेक करते हैं और फिर यहां से बिहार , यूपी और नेपाल के शिवालयों में ले जाकर जलाभिषेक करते हैं.

"हमारी मन्नत थी कि जल चढ़ाएंगे इसलिए आए हैं. दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं."- श्रद्धालु

रामसेतु का पत्थर बना आकर्षण का केंद्र: वहीं बेतिया के सिकटा से आए श्रद्धालु ने बताया कि वह यहां जलाभिषेक करने पहुंचे हैं. इस मंदिर के बारे में बहुत कुछ तो नहीं जानते लेकिन बाबा महादेव के बुलावा पर वह यहां पूजा अर्चना करने पहुंचे हैं. बता दें कि इस त्रेता युगीन शिव मंदिर के प्रांगण में एक टैंक बनाया गया है जहां रामेश्वरम से लाया गया रामसेतु का पत्थर भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है जो पानी पर तैरता है. पानी में तैरता पत्थर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है.

"सीएम नीतीश कुमार जब भी यहां आते हैं तो इस मंदिर में जरूर आते हैं. इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. देश ही नहीं बल्कि दूसरे देशों से भी लोग यहां पहुंचते हैं."- मनोज शर्मा, पुजारी

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